चरिलाम सीट का 51 साल का लेखा जोखा
19 चरिलाम विधानसभा सीट पर अब तक हुए 10 मुकाबलों में सीपीएम आधा यानी 5 बार विजयी रही है. शेष 5 बार में 3 बार कांग्रेस और एक एक बार सीपीआई और त्रिपुरा उपजाति समिति (टीयूएस) के उम्मीदवार सफल रहे हैं. 1967-1972 तक यह सीट एसटी की लिए आरक्षित थी और 1977 में जनरल सीट हो गई. 1983 में दोबारा एसटी के लिए आरक्षित हो गई और 1988 में दोबारा जनरल सीट हो गई. 1993 से तीसरी बार यह सीट एसटी की लिए आरक्षित हुई जो अभी तक है. 1967 में सीपीआई के एडी बर्मा ने कांग्रेस के केसीडी बर्मा को महज 193 मतों से हराया था. बावजूद इसके 1972 में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदल दिया और वह भी नहीं जीत पाए. सीपीएम के निरंजन देब ने कांग्रेस के नए उम्मीदवार मनमोहन सिंह को 331 मतों से हरा दिया. 1977 में सीपीएम भी उम्मीदवार बदल दी और चुनाव हार गई. टीयूएस के हरिनाथ देबबर्मा ने सीपीएम के दुर्गा प्रसाद सिकदर को 1028 को चुनावी मैदान में मात दी. 1983 में कांग्रेस के परिमल चंद्र साहा ने पहली बार पार्टी के लिए खाता खोला, सीपीएम के ब्रजगोपाल भौमिक को 1226 मतों से हरा कर. 1988 में कांग्रेस लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. कांग्रेस के मतिलाल साहा ने सीपीएम के ब्रजगोपाल भौमिक को 908 मतों से मात दी. 1993 में यह सीट जीत कर कांग्रेस ने हैट्रिक की. कांग्रेस के अशोक देबबर्मा ने सीपीआई के अघोर देबबर्मा को 664 वोटों से हराया. 1998 में सीपीएम के नारायण रूपिणी ने आईएनडी के अनंत देबबर्मा को 1006 वोटों से हराया. 2003 में सीपीएम के नारायण रूपिणी ने ही आईएनपीटी के नरेंद्र देबबर्मा को 56 वोटों के मामूली अंतर से हराया. 2008 में सीपीएम के नारायण रूपिणी ने ही फिर एक बार आईएनपीटी के नरेंद्र देबबर्मा को ही 487 मतों से हराकर अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की. जबकि 2013 के पिछले विधानसभा चुनाव सीपीएम के रामेन्द्र नारायण देबबर्मा ने कांग्रेस के हिमानी देबबर्मा को 1341 मतों से हराया था.
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