आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार
मोदी सरकार ने दूध के किसानों को और ज्यादा फायदा देने के लिए मेगा प्लान बनाया है। इसके तहत सरकार ज्यादा से ज्यादा दूध की खपत बढ़ाएगी। सरकार अपने इस मेगा प्लान के तहत दूसरी स्वेत क्रांति करने की तैयारी में है। इसके तहत एक तरफ जहां दूध से जुड़े प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट पर 10 फीसदी इन्सेंटिव दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर रेलवे स्टेशन से लेकर सरकारी स्कूलों तक में दूध पहुंचाने का भी प्रस्ताव है। केंद्र सरकार के मंत्रियों के एक समूह ने दूध और दूध से जुड़े प्रोडक्ट को लेकर यह प्रस्ताव दिया है।
लगता था कि मोदी सरकार के आने से अनावश्यक ढोल नहीं पीटेगी, लेकिन मोदी सरकार भी पूरी तरह से पिछली सरकारों की भाँति काम कर रही है। सरकारी स्कूलों में पहली बार दूध नहीं भेजा जा रहा है, जब मै स्वयं नगर निगम के स्कूल में पढ़ता था, प्रतिदिन पहली से पांचवीं कक्षा के छात्र/छात्रों को स्कूल में प्रति छात्र एक पाव दूध वितरित होता था। इतना ही नहीं, रोज कटरों में पाव/आधा सेर दूध वितरित होता था। फिर दिल्ली में महानगर परिषद्(वर्तमान विधान सभा) में जब 1967 में प्रो विजय कुमार मल्होत्रा के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ (वर्तमान भाजपा) सत्ता में आई, तो गरीबों को रोज मॉडर्न ब्रेड 4 पीस प्रति बच्चा वितरित किये जाते थे। मास्टर रामप्रकाश गुप्ता, तत्कालीन महानगर पार्षद(वर्तमान विधायक) के निर्देश पर मैं स्वयं अपने क्षेत्र में इस काम को अंजाम देता था। लेकिन 1972 में सत्ता परिवर्तन होते ही ये योजना सियासत की भेंट चढ़ गयी। कहने का तात्पर्य है कि उस समय नेता और सरकार काम करते थे, जबरदस्ती में ढोल नहीं पीटते थे, आज बदलते परिवेश में, काम कम, शोर जरुरत से ज्यादा हो रहा है। जिस कारण काम कम, शोर ज्यादा कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
इससे पहले कृषि मंत्रालय ने रेल मंत्रालय को स्टेशनों पर दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया था। अमूल ब्रांड मिल्क के प्रतिनिधियों का कहना है कि मिल्क प्रोडक्ट की सेल के लिए रेलवे डेयरी कंपनियों या कोऑपरेटिव्स को स्टॉल प्रोवाइड करा सकता है। इस बाबत रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे इस बारे में जल्द ही फैसला लेगा। मंत्रालय इस बारे में अन्य संबंधित मंत्रालयों से विचार विमर्श करने जा रहा है, कि कैसे देश में दूध की खपत को बढ़ाया जाए। स्टेशनों पर दूध की उपलब्धता के बारे में मंत्रालय 2 से 4 दिनों में फैसला ले लेगा।
दिल्ली में अमूल से भी पुरानी दिल्ली दुग्ध योजना को प्रोत्साहन क्यों नहीं दिया जा रहा है, वह तो भारत सरकार का ही उपक्रम है, जबकि अमूल एक कोओपरेटिव है। अपने उपक्रम को छोड़ दूसरी तरफ सरकार क्यों भाग रही है। सरकार अपने उपक्रम को क्यों नहीं प्रोत्साहित कर रही? क्या कारण है कि गुजरात के उत्पात को इतना महत्व दिया जा रहा है?
