कांग्रेस और उसके साथी दलों ने मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तो बना दिया, लेकिन कम लोगों को पता होगा कि उन्होंने दिल्ली में दो बड़े-बड़े सरकारी बंगलों पर अवैध तरीके से कब्जा जमाया हुआ है। मीरा कुमार ने लुटियंस दिल्ली में कृष्ण मेनन मार्ग पर अगल-बगल के दो बंगले न सिर्फ कब्जा रखे हैं, बल्कि उन्हें अंदर ही अंदर आपस में जोड़ दिया है। जबकि सरकारी नियमों के मुताबिक किसी बंगले की डिजाइन में बदलाव करने की इजाज़त नहीं है। 2014 में नई सरकार बनने के बाद जब उन्हें बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया तो पता चला कि उन्होंने 2013 में ही खुद को 25 साल के लिए ये दोनों बंगले अलॉट करवा लिए हैं। इन बंगलों में वो अपने पिता जगजीवन राम के नाम पर ट्रस्ट चलाती हैं, क्योंकि उनके पिता कभी यहां रहा करते थे।
खुद आईएफएस अफसर रह चुकीं मीरा कुमार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन जिन बंगलों पर उनके कब्जे हैं उनका किराया तक देने को वो राजी नहीं। 2013 तक का 1.96 करोड़ रुपये का किराया उन्होंने मनमोहन सरकार के वक्त ही माफ करवा लिया था। 2014 में जब बीजेपी सरकार सत्ता में आई तो इसी साल जुलाई में उन्हें 12 लाख रुपये का नोटिस भेजा गया। लेकिन यह रकम भी उन्होंने नहीं चुकाई। 2009 में लोकसभा स्पीकर बनने के बाद मीरा कुमार को 20 अकबर रोड पर नया बंगला मिल गया। लेकिन उन्होंने कृष्ण मेनन मार्ग पर अपने दोनों बंगले खाली नहीं किए। इसके बाद सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही इन दोनों बंगलों का आवंटन 25 साल के लिए करवा लिया। अब ये दोनों बंगले उनके पास 2038 तक रहेंगे।
चाहे राष्ट्रपति हो, प्रधानमंत्री हो या लोकसभा स्पीकर, किसी को भी सरकारी बंगले में छेड़छाड़ करने, निर्माण करने और तोड़फोड़ करने का अधिकार नहीं है, अगर ऐसा कोई करता है तो कानून का उल्लंघन होता है, अब आप खुद सोचिये, मीरा कुमार ने ना सिर्फ दोनों बंगले पर कब्ज़ा किया, दोनों को आपस में जोड़कर अपनी आलिशान हवेली बना ली, जो नेता कानून को नहीं मानता, क्या उसे राष्ट्रपति बनाना सही रहेगा या सिर्फ दलित होने से किसी को भी राष्ट्रपति उम्मीदवार बना दिया जाएगा।
2014 में मोदी सरकार के आने के बाद मीरा कुमार को दोनों बंगले खाली करने के लिए बार बार नोटिस दिया गया, लेकिन उन्होंने कहा कि मैंने दोनों बंगलों को 25 साल के लिए अपने लिए बुक करवा लिया है, अब तक उनका करोड़ों रुपये का किराया हो गया है लेकिन उन्होंने मनमोहन सरकार के समय डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास माफ़ करवा लिया, अब वे बंगले का किराया भी देने को राजी नहीं हैं और ना छोड़ने को राजी है।
अब प्रश्न है, जो स्वयं कानून को धता कर रही हो, देश को कानून पालन करने के लिए कैसे आव्हान कर सकती है।
सरकार को नहीं चुकातीं किराया
खुद आईएफएस अफसर रह चुकीं मीरा कुमार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन जिन बंगलों पर उनके कब्जे हैं उनका किराया तक देने को वो राजी नहीं। 2013 तक का 1.96 करोड़ रुपये का किराया उन्होंने मनमोहन सरकार के वक्त ही माफ करवा लिया था। 2014 में जब बीजेपी सरकार सत्ता में आई तो इसी साल जुलाई में उन्हें 12 लाख रुपये का नोटिस भेजा गया। लेकिन यह रकम भी उन्होंने नहीं चुकाई। 2009 में लोकसभा स्पीकर बनने के बाद मीरा कुमार को 20 अकबर रोड पर नया बंगला मिल गया। लेकिन उन्होंने कृष्ण मेनन मार्ग पर अपने दोनों बंगले खाली नहीं किए। इसके बाद सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही इन दोनों बंगलों का आवंटन 25 साल के लिए करवा लिया। अब ये दोनों बंगले उनके पास 2038 तक रहेंगे।चाहे राष्ट्रपति हो, प्रधानमंत्री हो या लोकसभा स्पीकर, किसी को भी सरकारी बंगले में छेड़छाड़ करने, निर्माण करने और तोड़फोड़ करने का अधिकार नहीं है, अगर ऐसा कोई करता है तो कानून का उल्लंघन होता है, अब आप खुद सोचिये, मीरा कुमार ने ना सिर्फ दोनों बंगले पर कब्ज़ा किया, दोनों को आपस में जोड़कर अपनी आलिशान हवेली बना ली, जो नेता कानून को नहीं मानता, क्या उसे राष्ट्रपति बनाना सही रहेगा या सिर्फ दलित होने से किसी को भी राष्ट्रपति उम्मीदवार बना दिया जाएगा।
