भारत का संविधान अपने हर नागरिक को प्राण व जीवन की रक्षा का अधिकार देता है. इसके अलावा भारत का नागरिक होने के नाते देश के हर छोटे बड़े और हर अमीर गरीब देशवासी को समान भाव से कुछ मौलिक अधिकार भी प्राप्त हैं. इस स्थिति में कोई भी बदलाव बिना विशेष परिस्थितियों और बिना आपातकाल की घोषणा किये करने की इजाज़त संविधान नही देता. लेकिन बेहद अफसोसनाक स्थिति है कि पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के अदूरदर्शी फैसले के बाद से देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद हिल जाने के कारण पूरे देश में अफरातफरी की स्थिति बन गयी है.देश के आम जन जीवन में यह कोहराम इसलिए मचा हुआ है कि अर्थव्यवस्था की साख मानी जाने वाली मुद्रा पर ही भारत में संकट आ पड़ा है. सरकार की मानें तो हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में लगभग 86% स्थान घेरने वाले 500 और 1000 के बड़े नोटों को वापस लेने से देश के छोटे बड़े सभी कालाबाजारियों की कमर टूट जायेगी और सारा काला धन सरकार के कब्जे में होगा. लेकिन जनता की तरफ से सोचें तो एक बड़ा सरल सा सवाल पैदा होता है कि वे नोट जो कुल कल करेंसी में 86% हिस्से में व्याप्त थे, उनको अचानक आधी रात क...