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Presidential elections in India since 1952

Dr Rajendra Prasad (L) was the only President who won two consecutive Presidential elections.  Presidents of India occupies the top most executive post of the country. He is the Head of state and Commander-in-chief of the Indian Armed Forces. Though s/he doesn’t run the government directly, the Prime Minister does that on behalf of the President in accordance with the Constitution. The president is elected indirectly by the people through their representatives in both houses of Parliament and legislative assemblies of states and union territories, including National Capital Territory of Delhi. The President serves a five- year term. Since independence, India has elected remarkable statesmen and leaders in different walks of life from across the country as its president. The presidential election has also often been a battle of ideologies between the opposing camps. Even in Presidential Election 2017, Meira Kumar of the opposition camp said her’s is a battle of ideology...

अमरनाथ यात्रा पर हमले का षड्यंत्र

आतंकी हमले कांग्रेस सरकारों में भी होते थे और आतंकी हमले बीजेपी सरकारों में भी हो रहे हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कांग्रेस के समय में आतंकी हमले सरकार को डराने के लिए किये जाते थे। जबकि मोदी सरकार में आतंकी हमले मोदी सरकार को उखाड़ने और कांग्रेस को फिर से वापस लाने के लिए किये जा रहे हैं। आतंकी लोग कांग्रेस को इसलिए वापस लाना चाहते हैं क्योंकि कांग्रेस सरकार में उन्हें बॉर्डर पार कर कश्मीर आने में छूट मिल जाती है, जिहाद करने की छूट मिलती है, कश्मीर में आतंकी कैम्प चलाने की छूट मिलती हैं, आतंकियों को भर्ती करने की छूट मिलती हैं, आतंकी फंडिंग को कोई रोकने वाला नहीं होता।  आतंकियों को पता है कि जब कांग्रेस सरकार होती है तो भारतीय सैनिकों के हाथ बाँध दिए जाते हैं, कांग्रेस सरकार में आतंकी भारत में कहीं भी आ जा सकते हैं, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, जयपुर, वे कहीं भी बम धमाके कर सकते हैं और उन्होंने करके दिखाया है। लेकिन मोदी सरकार में आतंकियों को बॉर्डर पर ही मार दिया जा रहा है, वे ना तो दिल्ली में धमाके कर पा रहे हैं, ना मुंबई में धमाके कर पा रहे हैं, ना 26-11 जैसा ...

राष्ट्रपति पद की गरिमा का सम्मान कब होगा?

देश में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गयी है, पक्ष और विपक्ष ने अपने दलित उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है। जहां NDA की तरफ से रामनाथ कोविंद हैं तो वहीं कांग्रेस की तरफ से मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है। सोशल मीडिया पर दोनों प्रत्याशियों को लेकर काफी बातें चल रही हैं जो थोड़ी चौकाने वाली भी। सोशल मीडिया वैसे भी सनसनी ख़बरों को काफी बढ़ाचढ़ाकर दिखाने के लिए माहिर  है।  वैसे कई ख़बरें ऐसी भी होती है जो सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुँच जाती हैं जिसमें न्यूज़ चैनल्स पीछे रह जाते हैं, लेकिन ऐसी ख़बरों पर विश्वनीयता का अभाव होता है।  राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं.  दरअसल मीरा कुमार और रामनाथ कोविंद हैं तो दलित लेकिन इन दोनों के बारे में जो बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं वो आपको सोचने पर मजबूर करती हैं, कि आखिर इन्हें बताया तो दलित जा रहा है लेकिन जैसा इनका इतिहास है और वर्तमान है उसको देखते हुए क्या ये दलित होने का फायदा उठाने लायक हैं? क्या इन...

राष्ट्रपति चुनाव लाया बिहार महागढ़बंधन पर मुसीबतों का पहाड़

बिहार में महागठबंधन की सरकार अब बिखर सकती है। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर महागठबंधन में आए दरार के बाद अब जेडीयू पूरी तरह से महागठबंधन से अलग होने के लिए तैयार है। जेडीयू के बड़े नेता केसी त्यागी ने तो साफ कह दिया कि जेडीयू बीजेपी के साथ गठबंधन में कहीं अधिक सहज थी, जबकि लालू यादव के साथ स्थिति बेहद असहज हो चली है। भाजपा के साथ चलते नीतीश का ही कद नहीं बड़ा था, बल्कि जेडीयू का भी।  दरअसल, राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करने के समय जेडीयू के अलग रुख के बाद कांग्रेस और आरजेडी ने नीतीश कुमार की तीखी आलोचना की थी। JDU राज्य सभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी. त्यागी  ने राष्ट्रपति पद के लिए मीरा कुमार को समर्थन ना देने को लेकर बड़ा बयान दिया है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी पार्टी के नेता को ही राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाना चाहती थी इसलिए हमने उन्हें समर्थन नहीं दिया अगर मीरा कुमार की जगह किसी गैर-कांग्रेसी नेता को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जाता तो हम जरूर समर्थन देते।  वैसे भी तुलनात्मक दृष्टि से मीरा कुमार के मुकाबले राम नाथ कोविंद का पलड़ा ज...