किसान चाहते हैं 5 रुपए प्रति लीटर सब्सिडी
दूध का उत्पादने करने वाले किसानों को 5 रुपए प्रति लीटर सब्सिडी के साथ गाय के दूध की कीमत कम से कम 30 रुपए प्रति लीटर करने की मांग को लेकर कुछ दिनों से ही महराष्ट्र में हड़ताल चल रही है। बता दें कि भारत में पैदा होने वाले करीब 16.5 करोड़ टन में से करीब 70 फीसदी दूध की खपत सीधा दूध के लिक्विड फॉर्म में ही होती है। बाकी के 30 फीसदी की खपत दही, मक्खन, मिल्क पाउडर और चीन के रूप में होती है।
मोदी सरकार ने दूध के किसानों को और ज्यादा फायदा देने के लिए मेगा प्लान बनाया है। इसके तहत सरकार ज्यादा से ज्यादा दूध की खपत बढ़ाएगी। सरकार अपने इस मेगा प्लान के तहत दूसरी स्वेत क्रांति करने की तैयारी में है। इसके तहत एक तरफ जहां दूध से जुड़े प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट पर 10 फीसदी इन्सेंटिव दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर रेलवे स्टेशन से लेकर सरकारी स्कूलों तक में दूध पहुंचाने का भी प्रस्ताव है। केंद्र सरकार के मंत्रियों के एक समूह ने दूध और दूध से जुड़े प्रोडक्ट को लेकर यह प्रस्ताव दिया है।
लगता था कि मोदी सरकार के आने से अनावश्यक ढोल नहीं पीटेगी, लेकिन मोदी सरकार भी पूरी तरह से पिछली सरकारों की भाँति काम कर रही है। सरकारी स्कूलों में पहली बार दूध नहीं भेजा जा रहा है, जब मै स्वयं नगर निगम के स्कूल में पढ़ता था, प्रतिदिन पहली से पांचवीं कक्षा के छात्र/छात्रों को स्कूल में प्रति छात्र एक पाव दूध वितरित होता था। इतना ही नहीं, रोज कटरों में पाव/आधा सेर दूध वितरित होता था। फिर दिल्ली में महानगर परिषद्(वर्तमान विधान सभा) में जब 1967 में प्रो विजय कुमार मल्होत्रा के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ (वर्तमान भाजपा) सत्ता में आई, तो गरीबों को रोज मॉडर्न ब्रेड 4 पीस प्रति बच्चा वितरित किये जाते थे। मास्टर रामप्रकाश गुप्ता, तत्कालीन महानगर पार्षद(वर्तमान विधायक) के निर्देश पर मैं स्वयं अपने क्षेत्र में इस काम को अंजाम देता था। लेकिन 1972 में सत्ता परिवर्तन होते ही ये योजना सियासत की भेंट चढ़ गयी। कहने का तात्पर्य है कि उस समय नेता और सरकार काम करते थे, जबरदस्ती में ढोल नहीं पीटते थे, आज बदलते परिवेश में, काम कम, शोर जरुरत से ज्यादा हो रहा है। जिस कारण काम कम, शोर ज्यादा कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
कीमतें बढ़ाने के लिए किसान कर रहे हैं हड़ताल
कीमतें बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के कई हिस्सों में दुग्ध उत्पादक किसान हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने राज्य में दूध की सप्लाई रोक दी है। इसी के बाद मंत्री समूह की ओर से यह प्रस्ताव सामने आया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त-रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ पैनल में शामिल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पत्रकारों को बताया कि दूध का खपत बढ़ाने के लिए सरकार इसे मिड-डे-मील में भी शामिल करने की योजना बना रही है।
देश में सरप्लस हो गई है मिल्क पाउडर की मात्रा
सरकारी अनुमान के मुताबिक, देश में इस समय करीब 3 लाख टन मिल्क पाउडर का सरप्लस है। इस स्थिति ने डेयरी और दुध के अन्य थोक खरीदारों को दूध की खरीद में कटौती करने को मजबूर कर दिया है। इसके चलते पिछले साल महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में दूध की कीमतें 10-15 रुपए प्रति लीटर के लेवल पर जा पहुंचीं। मंत्री समूह ने मिल्क पाउडर को विदेशी मदद के रूप में बांग्लादेश समेत अन्य देशों में भी भेजने का फैसला किया है।
दूध की खपत बढ़ाने के लिए रेलवे की ली जाएगी मदद सरकारी अनुमान के मुताबिक, देश में इस समय करीब 3 लाख टन मिल्क पाउडर का सरप्लस है। इस स्थिति ने डेयरी और दुध के अन्य थोक खरीदारों को दूध की खरीद में कटौती करने को मजबूर कर दिया है। इसके चलते पिछले साल महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में दूध की कीमतें 10-15 रुपए प्रति लीटर के लेवल पर जा पहुंचीं। मंत्री समूह ने मिल्क पाउडर को विदेशी मदद के रूप में बांग्लादेश समेत अन्य देशों में भी भेजने का फैसला किया है।
इससे पहले कृषि मंत्रालय ने रेल मंत्रालय को स्टेशनों पर दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया था। अमूल ब्रांड मिल्क के प्रतिनिधियों का कहना है कि मिल्क प्रोडक्ट की सेल के लिए रेलवे डेयरी कंपनियों या कोऑपरेटिव्स को स्टॉल प्रोवाइड करा सकता है। इस बाबत रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे इस बारे में जल्द ही फैसला लेगा। मंत्रालय इस बारे में अन्य संबंधित मंत्रालयों से विचार विमर्श करने जा रहा है, कि कैसे देश में दूध की खपत को बढ़ाया जाए। स्टेशनों पर दूध की उपलब्धता के बारे में मंत्रालय 2 से 4 दिनों में फैसला ले लेगा।
किसान चाहते हैं 5 रुपए प्रति लीटर सब्सिडी
दूध का उत्पादने करने वाले किसानों को 5 रुपए प्रति लीटर सब्सिडी के साथ गाय के दूध की कीमत कम से कम 30 रुपए प्रति लीटर करने की मांग को लेकर कुछ दिनों से ही महराष्ट्र में हड़ताल चल रही है। बता दें कि भारत में पैदा होने वाले करीब 16.5 करोड़ टन में से करीब 70 फीसदी दूध की खपत सीधा दूध के लिक्विड फॉर्म में ही होती है। बाकी के 30 फीसदी की खपत दही, मक्खन, मिल्क पाउडर और चीन के रूप में होती है।
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