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क्या सुशील मोदी बिहार के केजरीवाल सिद्ध होंगे या लालू परिवार के लिए काल?

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अप्रैल 24 को राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद श्री जगदानंद सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामचंद्र पूर्वे ने राजद प्रदेश कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते बिहार बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री व पर्यावरण मंत्री सुशील कुमार मोदी पर गंभीर आरोप लगाए लगाए। 
सुशील मोदी पर यह आरोप लगाते हुए जगदानंद ने  कहा कि वे भी 2011 से 2013 तक वन एवम् पर्यावरण मंत्री थे उनके कार्यकाल में भी 175 करोड़ का काम हुआ वे बताएँगे कि इसका टेंडर हुआ था या नहीं? वे जानते है कि वन एवम् पर्यावरण में बिना टेंडर का काम होता है और यह नियम 60 सालों से चला आ रहा है. जो आज भी है। उन्होंने कहा कि मैं खुद इस मंत्रालय का मंत्री रह चुका हूँ। जब मुख्यसचिव ने इसकी जाँच करवाई है और जाँच में सब कुछ स्पष्ट हो गया तब वे क्यों राजनीतिक मर्यादा को तार तार करने पर आमादा है?
सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि सुशील मोदी बिहार में अरविन्द केजरीवाल बन भाजपा को न ले डूबें। जिस तरह केजरीवाल ईमानदारी का चोला ओढ़ अपने भ्रष्टाचारी नेताओं को बचाने में संलग्न रहते है. उसी तर्ज़ पर सुशील अपने आरोपों को छुपाने के लिए दूसरों को आरोपित करते रहते हैं। 
सवाल सच में बड़ा अहम है कि “अपने विरोधियों पर भ्रष्टाचार के बिना तथ्यों के आरोपों की बौछार करने वाले छोटे मोदी के नाम से जाने-जाने वाले सुशील मोदी जी का परिवार अकूत संपत्ति का मालिक कैसे बन बैठा ?”
‘ हिट और रन ‘ सुशील मोदी जी की पुरानी फितरत रही है और अब जब राजद ने गंभीर आरोपों के साथ पलटवार किया है तो क्या शुचिता और खुद के पाकसाफ होने की दुहाई देने वाले सुशील मोदी जी अपने परिवार के खिलाफ भी निष्पक्ष जाँच की मांग केंद्र या राज्य सरकार से करेंगे ? लालू यादव के परिवार पर सुशील मोदी जी के द्वारा लगाए गए आरोपों के सन्दर्भ में सुशील मोदी जी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए ही बात की जाए तो अगर श्री मोदी के पास यादव परिवार के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य या नियमों के उल्लंघन की तथ्यात्मक जानकारी होती तो क्या  मोदी अदालत का दरवाजा खट-खटाने से चूकते? मोदी के द्वारा लालू यादव व् उनके परिवार पर लगाए गए आरोपों के सिलसिले पर गौर करने के पश्चात प्रथम – द्रष्टया जो बात उभर कर समझ में आती है वो ये है कि  "श्री सुशील मोदी का निहित उद्देश्य महज सनसनी पैदा कर लालू यादव व् उनके दोनों मंत्री – पुत्रों को बैक-फुट पर धकेल कर अपनी पार्टी के शीर्ष – नेतृत्व के समक्ष अपनी गिरती हुई साख क़ी मरम्मती करना था ” …
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लेकिन अब जब राजद ने कड़े तेवर व् गंभीर आरोपों के साथ पलटवार किया है तो पब्लिक – डोमेन में खुद को पाकसाफ़ साबित करने क़ी बारी श्री मोदी क़ी है , श्री मोदी के लिए राजद का पलटवार अप्रत्याशित तो होगा लेकिन अब जबाब देने क़ी बारी व् जिम्मेवारी तो बनती ही है …. आरोप गंभीर हैं और सुशील मोदी के नजदीकी रिश्तेदारों के व्यावसायिक हितों में पिछले एक दशक में हुए उछाल को देखते हुए राजद द्वारा लगाए आरोपों पर यकीन न करने की कोई बड़ी गुंजाईश भी नहीं बनती … कपड़ों के खुदरा कारोबार से शरुआत कर रेडीमेड परिधानों के थोक कारोबार तक का सफर तो समझ में आता है लेकिन सैंकड़ों कंपनियों का गठन और उनमें अकूत निवेश समझ से परे है ? ‘कुबेर का खजाना’ कहाँ से मिला मोदी जी के परिवार को ? बिहार की जनता जानना तो जरूर चाहेगी …. मनी- लॉन्ड्रिंग के लिए देश भर में कुख्यात ललित कुमार छावछरिया के साथ श्री सुशील मोदी जी के भाईयों का साझा व्यापार गंभीर मामला है और प्रवर्तन निदेशालय को इस पर त्वरित संज्ञान लेते त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए …. मनी–लॉन्ड्रिंग देश-द्रोह है और अब बारी श्री सुशील मोदी जी की है कि वो ये साबित करें कि उनके नजदीकी रिश्तेदार देश-द्रोह में शामिल नहीं हैं ?
