आर.बी.एल.निगम हिंदी के कवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता हैं, जिसमें ये पंक्ति आती है कि याचना नहीं अब रण होगा संग्राम बड़ा भीषण होगा दिनकर की ये पंक्तियां साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव पर लगभग सटीक बैठ रही है। वामपंथी लेखकों के लगभग कब्जे वाली संस्था को इस विचारधारा से मुक्त करवाने के लिए कई लेखकों ने संग्राम का एलान कर दिया है। जीत किसकी होगी, ये तो होने वाले चुनाव में पता चलेगा, लेकिन तस्वीर बहुत कुछ 21 दिसंबर को हुई वर्तमान एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में साफ हो गयी। साहित्य अकादमी के चुनाव का उद्घोष हो चुका है और 5 साल बाद होनेवाले इस चुनाव को लेकर साहित्यिक हलके में बहुत हलचल है। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद को लेकर 9 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। मराठी से भालचंद्र नेमाड़े, ओडिया से प्रतिभा राय, कन्नड़ से चंद्रशेखर कंबार, हिंदी से अरुण कमल, लीलाधर जगूड़ी और रामशरण गौड़ और गुजराती से बलवंत जानी के अलावा दो और नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित थे. इन 9 सदस्यों के लिए साहित्य अकादमी की आमसभा के ...