रेसुल पुकूट्टी ने साउंड डिजाइन के लिए ऑस्कर जीता था आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक फिल्म जगत में स्पर्धा में एक दूसरे को नीचे का काम शुरू से ही चलता रहा है, लेकिन कई परिस्थितियों में ऐसा भी देखा गया है कि जब कोई अभिनेता फिल्म कथानक के अनुसार अपने आपसे किसी दूसरे दूसरे अभिनेता को ढालने में असमर्थ पाने की स्थिति अपने से बेहतर अभिनेता, चाहे वह ज्यादा अनुभवी न हो, को फिल्म में लेने की निर्माता-निर्देशक को कहते थे। वैसे उन दिनों निर्माता-निर्देशक कलाकारों पर मेहनत भी करते थे, संगीत में भी गीतकार, पार्श्व गायक और निर्माता और निर्देशक सभी संगीतकार का साथ देते थे, ताकि गीत एक लम्बे समय तक श्रोताओं का मनोरंजन कर सके। जबकि आज स्थिति एकदम विपरीत है। जिस कारण न फिल्म ज्यादा चलती है और न ही उनके गीत। वही हालत अभिनय की है। जबसे फिल्म जगत पर पश्चिमी सभ्यता का बोलबाला हुआ है, हर स्तर पर मायने बदल गए हैं। फिल्म जगत में एक से एक से बढ़कर एक दर्दनाक मौतें होती रही हैं, चर्चा तक नहीं हुई, और किसी ने चर्चा करने की हिम्मत भी नहीं की। सुशांत की अनोखी मौत नहीं हुई ह...