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सपा से छूटा पंखुड़ी पाठक का साथ

समाजवादी पार्टी की नई मीडिया पैनलिस्ट में पंखुड़ी पाठक का नाम शामिल नहीं होने के कारण उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया है। जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। पार्टी से किनारा करने के बाद पंखुड़ी पाठक ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से जुड़ी कुछ यादगार चीजों को भी खुद से दूर कर दिया है।  दूर की अखिलेश यादव से जुड़ी ये चीज दरअसल, इस्तीफा देने के बाद उन्होंने ट्विटर से अखिलेश यादव के साथ लगाई अपनी तस्वीर को बदल दिया है। पार्टी से इस्तीफा देने से पहले पंखुड़ी पाठक ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अखिलेश संग तस्वीर लगाई थी।  अगस्त 27 को समाजवादी पार्टी ने अपने प्रवक्ताओं की नई लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में पंखुड़ी पाठक का नाम नहीं था। जिससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी से किनारा करने का फैसला लिया है। ट्विटर पर दी इस्तीफे की जानकारी पंखुड़ी पाठक ने इस्तीफा देने की जानकारी खुद दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा- कि भारी मन से सभी साथियों को सूचित करना चाहती हूं कि @samajwadiparty के साथ अपना सफर का मैं अंत कर रही हूं। 8 साल पहले विचारधारा व युवा नेतृत्व से प्रभावित हो कर मैं इस पार्टी से...

अखिलेश यादव समाजवादी नहीं, नमाजवादी पार्टी के हैं अध्यक्ष: अमर सिंह

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार   राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने एक बार फिर अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला है। चुनाव जीतने पर विष्णु का मंदिर बनाने वाले अखिलेश यादव के बयान को लेकर अमर सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर एक गुस्से से भरा वीडियो जारी किया है। उन्होंने इस वीडियो में अखिलेश ही नहीं बल्कि आजम खान पर भी जमकर अपना गुस्सा उतारा है। अमर सिंह ने यहां तक कह दिया कि अखिलेश समाजवादी नहीं बल्कि नमाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर उनकी सत्ता में वापसी होती है तो वो उत्तर प्रदेश में भगवान विष्णु का भव्य मंदिर बनाएंगे और इसे विष्णु नगर के रुप में विकसित करेंगे। अखिलेश के इसी बयान पर गुस्सा जताते हुए अमर सिंह ने यह प्रतिक्रिया दी है। अपने वीडियो में अमर सिंह ने कहा, 'अखिलेश यादव तुम्हें विष्णु का मंदिर बनाने का अधिकार है, तुम समाजवादी पार्टी के सदर (अध्यक्ष) नहीं हो, तुम नमाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हो। तुम्हारा बनाया हुआ, तुम्हारे पिता का बनाया हुआ राजनीतिक पुत्र मोहम्मद आजम खान, उसने बयान दिया है कि अ...

कांग्रेस को सपा-बसपा से समझौता देगा बड़ा फायदा

आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार   समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सुझाव पर अमल करते हुए यदि कांग्रेस फ्रांस की फुटबाल टीम की तरह व्यवहार कर गई तो मध्य प्रदेश की सियासत के रंग कुछ और ही देखने को मिलेंगे। पिछले सप्ताह भोपाल आए अखिलेश ने कांग्रेस को सलाह दी थी कि जिस तरह फीफा वर्ल्ड कप में फ्रांस ने कई देशों से अपने खिलाड़ी चुने थे, उसी तरह कांग्रेस को भी करना चाहिए। उनका इशारा चुनाव पूर्व गठबंधन की ओर था, जिसकी तैयारियां कांग्रेस की ओर से जोर-शोर से जारी हैं। कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ टिकटों के बंटवारे पर चर्चा शुरू कर चुकी है ताकि ग्वालियर-चंबल संभाग, बंुदेलखंड और विंध्य की 90 सीटों के नतीजे पलटाए जा सकें। मप्र के ये वे हिस्से हैं जो उत्तर प्रदेश से सटे हुए हैं। वहां की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था इन इलाकों पर गहरा असर रखती हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो यह साबित भी होता है कि ग्वालियर, विंध्य और बुंदेलखंड में यदि पिछले चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच के मतों के अंतर को बसपा-सपा को मिले वोट से पाट दिया जाए तो भाजपा घाटे में दिखाई पड़ती है। इन तीनों क्षेत्रों में विध...

उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन से कांग्रेस हुई बाहर

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार   यूपी में महागठबंधन की चुनावी रणनीति में कांग्रेस बाहर रह सकती है।  सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस ऐलान के बाद, कि यूपी में 2019 में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए वो बहुजन समाज पार्टी का 'जूनियर' बनने को तैयार हैं, दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत लगभग फाइनल दौर में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि मायावती और अखिलेश के बीच सीटों के बंटवारे की रूपरेखा खिंच चुकी है। अब इसे लेकर केवल आधिकारिक ऐलान होना बाकी है। यूपी में 2019 के लिए बनने वाले महागठबंधन का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें आरएलडी को तो शामिल किया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को जगह नहीं दी जाएगी। माना यह जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 40 सीटों पर लड़ सकती हैं। बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी।  इसके अलावा 3 सीटें आरएलडी को दी जा सकती हैं। आरएलडी को मिलने वाली तीन सीट बागपत, कैराना और मथुरा हो सकती हैं। कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल तो नहीं किया जाएगा, लेकिन अमेठी और रायबरेली में सपा, बसपा या आरएलडी अपने उम्म...

यूपी में शाह का गणित नहीं अब माया-अखिलेश का गणित

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  देश की 4 लोकसभा सीटों और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए, 14 सीटों में एनडीए और महागठबंधन के बीच उपचुनाव का स्कोरकार्ड 3-11 का रहा। क्या 2019 के आम चुनावों की ओर बढ़ रहे राजनीतिक दलों के लिए ये नतीजे काफी दूरगामी असर डालने वाले हैं?  1. जहां बीजेपी के लिए उपचुनाव के नतीजे बड़ा झटका माने जा रहे हैं वहीं विपक्षी महागठबंधन के प्रयोग की सफलता की कहानी भी बयान करने वाले रहे। खासकर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के बोल्ड सियासी फैसले ने साफ कर दिया कि बीजेपी के चाणक्य अमित शाह के लिए 2019 की जंग यूपी में 2014 जितनी आसान नहीं रहने वाली।  2. इस जीत का श्रेय दिया जाना चाहिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती को. जिन्होंने अपनी साझी रणनीति से पहले गोरखपुर-फूलपुर और अब कैराना-नूरपुर में बीजेपी को मात देकर तमाम दलों को मोदी मैजिक को मात देने का अचूक फॉर्मूला दे दिया।  3. अब मोदी मैजिक की काट विपक्षी दलों के पास है और वो है महागठबंधन का फार्मूला। जो पहले बिहार में सफल रही थी और अब यूपी में हर उपचुनाव मे...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)