त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय के लोगों की अच्छी खासी आबादी है। आदित्यनाथ गोरखपुर स्थित नाथ संप्रदाय के ही महंत हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक त्रिपुरा में बंगालियों की आबादी में 35 फीसदी नाथ संप्रदाय को मानते हैं। बीजेपी ने इन वोटरों को अपनी ओर लाने के लिए नाथ बहुल इलाकों में सीएम योगी आदित्यनाथ से चुनाव प्रचार करवाया था।बीजेपी महासचिव राम माधव ने पार्टी की जीत में इस नारे की अहमियत के बारे में बताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि जनता ने इस नारे को समर्थन दिया है. बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछली बार बीजेपी को यहां महज 1.5 प्रतिशत वोट मिले थे. उसके पांच वर्षों के भीतर ही सीधे सत्ता में काबिज होना एक बड़ी चुनावी सफलता है.
अवलोकन करें:--
मोदी लहर
2014 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को पहली बार त्रिपुरा में सर्वाधिक छह प्रतिशत वोट मिले. उसके बाद से बीजेपी के सियासी ग्राफ में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली. उसके बाद से पार्टी ने यहां लगातार अपने कैडर को बनाने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं. राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में बीजेपी ने अच्छी पकड़ बनाई. 60 में से करीब 25 सीटों पर प्रभावी भूमिका निभाने वाले आदिवासी बहुल इलाकों में बीजेपी की बढ़ती पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नरेंद्र मोदी ने सोनामुरा रैली के जरिये बीजेपी के चुनाव प्रचार अभियान का आगाज किया तो उसमें उपस्थित भारी भीड़ ने इसका अहसास कराया कि अबकी बार बीजेपी यहां मजबूत होकर उभरेगी. शुरुआती रुझान इस अनुमान पर अपनी मुहर लगाते दिख रहे हैं.
माणिक सरकार की छवि काम नहीं आई
इसके साथ ही पिछले दो दशकों से त्रिपुरा की सत्ता के निर्विवाद चेहरा रहे माकपा(सीपीएम) नेता मुख्यमंत्री माणिक सरकार इस बार अब तक की सबसे कड़ी सियासी लड़ाई लड़ रहे हैं. वैसे तो माकपा का शासन त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से हैं और माणिक सरकार 1997 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन इस बार उनको पहली बार बीजेपी के रूप में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा . कांग्रेस की सूबे की सत्ता से साफ होने और उसकी जगह पिछली बार तृणमूल कांग्रेस के उभार लेकिन बाद में आंतरिक टूट-फूट का सीधा लाभ बीजेपी को मिला. इसलिए इस बार त्रिपुरा में पहली बार सीधी लड़ाई माकपा के नेतृत्व में वाम मोर्चे और बीजेपी के बीच हुई है. त्रिपुरा में माकपा की सबसे बड़ी पूंजी माणिक सरकार की स्वच्छ छवि मानी जा रही है. बीजेपी इस बात को अच्छी तरह से जानती है. इसलिए पीएम नरेंद्र मोदी ने सबसे पहली चुनावी रैली मुस्लिम बहुल इलाके सोनामुरा में की थी. इसके जरिये बीजेपी ने माणिक सरकार को सीधी चुनौती दी. ऐसा इसलिए क्योंकि माणिक सरकार इसके पड़ोस में स्थित धनपुर सीट से चुनाव लड़ते हैं. सोनामुरा से बीजेपी प्रत्याशी आगे चल रहा है और धनपुर से माणिक सरकार आगे चल रहे हैं.
कांग्रेस
इन सबके बीच त्रिपुरा में कांग्रेस का प्रदर्शन कोई खास नहीं दिख रहा है. राहुल गांधी के प्रचार के बावजूद कांग्रेस बड़ी मुश्किल से केवल एक सीट पर बढ़त बनाती दिख रही है. एक दौर में सत्ताधारी माकपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होती थी लेकिन अब ऐसा लगता है कि उस स्पेस को बीजेपी ने कैप्चर कर लिया है.
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