
राजनीति भी क्या अजब चीज़ है, कब गिरगिट की तरह रंग बदल ले, कहना असम्भव है। आदित्य नाथ योगी के मुख्यमन्त्री बनते ही मुलायम सिंह की बहु अपर्णा यादव का समाजवादी पार्टी की घोर विरोधी भाजपा की शरण में जाना, गौ प्यार से मुख्यमन्त्री को रिझाने का प्रयास करना, अपर्णा की राजनीतिज्ञ बुद्धि को जरूर प्रमाणित करता है, लेकिन यह अपने इस उद्देश्य में कितनी सफल हो पाएंगी, समय के गर्भ में छिपा है। इतना जरूर है कि आदित्य नाथ मुख्यमंत्री बाद में पहले एक योगी है और एक योगी को यजुर्वेद और ऋग्वेद के साथ-साथ अथर्ववेद और सामवेद का ज्ञान होता है, तो शायद योगी पर इन प्रलोभनों का लेशमात्र भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला। जो घोटाला उभर कर आया है, उस पर कार्यवाही तो अवश्य होगी और उसकी आग से अखिलेश तो क्या अपर्णा का भी बचना शायद ही सम्भव हो। और गौ की आड़ में किए घोटाले को योगी शायद ही हल्के में लें।
उत्तर प्रदेश सपा सरकार में सरकारी खजाने से पैसों के हेर फेर का मामला सामने आया है. आरटीआई कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने खुलासा किया है कि अखिलेश सरकार में गो सेवा आयोग ने सरकारी फंड की 86 फीसदी रकम सिर्फ अपर्णा यादव की संस्था को दी थी. अपर्णा यादव मुलायम सिंह की छोटी बहू हैं और पूर्व सीएम अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की पत्नी हैं. अपर्णा जीव आश्रय के नाम से एक गो सेवा संस्था चलाती हैं.
आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने एक RTI डाली थी जिसमें हुआ खुलासा चुन्काने वाला हैं. RTI में जो जानकारी मिली है उससे एक बड़ी हेर-फेर का राज़ अब खुलता हुआ नज़र आ रहा है. RTI के जवाब में सरकार की तरफ से दी गयी जानकारी में बताया गया है कि साल 2012 से 2017 तक अपर्णा की संस्था को गो सेवा आयोग की ओर से 8.35 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया जबकि इस दौरान आयोग ने कुल 9.66 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की थी. इस खुलासे से एक बात जग ज़ाहिर हो गयी है कि कुल आवंटन की 86 फीसदी रकम लखनऊ के अमौसी स्थिति अपर्णा यादव के NGO को दी गयी थी.
गो सेवा आयोग पशु और कृषि विभाग के तहत काम करता है जो कि गौ शालाओं और गायों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं को सरकारी मदद मुहैया कराता है. आयोग की ओर से आरटीआई के जवाब में कहा गया कि जीव आश्रय संस्था को साल 2012-13 में 49.89 लाख, साल 2013-14 में 1.25 करोड़ और साल 2014-15 में 1.41 करोड़ रुपए आवंटित किए गए.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी भाभी अपर्णा यादव का कथित गौ-सेवा फंड घोटाला सामने आया है, एक RTI से जानकारी मिली है कि अखिलेश सरकार ने उत्तर प्रदेश में गौ-सेवा आयोग का गठन किया था जिसमें सभी जिलों में गौ-शालाएं खुलवाकर और उन्हें फंड देकर गायों की रक्षा करनी दी, इस काम के लिए वर्ष 2012-2017 के बीच 9.66 करोड़ रुपये आवंटित किये गए लेकिन कुल फंड का करीब 86.4 फ़ीसदी अपर्णा यादव के NGO जीव आश्रय को दे दिया गया. मतलब 9.66 करोड़ रुपये में से 8.35 करोड़ रुपये सिर्फ अपर्णा यादव के NGO को दे दिए गए.
उत्तर प्रदेश चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी जानी दुश्मन बने हुए थे, मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव भी बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं लेकिन हार गयीं थी लेकिन जैसे ही योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उसके दूसरे ही दिन अपर्णा यादव अपने पति प्रतीक यादव के साथ उनसे मिलने के लिए पहुँच गयीं और उन्हें अपनी गौशाला में आने का नमंत्रण दे दिया, हैरानी इस बात की थी कि योगी ने उनके निमंत्रण को स्वीकार भी कर दिया और उनकी गौशाला जा पहुंचे.
अपर्णा यादव ने कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अपनी गौ-शाला में आमंत्रित किया था, अब लोग कह रहे हैं कि शायद घोटालों से बचने के लिए ही अपर्णा यादव ने जल्दबाजी में योगी को गौशाला में बुलाया था ताकि बाद में योगी सरकार उनपर कोई कार्यवाही ना कर सकें. अपर्णा यादव लखनऊ के अमौसी में जीव आश्रय नाम से एक NGO चलाती हैं.
अपर्णा यादव ने कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अपनी गौ-शाला में आमंत्रित किया था, अब लोग कह रहे हैं कि शायद घोटालों से बचने के लिए ही अपर्णा यादव ने जल्दबाजी में योगी को गौशाला में बुलाया था ताकि बाद में योगी सरकार उनपर कोई कार्यवाही ना कर सकें. अपर्णा यादव लखनऊ के अमौसी में जीव आश्रय नाम से एक NGO चलाती हैं.
