आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर द्वारा मन्दिर मसला सुलझाने के लिए दर-दर जाना, शायद बाबरी समर्थकों को राहत दे रहा है, क्योकि उन्हें मालूम है कि कोई प्रमाण बाबरी मस्जिद के हक़ में नहीं है। पिछली सरकारों के रहते, मुसलमानों को पागल बनाकर जो मालपुए खाते रहे, सच्चाई उजागर होने पर यही मुसलमान हमें किसी दीन का नहीं छोड़ेगा। इनके घरवालों की भी जान जोखिम पड़ जाएगी, संभावनाएं हैं कि इन्ही परिवार वाले इनकी ज़िंदगी दूबर न कर दें। इतिहास से लेकर खुदाई में मिले अवशेषों तक सभी राममन्दिर के पक्ष में हैं। ऐसी स्थिति में रविशंकर ने पहल कर शायद मन्दिर पक्ष को कमजोर कर दिया है। रविशंकर बताएं कौन सा मुस्लिम बातचीत में आगे आया? रवि शंकरजी को इतना ज्ञान होना चाहिए था, कि यदि आज भी कोर्ट के समक्ष इतिहास को छोड़ो, खुदाई में मिले समस्त अवशेष प्रस्तुत कर दिए जाएँ, अयोध्या और उत्तर प्रदेश तो क्या भारत किसी भी कोने में मस्जिद के नाम पर जगह नहीं दी जा सकती। अगर रविशंकर के आश्रम पर कोई कब्ज़ा कर ले और वह मुकदमा हार जाए, क्या उस स्थिति में भी रविशंकरजी नाजायज कब्ज़ा करने वाले को कोई अन्य स्थान देने की बात कोर्ट को...