हिन्दी में मुहावरा है "बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होए", जो आज ब्रिटेन में चरितार्थ हो रहा है। ये वही ब्रिटेन है,जिसने भारत के कुछ भारतीय नेताओं को बहकावे में लेकर तुष्टिकरण के पेड़ का वृक्षारोपण किया था। आज वही वृक्ष इतना अधिक विशाल हो गया है कि उसकी जड़ें सात समुद्र पार ब्रिटेन तक पहुँच, उसी को बर्बाद करने को तत्पर है। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने कुछ भारतीय छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं और इतिहासकारों के माध्यम से भारत के वास्तविक इतिहास को ही बदल कर, मुस्लिम समाज को भी मुख्यधारा से न जुड़ पाने के लिए विवश कर दिया, उन बेचारों को सन्देह के घेरे में खड़ा कर दिया है। भारतीय मुस्लिम तो आज मुख्यधारा से जुड़ने का सफल प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आज ब्रिटेन उसी आग में जलने की ओर अग्रसर है। ब्रिटेन की पुलिस ने आखिरकार मा ना है कि उनके देश में कई इलाके ऐसे हैं जहां उसकी एंट्री पर बैन है। इन इलाकों को उन्होंने ‘नो-गो ज़ोन’ कहा है। एक बड़े ब्रिटिश पुलिस अफसर ने कहा है कि इन इलाकों में पैट्रोलिंग के लिए भी उन्हें मुस्लिम नेताओं से अनुमति लेनी पड़ती है। अखबार डेली मेल में छपी रिपोर्ट ...