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अमरनाथ हमला : क्या ड्राइवर सलीम साज़िश में शामिल था?

कश्मीर में श्रीअमरनाथ यात्रा पर हमला और बंगाल की सेक्यूलर हिंसा उन विकृत नीतियों का ही परिणाम है, जिन्हें सेक्यूलर गत 70 बरसों से सेक्यूलरवाद के नाम पर देश में परोस रहे हैं। इसी विकृति ने कश्मीर, केरल के कई क्षेत्र और अब प0 बंगान को भयावह स्थिति में धकेल दिया है। जब तक सेक्यूलरिज्म के नाम पर जेहादी और कट्टरवादी मानसिकता को प्रोत्साहन मिलता रहेगा, जब तक यह सच स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इस आतंकवाद की जड़ ‘रेडिकल इस्लाम’ है, तब तक नये-नये कश्मीर और प0 बंगाल बनते रहेंगे।
अमरनाथ यात्रा के दौरान हमले का शिकार हुई बस के ड्राइवर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक बस ड्राइवर सलीम को क्लीनचिट नहीं दी है। उससे पहले ही जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने उसे इनाम देने और मीडिया ने उसे हीरो बनाने की शुरुआत कर दी है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक उच्च सुरक्षा अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि ड्राइवर की लापरवाही सीधे तौर पर सामने आई है। अखबार ने बताया है कि यह बस अमरनाथ श्राइन बोर्ड से रजिस्टर्ड नहीं थी और न ही इसमें वो जरूरी सुरक्षा जानकारियां दी गई थीं जो तीर्थयात्रियों को ले जाने के लिए देना जरूरी होता है। खतरे को देखते हुए सभी बस वाले इन नियमों का सख्ती से पालन कर रहे थे। ये संभवत: इकलौती बस थी जिसने किसी नियम-कायदे का पालन नहीं किया और यात्रियों की जान जोखिम में डाली।

अवलोकन करें :--



इस आतंकी हमले से जुड़ी एक दुर्भाग्यपूर्ण बात ये सामने आ रही है कि इस हमले की आशंका जताते हुए IB ने पहले ही बताया था कि हो ना हो आतंकी इस समय...
NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.IN

साजिश में शामिल था ड्राइवर?

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस बस से आ रहे लोग दो दिन पहले ही अमरनाथ गुफा की अपनी यात्रा पूरी कर चुके थे। इसके बाद ये सभी श्रीनगर आ गए थे। अमरनाथ यात्रा का तय रास्ता पहलगाम से सीधे जम्मू जाता है। लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि जम्मू जाने के बजाय ये बस श्रीनगर क्यों आई। इस पूरे इलाके में आतंकी खतरे के बावजूद बस का रात के वक्त जम्मू के लिए निकलना भी शक पैदा कर रहा है। पर्यटक बसों को वैसे भी रात में ट्रैवेल करने की इजाज़त नहीं है। अनंतनाग जिले के खानाबल में रात करीब 8 बजकर 20 मिनट पर आतंकवादियों ने बस को निशाना बनाया। ये वो वक्त है जब अमरनाथ यात्रा मार्ग के लिए तय सुरक्षा खत्म हो चुकी होती है। यह बात यहां सबको पता होती है। सवाल ये कि इस ड्राइवर ने जम्मू जाने के लिए यही वक्त क्यों चुना? इस आधार पर कहा जा रहा है कि अगर ड्राइवर साजिश में शामिल न भी हो तो भी उसने लापरवाही बरतकर लोगों की जान को जोखिम में डाला।

सुरक्षा इंतजाम से बच रहा था

बस नंबर GJ09Z 9976 की मूवमेंट से ऐसा लग रहा है मानो ड्राइवर सुरक्षा इंतजामों से बचने की कोशिश कर रहा था। उसने ज्यादातर गलत समय पर ही बस को चलाया। अमरनाथ यात्रा की रजिस्टर्ड बसों को सेना अपना सुरक्षा कवर देती है। ये बसें बाकायदा काफिले में चलती हैं और उनके चारों तरफ सेना की गाड़ियां होती हैं। इन बसों की मूवमेंट की जानकारी पूरे रूट के सिक्योरिटी पोस्ट पर होती है। लेकिन इस बस को लेकर ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। पहलगाम से चलने वाली बसें आम तौर पर दोपहर 1 बजे तक रवाना हो जाती हैं, ताकि उन्हें उजाला रहते ही सुरक्षित इलाके में पहुंचाया जा सके।

