थावरचंद गहलोत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को अगस्त 6 को संसद की मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में इससे संबंधित संविधान (123वां संशोधन) विधेयक पारित कर दिया। लोकसभा से इसे पहले ही पारित कराया जा चुका है। सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि इससे पिछड़े वर्ग का सशक्तिकरण होगा और आयोग की शक्तियां भी बढ़ेंगी। जानें क्या है राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और इसके काम किया है। ये आयोग सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए है। इस आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे। इसमें कम से कम एक महिला होगी। आयोग एक स्वायत्त संस्था के तौर पर काम करेगा। ये आयोग पिछड़े वर्गों से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगा। अब पिछड़ी जातियों की समस्याओं का निपटारा हो सकेगा। इस आयोग का गठन 1993 में किया गया था।ओबीसी तबके में जातियों को जोड़ने या हटाने के लिए राज्यपाल से परामर्श लेने का प्रस्ताव हटा। अब राज्य सरकारों से ही परामर्श लेने का प्रावधान। ओबीसी के उत्थान को लेकर बनने वाली योजनाओं में आयोग की भूमिका म...