जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में चुनाव निकट आ रहे हैं, सभी राजनीतिक पार्टियाँ जनसमस्याओं को उजागर कर अपनी ओर आकर्षित करने का भरसक प्रयत्न कर रही हैं। जहाँ तक कांग्रेस की बात है, यह पार्टी केवल उत्तर प्रदेश में ही बल्कि भारत के अन्य राज्यों में केवल अपने अस्तित्व के लिए चुनाव मैदान में आती है। वास्तव में कांग्रेस 1977 में जनता पार्टी बनने के साथ ही हाशिये पर आनी शुरू हो गयी थी। कांग्रेस केवल क्षेत्रीय पार्टियों द्धारा मिले समर्थन के ही कारण जीवित है, अन्यथा आज इस पार्टी का कोई नाम लेवा भी नहीं होता। आज देशवासी जिन विषम समस्याओं से झूझ रहे हैं, वास्तव में कांग्रेस ही की देन है। यदि कांग्रेस ने जनसमस्याओं को गंभीरता से लिया होता, जनता को इतनी समस्याओं से नहीं सामना करना पड़ता। और न तीन बार दिल्ली की मुख्यमन्त्री रही शीला दीक्षित को मोहरा बनाकर मैदान में आना पड़ता। जबकि उत्तर प्रदेश में प्रभावी कांग्रेस नेताओं की कोई कमी नहीं। यही कारण है कि राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी को गम्भीर जनसमस्याओं से परेशान जनता के मुद्दों को नहीं उठाना पड़ता।
जिन समस्याओं को राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी उठा रही है, वास्तव में बहुत ही गम्भीर मुद्दे हैं। और यदि यह पार्टी प्रदेश में सत्ता में आती है, देश के राजनीति को एक नया आयाम देगी। किसको नहीं मालूम की स्कूलों में कितनी धांतारियां चल रही हैं, लेकिन केन्द्र से लेकर सभी राज्य सरकारें आँखें मूंदे हुए हैं। जो इस बात को प्रमाणित करता है कि स्कूल प्रबन्धन और सरकारों में कितना समन्वय है, स्कूलों में इतना डोनेशन एवं मोटी फीसों के होते हुए माता-पिता को प्राइवेट ट्यूशन पर निर्भर रहना पड़ता है। अन्यथा उनका बच्चा नर्सरी भी पास करने योग्य नहीं हो सकता। यह है हमारी शिक्षा प्रणाली। राजपा ने जो शिक्षा का मुद्दा उठाया है, वास्तव में अति गम्भीर मुद्दा है। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो शिक्षा के नाम पर व्यवसाय चल रहा है।
शिक्षा के नाम पर निजी विद्यालय बच्चों के माता पिता से फिरौती ही तो वसूल रहें हैं, इन अघोषित अपहरणकर्ताओं के लिए न कोई नियम है ना ही कोई कानून न ही संविधान में किसी सजा का प्रावधान...
इन पर लगाम कसनी है तो इस बार उत्तर प्रदेश चुनाव में राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी (राजपा) के हाथ में आपको अपने वोट की ताकत सौंपनी होगी... क्योंकि हम प्रदेश में " समान शिक्षा अधिकार अधिनियम " लाना चाह रहे हैं। इस कानून के लागु होते ही आपको निजी विद्यालय के शोषण का शिकार नहीं होना होगा। आप केवल इन स्कूलों में अपने बच्चे का दाखिल कराएं आपके बच्चे की ट्यूशन फ़ीस सरकार सीधे इन विद्यालयों को देगी। क्योकि सरकार आपसे उन हर वस्तुओं में जिन्हें आप बाजार से खरीदते है उनपर 2% एजुकेशन टेक्स लेती है तो फिर वह पैसा आपके बच्चे की शिक्षा पर ही खर्च होना चाहिए..
जनता को मुफ्तघोर बनाती पार्टीयां
चुनावी दौर में हर पार्टियां और उसके नेता हमारे अन्नदाता किसानों के लिए वादों की बौछार कर देता है कोई बिजली बिल माफ़ करने की बात करता है तो कोई किसानों का कर्ज माफ़ करने की बात कहता है, क्यों..? यह माफ़ी का उपकार किसानों पर ही क्यों..? आखिर किसान ही इस देश में एक ऐसा अपराधी क्यों माना जाता है जिसे कोई आर्थिक संम्पन्नता की योजना का विश्वास यहाँ के राजनैतिक दल और उसके नेता नहीं देते बल्कि माफ़ कर देने का वादा करते हैं।
साथियों राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी हमारे अन्नदाता किसान के माथे पर लगा कर्जदार का धब्बा हटाना चाहती है। हमारी पार्टी किसानों को माफी नहीं आर्थिक सम्पन्नता की मुस्कान उनके चहरे पर लाना चाहती है। इसके लिए हम किसान भाईयों के लिए " किसान आय अधिकार अधिनियम " लायेंगे जिसके अंतर्गत किसान की हर फसल का बीमा उसकी लागत और उसके श्रम मूल्य के योग के आधार पर कराया जायेगा ( अभी केवल लागत मूल्य के आधार पर बिमा होता है) उपज मूल्य के अनुसार अगर किसान को घाटा होगा तो पूरी राशि बीमा कम्पनी को किसान को भुगतान करना होगा।
मित्रों आज किसान भाईयों को इस कानून के माध्यम से संरक्षण देना अति आवश्यक है। किसानों के चहरे पर आर्थिक संम्पन्नता की मुस्कान अत्यावश्यक है। आपका साथ चाहिए इस सरकार और सरकारी सिस्टम को बदलने के लिए।
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