फायरिंग की दिशा पर भी संदेह

बस के यात्री बता रहे हैं कि आतंकवादी सामने से आए और बस पर गोलियां चलाने लगे। बस के आगे का शीशा फायरिंग से टूट गया, लेकिन ड्राइवर सलीम के शरीर पर खरोंच तक नहीं आई। आम तौर पर ऐसे हमलों में आतंकवादी सबसे पहले ड्राइवर को निशाना बनाते हैं। यहां तक कि बस की बॉडी पर भी कोई गोली नहीं लगी है, सारी गोलियां शीशे की खिड़कियों में छेद करके अंदर गईं हैं। कहा यह जा रहा है कि सलीम ने हमले के वक्त बस नहीं रोकी जिससे बस में बैठे 50 से ज्यादा लोगों की जान बच पाई। सोशल मीडिया पर कई लोग इस दावे को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
मीडिया द्वारा तुष्टिकरण 
harsh-desai-is-real-hero-of-amarnath-terrorists-attack-not-saleemमीडिया के दोगलेपन की पोल खुल गयी है, मीडिया ने उसे हीरो नहीं बनाया जिसनें अपनी जान पर खेलकर 50 यात्रियों की जान बचाई थी बल्कि उसे हीरो बना दिया जिसको एक भी गोली नहीं लगी और जो साइड हीरो का रोल निभा रहा था मतलब बस का कंडक्टर था.
आपको बता दें कि अमरनाथ यात्री बस पर जब आतंकियों ने हमला किया तो उस वक्त बस हर्ष देसाई चला रहे थे वही बस के मेन ड्राईवर थे, आतंकियों ने उनपर तीन गोलियां चलाईं लेकिन उन्होंने बस नहीं रोका. एक गुजराती अखबार के मुताबिक़, जब हर्ष देसाई बस चला रहे थे तो आतंकियों ने उन्हें ख़त्म करने की कोशिश की, एक आतंकी ड्राईवर हर्ष देसाई को ख़त्म करने के प्रयास में थे इसलिए उन्होने हर्ष देसाई पर फायरिंग कर दी फायरिंग में हर्ष देसाई को तीन गोलियां लगीं.
जब हर्ष देसाई को तीन गोलियां लग गयीं और उनकी तवियत खराब होने लगी तो उन्होने सहायक ड्राईवर सलीम के हाथों में स्टेयरिंग थमा दी और उसे बस लगातार चलाते रहने के लिए कहा. सलीम ने हर्ष देसाई की बात मानी और बस को चलाता रहा, उसनें पुलिस चेक पोस्ट पर जाकर बस रोक दी.
हर्ष देसाई सलीम को बस की ड्राइविंग सीट पर बिठाकर गेट की तरफ आ गए, एक आतंकी बस में घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन हर्ष देसाई ने उसे धक्का देकर बाहर फेंक दिया. उन्होंने अपनी जान पर खेलकर और तीन गोलियां खाकर 50 लोगों की जान बचाई, अगर हर्ष देसाई बहादुरी ना दिखाते और तीन गोलियां खाकर भी बस को ना चलाते रहते तो सभी लोग मारे जाते.
यहाँ पर हर्ष देसाई को फिल्म का मेन हीरो बनाना चाहिए था जबकि सलीम को साइड हीरो बनाना था लेकिन हर्ष देसाई को इसलिए हीरो नहीं बनाया गया क्योंकि उनके नाम में मुस्लिम शब्द नहीं लगा था, उन्हें हीरो बनाने से मीडिया को TRP नहीं मिलती.

