राजनीति कितने निचले स्तर पर जा सकती है, इसका उदाहरण केवल भारत में ही मिल सकता है। अपनी कुर्सी की खातिर अपने भगवानों तक पर शंकायें कर सकते हैं। रामजन्मभूमि, मथुरा और काशी को विवादित किया, कुर्सी के भूखे नेताओं की तुष्टिकरण नीति ने। आज की युवा पीढ़ी भारत के वास्तविक इतिहास में लगभग किसी अनपढ़ से कम नही, क्योंकि उन्हें पढ़ाया गया मुग़ल आक्रमणकारियों का इतिहास। निकालो उस इतिहास को जिसमे लिखा है कि किस तरह सम्राट पोरस ने सिकन्दर और उसकी सेना की दुर्गति कर भारत की धरती पर नापाक कदम रखने की सजा दी थी। और हमें पढ़ाया जाता है, सिकन्दर एक विश्व विजेता था, इतना ही नहीं parsia (वर्तमान ईरान) ने भी सिकन्दर को सबक सिखाने के लिए सम्राट पोरस की सहायता ली थी। खैर। खुदाई में मिली वैदिक लिखावट 1992 में विवादित ढांचा गिराए जाने उपरान्त जब न्यायालय के आदेश पर खुदाई हुई, सर्वप्रथम मुलायम सिंह यादव राष्ट्र को बताएं उनके क्या शब्द थे, दूसरे खुदाई में मिले मन्दिर अवशेषों को कोर्ट से क्यों छुपाया गया? आखिर कब तक जनता की लाशों पर ये कुर्सी के भूखे नेता अपनी रोटियाँ सेकें...