सरकार को नहीं चुकातीं किराया मीरा कुमार

कांग्रेस और उसके साथी दलों ने  मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तो बना दिया, लेकिन कम लोगों को पता होगा कि उन्होंने दिल्ली में दो बड़े-बड़े सरकारी बंगलों पर अवैध तरीके से कब्जा जमाया हुआ है। मीरा कुमार ने लुटियंस दिल्ली में कृष्ण मेनन मार्ग पर अगल-बगल के दो बंगले न सिर्फ कब्जा रखे हैं, बल्कि उन्हें अंदर ही अंदर आपस में जोड़ दिया है। जबकि सरकारी नियमों के मुताबिक किसी बंगले की डिजाइन में बदलाव करने की इजाज़त नहीं है। 2014 में नई सरकार बनने के बाद जब उन्हें बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया तो पता चला कि उन्होंने 2013 में ही खुद को 25 साल के लिए ये दोनों बंगले अलॉट करवा लिए हैं। इन बंगलों में वो अपने पिता जगजीवन राम के नाम पर ट्रस्ट चलाती हैं, क्योंकि उनके पिता कभी यहां रहा करते थे। सरकार को नहीं चुकातीं किराया खुद आईएफएस अफसर रह चुकीं मीरा कुमार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन जिन बंगलों पर उनके कब्जे हैं उनका किराया तक देने को वो राजी नहीं। 2013 तक का 1.96 करोड़ रुपये का किराया उन्होंने मनमोहन सरकार के वक्त ही माफ करवा लिया था। 2014 में जब बीजेपी सरकार सत्ता म...

जब कांग्रेस ने अपने ही उम्मीदवार को हारवा दिया था

देश में जब भी राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं,  सत्ता पक्ष के उम्मीदवार ने ही जीत हासिल की है। लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि प्रधानमंत्री ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया और उसे हारना पड़ा?जी हां ऐसा हुआ था साल 1969 में जब कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी को हार का सामना करना पड़ा था। दरअसल, साल 1969 में तत्कालीन  राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मई में आकस्मिक निधन के बाद राष्ट्रपति चुनाव कराना पड़ा। उस वक्त तक यह परंपरा थी कि उप राष्ट्रपति को ही राष्ट्रपति बनाया जाता था। उस समय उपराष्ट्रपति वीवी गिरी ही थे।1969 के चुनाव में कांग्रेस के भीतर इंदिरा के विरोधियों ने वीवी गिरी की जगह नीलम संजीव रेड्डी को उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया। फिर इंदिरा ने बाबू जगजीवन राम का नाम आगे किया लेकिन कांग्रेस संसदीय बोर्ड में उनके जगजीवन राम के नाम सहमित ना बन पाने के कारण इंदिरा की ओर से प्रस्तावित इस नाम को खारिज कर नीलम संजीव रेड्डी को ही उम्मीदवार बनाया गया। इसी दौरान वीवी गिरी ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीवारी के लिए ...

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष भी दलित कार्ड खेलने उतरा

काफी दिनों के इं‍तेजार के बाद आज एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार का ऐलान हो गया। मोदी सरकार ने बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को राष्‍ट्रपति पद के नए उम्‍मीदवार बनाया है। एनडीए की तरफ से इस नाम का ऐलान सर्वसम्‍मति बैठक में हुआ है। बीजेपी की यह बैठक पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई थी। इस ऐलान के बाद विपक्ष कहां चुप बैठने वाला था। खबर है कि एनडीए को कांटे की टक्कर देने के लिए विपक्ष की तरफ से लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया जा सकता है। मीरा कुमार पांच बार लोकसभा की सांसद रही हैं मीरा कुमार पांच बार लोकसभा की सांसद रही हैं। वहीं, मीरा कुमार पहली महिला लोकसभा की स्पीकर रही। मीरा दलित समुदाय से हैं और वे पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की सुपुत्री हैं। मीरा कुमारी 1973 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुई। वे कई देशों में नियुक्त रहीं और बेहतर प्रशासक साबित हुई। बिहार की सासाराम जिले की मीरा कुमारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से हैं। वे पंद्रहवीं लोकसभा में बिहार के सासाराम लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। ...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)