आतंकियों को जलाओ जिंदा--गीता फोगाट 

कॉमनवेल्थ चैंपियन महिला पहलवान गीता फोगाट
अमरनाथ में आतंकी हमले से पूरे देश में उबाल है। सभी नामी हस्तियों ने ट्विटर पर इस हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर विपक्ष के सभी नेताओं ने इसके हमले के खिलाफ अपने विचार रखे। ट्विटर पर भी इस हमले को लेकर बेहद रोष है। ऐसे में मशहूर महिला पहलवान गीता फोगाट ने एक ट्वीट करके आतंकियों को जिंदा जलाने तक की बात कह डाली। उनकी ये बात कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला को पसंद नहीं आई। उन्होंने व्यंग्यात्मक भाषा में उनकी बात पर पीएमो मोदी की आलोचना की। तहसीन पूनावाला के व्यंग्य को शायद वामपंथी नेता कविता कृष्णन समझ नहीं पाई। उन्होंने ट्वीट करके तहसीन पर ही सवाल खड़ा कर दिया। तहसीन ने गीता के ट्वीट के जवाब में लिखा था कि जलना चाहिए इनको जिंदा, पर मोदी जी सिर्फ करते हैं निंदा.. इसी पर ट्वीट करते हुए कविता ने लिखा कि ये नफरत की भाषा है। संविधानिक वैल्यू के लिए कोई प्यार नहीं, उनको जिंदा जलाने की बात करना शर्मनाक और दुखद है।
इससे पहले जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अनंतनाग में अमरनाथ श्रद्धालुओं पर हुए इस हमले ने कश्मीरियत पर से यकीन को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री ने इस घटना को ‘‘सभी मुसलमानों और कश्मीरियों के लिए एक धब्बा’ बताया है।  सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी श्रीनगर पहुंचे और राज्यपाल एन एन वोहरा और महबूबा सहित कई लोगों से मुलाकात की। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री ने घंटे भर चली बैठक में कश्मीर घाटी खासकर पवित्र गुफा की ओर जाने वाले दो रास्तों में जारी हालात का जायजा लिया। अमरनाथ  यात्रा 29 जून से शुरू हुई थी, इसका समापन सात अगस्त को होगा। बैठक के तुरंत बाद, एनएसए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैठक में हुई चर्चा की जानकारी दी, साथ ही अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया।
अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुआ था दो बार अटैक: जम्मू-कश्मीर सरकार
केन्द्र को सौंपी रिपोर्ट 
जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों से भरी बस पर आतंकी हमले के बाद राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। 
जम्मू-कश्मीर सरकार ने रिपोर्ट में कहा गै कि अमरनाथ यात्रियों की बस पर सोमवार को रात में आतंकियों ने हमला एक बार नहीं बल्कि दो बार किया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑटोमैटिक राइफल से आतंकियों के दो गुटों ने बस पर हमला किया था। बता दें अमरनाथ यात्रियों को ले जा रही जिस निजी बस पर आतंकवादियों ने कश्मीर में हमला किया, वह छह महीने पहले ही नये मालिक को बेच दी गई थी।
लेकिन भुगतान के मुद्दों को लेकर इसका मालिकाना हक पुराने मालिक के पास ही था। अधिकारियों ने बताया कि बस का पंजीकरण नंबर GJ-09-Z-9976 है। इससे यह पता चलता है कि यह गुजरात में साबरकांठा जिले से है। 
इसके बाद इस बात का खुलासा हुआ कि बस के मालिक संजय पटेल ने इसे वलसाड के जवाहर देसाई को बेच दिया था, जो ट्रेवल एजेंसी ‘ओम ट्रेवल्स' के मालिक हैं। 
वहीं, पटेल साबरकंठा जिले के इदार कस्बे में ‘उमीया ट्रेवल्स' नाम से एक अन्य ट्रेवल एजेंसी चलाते हैं। साबरकांठा कलेक्टर पी स्वरूप ने बताया कि बस का पहला पंजीकरण साबरकांठा में था क्योंकि इसके नंबर प्लेट पर 'GJ-09' अंकित था। 
हालांकि यह पाया गया कि इसे वलसाड के टूर ऑपरेट को छह महीने पहले बेच दिया गया था। पटेल के मुताबिक बस का मालिकाना हक अब भी उनके पास है क्योंकि देसाई ने पूरा पैसा नहीं दिया है।
उनके मुताबिक देसाई ने दो जुलाई से 23 जुलाई तक के लिए अमरनाथ यात्रा की योजना बनाई थी इसलिए उन्होंने इसके लिए हिम्मतनगर परिवहन कार्यालय से परमिट हासिल की थी क्योंकि वह अब भी वाहन के आधिकारिक मालिक थे जबकि देसाई ने टूर आयोजक के तौर पर हस्ताक्षर किया था।
जम्मू-कश्मीर सरकार की दो पन्नों की रिपोर्ट में लिखा है कि बस के ड्राइवर ने तब भी बस नहीं रोकी और उसे एबल पुलिस नाके तक ले गया। वहां पुलिस पार्टी बस को इस्कॉर्ट कर अनंतनाग पुलिस लाइन में ले गई। वहां घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
फेसबुक पर प्रतिक्रियाएँ :--
सलीम स्थानीय गाइड था, बस ड्राइवर हर्ष देसाई था, जिसे गोली भी लगी थी फिर भी वो बस दौड़ाता रहा।
प्रेस्टिट्यूट्स ने सेकुलरता की चादर ओढ़ाने के लिए सलीम शेख को ड्राइवर बना दिया।
-इरा उपाध्याय