राजकुमार मोदी तुम्हारा कौन हैं ? मौसा है या फूफा?
लालू प्रसाद व उनके परिवार पर भ्रष्टाचार संबधी आरोप लगाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी पर राजद ने मोर्चा खोल दिया हैं, लालू प्रसाद यादव ने बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी पर आक्रामक रुख आख्तियार करतें हुए ट्वीट कर के सीधे-सीधे पूछ डाला की राजकुमार मोदी तुम्हारा कौन हैं ? मौसा है या फूफा?
राजद प्रवक्ता मनोज झा ने धमाकेदार प्रेस कांफ्रेंस कर के आरोप लगाया था कि सुशील मोदी के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनका परिवार हजारों करोड़ रुपये का मालिक बन गया है, आख़िर ये अपार  सम्पति कहाँ से आयी हैं? जबकि मोदी के पिता पटना में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाकर अपना जीवन यापन करते थे। 
राज्य अथवा केन्द्र सरकार को दूध का दूध और पानी का पानी सिद्ध करने के लिए सुशील मोदी पर लगे  इन गम्भीर आरोपों का संज्ञान लेते हुए जाँच करनी चाहिए, अन्यथा जनता यही समझेगी कि लालू पर चारा घोटाले में कार्यवाही में देरी क्यों हो रही है? भाजपा को कहीं यह डर तो नहीं कि लालू के विरुद्ध लिए कदम भाजपा के लिए ही सिर दर्द न बन जाए, क्योंकि राज्य में भाजपा विरोधी सरकार होने के साथ-साथ वहां की वर्तमान सरकार में लालू के एक नहीं दो बेटे मंत्री हैं, जो अपने पिता का बदला लेने के लिए मोदी पर लगे इन आरोपों की जाँच करवा कर जेल न भेज दें। क्या बिहार में लड़ाई साँप और छछूंदर की है? यदि मोदी पर लगे आरोप किसी खिनौनी राजनीति का हिस्सा नहीं तो केन्द्र सरकार को चारा घोटाले में आरोपित लालू के कार्यवाही में तेजी लानी होगी, अन्यथा वह दिन भी दूर नहीं, जब लालू तो जेल से बाहर आराम से बाँसुरी बजाएंगे और सुशील मोदी जेल के अंदर। बहुत कठिन है डगर पनघट की ..... 
सुशील मोदी ने किया पलटवार  
sushil modiपिछले 20 दिनों में Delight Marketing, AK Infosystem, AB Exports जैसी Shell कम्पनियों के माध्यम से बिहार सरकार के दो मंत्रियों तेज प्रताप और तेजस्वी यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी की करोड़ों की सम्पत्ति सहित, कम्पनी के मालिक बन बैठे हैं, इसका दस्तावेजों के साथ खुलासा किया था। 
पर आज तक उन आरोपों का जवाब लालू यादव नहीं दे पाए है। तेजस्वी यादव 50 प्रतिशत डिस्काउंट पर अपनी सम्पत्ति देने की बात कर रहे है। परन्तु 50 प्रतिशत डिस्काउंट के बाद भी सम्पत्ति की कीमत अरबों में है।  मेरी औकात तो दो-चार लाख में खरीदने की है. अगर 99 प्रतिशत डिस्काउंट पर दे तो भी नहीं खरीद सकता हूँ। 
राजद ने प्रेस वार्ता कर जिन कम्पनियों का जिक्र किया है तो उनको बताना चाहिए था कि क्या मैं उन कम्पनियों का मालिक हूँ? या पार्टनर हूँ या डायरेक्टर हूँ? मैं पूरा समय राजनीति करता हूँ. मैं न कोई व्यवसाय करता हूँ, न कोई ठेकेदारी करता हूँ। 
जिन कम्पनियों के बारे में आरोप लगाया गया उनका जवाब तो उस कम्पनी के मालिक ही दे सकते हैं, मैं कैसे जवाब दे सकता हूँ। 
मेरे रिश्तेदारों पर दबाव बनाना प्रारम्भ कर दिया है ताकि मेरा मुँह बन्द किया जा सके। चारा घोटाले के दौरान ये सारे हथकंडे लालू यादव आजमा चुके हैं।  लालू यादव AB Exports के बारे में क्यों चुप्पी साध गये? इसके साथ ही लालू बताएँ कि क्या यह सही नहीं है की AB Exports में आज 98% शेयर तेजस्वी यादव का है। आखिर 2007-08 में 5 करोड़ का ब्याज रहित कर्ज क्यों डायमण्ड के व्यापारियों ने इस कम्पनी को दिया?
जिस कम्पनी में कोई कर्मचारी नहीं है, कोई टर्नओवर नहीं है, कोई व्यवसाय नहीं किया, आखिर उस कम्पनी ने 2007-08 में 800 वर्ग मीटर जमीन 1088 न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में क्यों 5 करोड़ के कर्ज से खरीदी? क्यों अशोक कुमार बन्थिया ने 115 करोड़ की सम्पत्ति सहित पूरी कम्पनी तेजस्वी यादव को सौंप दिया? D-1088 में बने 60 करोड़ के मकान का पैसा कहाँ से आया?

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)