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धर्मांध प्रधानाध्यापक ने सरकारी विद्यालय का नाम बदलकर किया ‘इस्लामिया प्राइमरी स्कूल’, शुक्रवार को रहती है छुट्टी

देवरिया : उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र में एक जिला परिषदीय विद्यालय के एक अल्पसंख्यक समुदाय के प्रधानाध्यापक ने कथित तौर पर मनमानी करते हुए शुक्रवार को विद्यालय बंद रखने की परंपरा शुरू कर दी है ! यह विद्यालय रविवार को खुलता है। इतना ही नहीं इस विद्यालय का नाम बदलकर ‘इस्लामिया प्राइमरी स्कूल’ कर दिया गया ! इसका खुलासा शुक्रवार को हुआ तो प्राथमिक शिक्षा विभाग में हडकंप मच गया ! जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने प्राथमिक शिक्षा अधिकारी से जांच पत्रावली तलब करते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है। सलेमपुर के खंड शिक्षा अधिकारी ज्ञानचंद मिश्र को गुरुवार को जानकारी मिली कि प्राथमिक विद्यालय नवलपुर में तैनात प्रधानाध्यापक शुक्रवार को विद्यालय बंद रखते हैं ! रजिस्टर की जांच में भी पुष्टि इसकी जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के अधिकारी देवी शरण सिंह और हरेंद्र द्विवेदी को विद्यालय भेजा। दोनों लोग ९:४५ बजे विद्यालय पर पहुंचे, तो वह बंद मिला। यही नहीं, विद्यालय की बिल्डिंग पर प्राथमिक विद्यालय नवलपुर की जगह ‘इस्लामिया प्राइमरी स्कूल, नवलपु...

बंगाल में आरएसएस के स्कूलों को नहीं चलने देगी ममता सरकार : पार्थ चटर्जी

बंगाल में ममता सरकार अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ आरएसएस पर प्रहार करने का शायद मन बना चुकी है। प्राप्त समाचार के अनुसार, शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा है कि राज्य सरकार बंगाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) संचालित स्कूलों को चलने नहीं देगी। आखिर संघ संचालित स्कूलों को बंद कर ममता सरकार क्या सिद्ध करना चाहती है? राज्य के विभिन्न भागों में खास कर उत्तर बंगाल में आरएसएस संचालित 125 स्कूल चल रहे है। इसमें से किसी स्कूल प्रबंधन ने सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं लिया है। यदि इन स्कूलों ने अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है, फिर किस आधार पर अबतक ये स्कूल चलते रहे? ऐसे स्कूलों को सरकार चलने नहीं देगी। क्या ममता सरकार अगला चुनाव संघ के विरुद्ध मोर्चा खोलकर लड़ना चाहती है? चटर्जी ने विधानसभा में शिक्षा बजट पर हुई बहस के जवाबी भाषण में यह बातें कही है। इस तरह के राज्य के विभिन्न भागों में और 493 स्कूल चल रहे जिन पर सरकार कड़ी नजर रख रही है। जांच के बाद इन स्कूलों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने विधानस...

शिक्षा के नाम पर चल रहे व्यवसाय बन्द हों ?-- मनोज श्रीवास्तव

जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में चुनाव निकट आ रहे हैं, सभी राजनीतिक पार्टियाँ जनसमस्याओं को उजागर कर अपनी ओर आकर्षित करने का भरसक प्रयत्न कर रही हैं। जहाँ तक कांग्रेस की बात है, यह पार्टी केवल उत्तर प्रदेश में ही बल्कि भारत के अन्य राज्यों में केवल अपने अस्तित्व के लिए चुनाव मैदान में आती है। वास्तव में कांग्रेस 1977 में जनता पार्टी बनने के साथ ही हाशिये पर आनी शुरू हो गयी थी। कांग्रेस केवल क्षेत्रीय पार्टियों द्धारा मिले समर्थन के ही कारण जीवित है, अन्यथा आज इस पार्टी का कोई नाम लेवा भी नहीं होता।  आज देशवासी जिन विषम समस्याओं से झूझ रहे हैं, वास्तव में कांग्रेस ही की देन है। यदि कांग्रेस ने जनसमस्याओं को गंभीरता से लिया होता, जनता को इतनी समस्याओं से नहीं सामना करना पड़ता। और न तीन बार दिल्ली की मुख्यमन्त्री रही शीला दीक्षित को मोहरा बनाकर मैदान में आना पड़ता। जबकि उत्तर प्रदेश में प्रभावी कांग्रेस नेताओं की कोई कमी नहीं। यही कारण है कि राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी को गम्भीर जनसमस्याओं से परेशान जनता के मुद्दों को नहीं उठाना पड़ता।  जिन समस्याओं को राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी उठा रही ह...

नगर पालिका एवं सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की शैक्षिक योग्यता की जाँच हो

किसी भी बच्चे के भविष्य की माँ-बाप के बाद शिक्षक की होती है। लेकिन जब शिक्षक ही शिक्षा में अज्ञान होगा, बच्चों का भविष्य क्या सुधारेगा?  सोशल मीडिया पर एक लंबे समय से बिहार और उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के अल्पज्ञान के समाचार पढ़ने में आ रहे हैं, परन्तु प्रदेश से लेकर केन्द्र सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं, जो बहुत ही चिंता का विषय है। वैसे कई उच्च अधिकारियों द्धारा अचानक स्कूलों का निरीक्षण करने के वीडियोस भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। पता नहीं, अध्यापकों की मंद बुद्धि, दिनों एवं महीने के नाम गलत लिखने पर क्या कार्यवाही की या मुद्दे को दबा दिया गया।    एक नमूना अध्यापिका का university के स्पेलिंग देखिये  Worked at  Nagar Nigam Prathmik Sehshiksha Vidyalaya, Sarvapriya Vihar Studied at  gkp univercity ये है लखनऊ की पत्रकार biyuro chiph luckmow at  All Press & Writers Association India- APWA Went to  Gic Lives in  Lucknow, India केन्द्रीय सरकार प्रदेश का मुद्दा होने के का...

दिल्ली में कल के चर्चित स्कूलों की शोचनीय स्थिति के लिए दोषी कौन?

पुरानी दिल्ली में औरंगजैब के जमाने का स्कुल अब बंद होने जा रहा है। इस स्कुल का नाम एंगलो अरेबिक है और यह पुरानी दिल्ली का 324 साल पुराना स्कूल है। जानकारी के मतुाबिक, इस स्कुल से देश के नामचीन लोगों ने पढाई की है। स्कुल के बंद होने की वजह अध्यापकों की कमी को बताया जा रहा है। बता दें कि इस स्कूल में 1800 छात्र ही पढ़ाई करने के लिए बचें है। इन हस्तियो ने की इस स्कूल से पढ़ाई पूर्व सासंद एम अफजल ने इस स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की है। अफजल का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों ने इस स्कुल से पढ़ाई की शुरुआत की क्योंकि प्राइवेट स्कुल के महंगे होने की वजह से उनमे पढ़ नहीं सके। वहीं यही कहा जाता है कि कई अभिभावकों की उम्मीदों की किरण इस स्कूल से जुड़ी हुई है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सैय्यद अहमद खान और भारतीय हॉकी लीजेंड मिर्जा एमएन मसूद भी इस स्कूल के छात्र रहे हैं। वहीं पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी. इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर के अध्यक्ष सिराजुद्दीन कुरैशी, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के कुलपति असलम परवेज और प्रख्यात ऊर्दू प्रोफे...

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