Jitendra Agarwal ये मीडिया सलीम को हीरो बना रही है ताकि दंगा न भड़क जाये|गुजरात सरकार भी उसे इनाम देने की जल्दी कर रही है| गुजरात 2002 जैसा भारत 2017 न बन जाये ! -इरा उपाध्याय

अमरनाथ हमले पर मौजूद ड्राइवर सलीम की संदिग्ध गतिविधियां 
*किसी भी ड्राइवर को 1 टायर का पंचर बनाने में 2 घंटे नहीं लगते, झूठ बोलकर सलीम हिन्दू यात्रियों को 7 बजे के बाद ले गया, बस पर गोलियां सामने से चलाई गयी पर 1 भी गोली सलीम को नहीं लगी*
नोट : बस बुलेट प्रूफ नहीं थी, न ही सिर्फ सीसा, अगर कोई नीचे भी झुक जाये तो भी स्टील, टिन की पतली चादर को गोली बिना किसी रुकावट के भेद देती है 
दर्जनों हिन्दू तीर्थ यात्रियों को गोली लगी, पर सामने बैठे सलीम को 1 भी गोली नहीं लगी। 
समाचारों के अनुसार बस को बिना सुरक्षा दायरे के बाहर क्यों लाया गया?
जब से यात्रियों पर हमला का समाचार आया, साथ में यह भी कि बस चालक सलीम ने साहस का परिचय देते हुए अनेको यात्रियों की जान बचाई, बस श्राइन बोर्ड में चलने की सूचना दिए बिना बाहर आई।   यहीं से शक की सुई सलीम पर भी जाती है। भगवान करे यह शक गलत सिद्ध हो। लेकिन जाँच जरुरी है। गुजरात सरकार ने इस बहादुरी के लिए सलीम को राष्ट्रीय सम्मान से पुरस्कृत करने की सिफारिश की है, जो उनका अधिकार भी बनता है। इतना ही नहीं, जिस समय यह बस बाहर निकल रही थी, तैनात सुरक्षाकर्मियों ने संज्ञान क्यों नहीं लिया?    

अमरनाथ यात्रियों से भरी बस पर अतंकियों ने की फायरिंग












आतंकी सबसे पहले ड्राइवर को मारते हैं सलीम कैसे बच गया?
एक खरोंच भी न आयी!
 पर शक  पर देश भर में इस्लामी आतंकवादियो के हमले से आग भड़क ना जाए इस लिए सलीम को हिरो बनाया जा रहा है ? pic.twitter.com/FYjVf5DyZs
बिल्कुल सही बात आखिर ये सलीम कैसे बिना पंजीकरण कराए बस में यात्रियों को दर्शन करने को ले जा रहा था ,इनाम क्यों दे इसकी जांच,इसे सजा हो ।।।
सब अंधे नहीं है मीडिया की तरह जो पलड़ा बराबर करने के लिए सलीम को हीरो बनाने पर तुल जायें /आखिर गया क्यों ७/३०के बाद & returns safe .. https://twitter.com/RanaAyyub/status/884671650641346560 
@sardanarohit अनरजिस्टर्ड गाड़ी,सूर्यास्त के बाद गाड़ी चलाना-दो पहली मुख्य गलतियां करने वाले सलीम को 2 लाख रु,वीरता पुरस्कार क्यों?


वामपंथी देशद्रोही पत्रकारों द्वारा ड्राइवर सलीम को हीरो बनाने में कुछ तो लोचा जरूर है ।

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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