अब चर्चा उठ रही है कि अपर्णा यादव ने घोटालों की जांच से बचने के लिए ही जल्दबाजी में योगी आदित्यनाथ को गौशाला में बुलाया था ताकि बाद में योगी सरकार उनपर कोई कार्यवाही ना कर सकें. अपर्णा यादव लखनऊ के अमौसी में जीव आश्रय नाम से एक NGO चलाती हैं.
अपर्णा यादव मुलायम सिंह के दूसरे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं और अखिलेश यादव की शौतेली भाभी हैं. वे 2017 विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट से मैदान में उतरीं थीं लेकिन उन्हें बीजेपी नेता रीता बहुगुणा जोशी से करारी हार का सामना करना पड़ा था.
अपर्णा यादव मुलायम सिंह के दूसरे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं और अखिलेश यादव की शौतेली भाभी हैं. वे 2017 विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट से मैदान में उतरीं थीं लेकिन उन्हें बीजेपी नेता रीता बहुगुणा जोशी से करारी हार का सामना करना पड़ा था.
एक्टिव NGO को पैसा मिला, क्या गलत हुआ: अपर्णा यादव
इस मामले पर अपर्णा यादव ने सफाई देते हुए कहा है कि अगर एक एक्टिव NGO के अच्छे काम की वजह से उसे 86 फ़ीसदी फंड दिया गया तो क्या गलत हो गया, मेरा मानना है कि उसे 100 फ़ीसदी फंड मिला चाहिए था, मतलब गौ-सेवा आयोग को पूरा का पूरा पैसा अपर्णा यादव के NGO को देकर पूरे राज्य को खाली तंबोरा पकड़ा देना चाहिए था.
RTI एक्टिविस्ट ने कहा, जनता के पैसों का मिसयूज किया गया
इस मामले में RTI फाइल करने वाली एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने कहा कि सपा सरकार के समय ही यह NGO खोला गया, पहले सरकारी जमीन को 3 साल के लिए लीज पर दिया गया लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर अखिलेश सरकार ने 5 साल कर दिया, अपर्णा यादव ऐसा जाहिर करती थीं कि ये अपने पैसों से NGO चला रही हैं लेकिन RTI से मिली जानकारी के अनुसार यह पैसा जनता का था जिसका मिसयूज किया गया, एक ही NGO को 86 फ़ीसदी पैसा दे दिया गया.
उत्तर प्रदेश चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी जानी दुश्मन बने हुए थे, मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव भी बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं लेकिन हार गयीं थी लेकिन जैसे ही योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उसके दूसरे ही दिन अपर्णा यादव अपने पति प्रतीक यादव के साथ उनसे मिलने के लिए पहुँच गयीं और उन्हें अपनी गौशाला में आने का नमंत्रण दे दिया, हैरानी इस बात की थी कि योगी ने उनके निमंत्रण को स्वीकार भी कर दिया और उनकी गौशाला जा पहुंचे.
हर कोई हैरान था कि आखिर अपर्णा यादव ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई, कुछ लोगों ने तो यह भी चर्चा छेड़ दी कि अपर्णा यादव बीजेपी ज्वाइन करने वाली हैं लेकिन यह बात गलत थी. आखिर अब पर्दा उठ रहा है कि अपर्णा यादव क्यों आनन फानन में योगी आदित्यनाथ से मिली थीं और उन्हें क्यों अपनी गौशाला में बुलाया था.
RTI से खुलासा हुआ है कि यह गौशाला सपा सरकार आने के बाद खोली गयी थी और इससे पहले राज्य में गौ-सेवा आयोग बनाकर उसके जरिये इस गौशाला को 8.35 करोड़ रुपये का फंड दिया गया था. इससे भी हैरानी की बात यह है कि कुल 9.66 करोड़ रुपये फंड में से 86 फ़ीसदी पैसा यानी 8.35 करोड़ रुपये सिर्फ अपर्णा यादव की गौशाला को दिए गए थे.
हर कोई हैरान था कि आखिर अपर्णा यादव ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई, कुछ लोगों ने तो यह भी चर्चा छेड़ दी कि अपर्णा यादव बीजेपी ज्वाइन करने वाली हैं लेकिन यह बात गलत थी. आखिर अब पर्दा उठ रहा है कि अपर्णा यादव क्यों आनन फानन में योगी आदित्यनाथ से मिली थीं और उन्हें क्यों अपनी गौशाला में बुलाया था.
RTI से खुलासा हुआ है कि यह गौशाला सपा सरकार आने के बाद खोली गयी थी और इससे पहले राज्य में गौ-सेवा आयोग बनाकर उसके जरिये इस गौशाला को 8.35 करोड़ रुपये का फंड दिया गया था. इससे भी हैरानी की बात यह है कि कुल 9.66 करोड़ रुपये फंड में से 86 फ़ीसदी पैसा यानी 8.35 करोड़ रुपये सिर्फ अपर्णा यादव की गौशाला को दिए गए थे.
अपर्णा यादव की संस्था को सपा सरकार का कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले बड़ी रकम आवंटित की गई. सबसे ज्यादा साल 2015-16 में संस्था को 2.58 करोड़ और साल 2016-17 में 2.55 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया. साल 2016-17 में कुल 3.35 करोड़ की राशि में से 2.55 करोड़ रुपए का अनुदान अपर्णा की संस्था को दिया गया जबकि एक चार संस्थाओं को कुल मिलाकर 63 लाख रुपए का अनुदान दिया गया.

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