आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का गुजरात चुनाव के दौरान मंदिरों में जाकर माथा टेकना कितना स्वांगपूर्ण एवं भ्रमित करने वाला था, वह कांग्रेस महाधिवेशन में उजागर हो गया। क्योकि सच्चाई अधिक दिनों तक छुप नहीं सकती, जिस प्रकार सुगन्ध अपना अस्तित्व जग के सम्मुख लाये बगैर रह नहीं सकती। गुजरात चुनावों में जिस तरह अपने आपको जनेऊधारी ब्राह्मण बताकर जनता को भ्रमित किया गया। लेकिन दिल में छुपे हिन्दू धर्म के प्रति नफरत को चुनावों तक दफ़न करके रखा। शर्म की बात कांग्रेस में सम्मिलित उन हिन्दुओं के लिए है, जो देवी माता के दिवसों में हिन्दू धर्म का अपमान बर्दाश्त कर एक गुलाम की भाँति पार्टी में टिके बैठे हैं। ऐसा आभास होता है, कि इन हिन्दुओं में आत्मसम्मान मर चूका है। दिल्ली में कांग्रेस महाधिवेशन में राहुल गांधी ने अपने समापन भाषण में हिंदुओं और ब्राह्मण परंपरा का एक बार फिर से अपमान किया है। खुद को पंडित बताने वाले राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान मंदिर जाने की दो कहानियां सुनाईं। यह तो समझ में नहीं आया कि वो ये कहानियां सुनाकर क्या जताना चाहते थे, ले...