2014 में मोदी सरकार के आने के बाद मीरा कुमार को दोनों बंगले खाली करने के लिए बार बार नोटिस दिया गया, लेकिन उन्होंने कहा कि मैंने दोनों बंगलों को 25 साल के लिए अपने लिए बुक करवा लिया है, अब तक उनका करोड़ों रुपये का किराया हो गया है लेकिन उन्होंने मनमोहन सरकार के समय डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास माफ़ करवा लिया, अब वे बंगले का किराया भी देने को राजी नहीं हैं और ना छोड़ने को राजी है।
अब प्रश्न है, जो स्वयं कानून को धता कर रही हो, देश को कानून पालन करने के लिए कैसे आव्हान कर सकती है।
चाँदी का चम्मच मुँह लेकर पैदा होने वाला दलित कैसे
यूपीए और उसके साथी दलों ने मीरा कुमार को दलित बताकर मैदान में उतारा है, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि वो किसी लिहाज से दलित नहीं हैं। उनके पिता जगजीवन राम दलितों के जाने-माने नेता जरूर थे। लेकिन मीरा कुमार उनकी बेटी के तौर पर चांदी की चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुईं। पिता की विरासत के तौर पर ही वो लोकसभा के चुनाव भी जीतती आईं। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में बिहार की आरा सीट से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।
दलितों की हितैषी नहीं नकलची है कांग्रेस
--योगी आदित्य नाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को नकलची पार्टी बताया है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी दलितों की हितैषी नहीं है। क्योंकि अगर उन्हें दलित को राष्ट्रपति बनाना होता तो मीरा को पहले ही मैदान में उतार दिया होता। उन्होंने हमारे प्रत्याशी की नक़ल करके दलित नेता के तौर पर मीरा कुमार को मैदान में उतारा है। अगर कांग्रेस ने पहले ही मीरा कुमार को मैदान में उतारा होता तो बीजेपी को हर हाल में उनका समर्थन करना पड़ता लेकिन कांग्रेस इस मामले में आलस कर गयी।
जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस के पास कोई प्रत्याशी नहीं है तो उन्होंने रामनाथ कोविंद को मैदान में उतार दिया, जब उनका बैकग्राउंड देखा गया तो वे दलित निकले, मीडिया ने हल्ला मचा दिया, जब कांग्रेस ने देखा कि बीजेपी ने एक दलित नेता को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है तो उन्होंने मीरा कुमार को मैदान में उतार दिया हालाँकि मीरा कुमार के पिता दलित हैं लेकिन पति ब्राह्मण है।
दलितों की हितैषी नहीं नकलची है कांग्रेस
--योगी आदित्य नाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को नकलची पार्टी बताया है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी दलितों की हितैषी नहीं है। क्योंकि अगर उन्हें दलित को राष्ट्रपति बनाना होता तो मीरा को पहले ही मैदान में उतार दिया होता। उन्होंने हमारे प्रत्याशी की नक़ल करके दलित नेता के तौर पर मीरा कुमार को मैदान में उतारा है। अगर कांग्रेस ने पहले ही मीरा कुमार को मैदान में उतारा होता तो बीजेपी को हर हाल में उनका समर्थन करना पड़ता लेकिन कांग्रेस इस मामले में आलस कर गयी।
जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस के पास कोई प्रत्याशी नहीं है तो उन्होंने रामनाथ कोविंद को मैदान में उतार दिया, जब उनका बैकग्राउंड देखा गया तो वे दलित निकले, मीडिया ने हल्ला मचा दिया, जब कांग्रेस ने देखा कि बीजेपी ने एक दलित नेता को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है तो उन्होंने मीरा कुमार को मैदान में उतार दिया हालाँकि मीरा कुमार के पिता दलित हैं लेकिन पति ब्राह्मण है।
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