एएसआई अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर कहा कि तहखाना पूरी तरह से मिट्टी से भरा हुआ था। इसमें विस्फोटक और अग्नेय शस्त्र जैसी कोई चीज नहीं मिली है। अधिकारी ने यह भी बताया कि कक्ष (1658-1707) मुगल काल के दौरान औरंगजेब या फिर ब्रिटिश सेना ने बनाया होगा।
यह कक्ष लाखौरी ईंटों से बनाया गया है और अंडाकार गुंबददार डिब्बे की आकृति में बनाया गया है। इसकी लंबाई 6 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 3 मीटर है। यह कक्ष पैडस्टल से कुछ दूरी पर स्थित है, जहां 15 अगस्त को झंडा लहराया जाता है।
यह तब एक आम प्रथा थी। क्योंकि मिट्टी एक इंसुलेटर के रूप में काम करती है। अधिकारी ने बताया कि कक्ष में कोई गोला बारूद नहीं मिला। वह केवल मिट्टी से भरा था। इससे पहले एएसआई को लाल किला परिसर में विस्फोटक और कारतूस भी मिल चुके हैं।
केन्द्र सरकार को गम्भीरता से इस विषय को लेकर, जाँच करनी चाहिए। क्योंकि इतिहास इसे हिन्दू सम्राट अनन्तपाल तोमर द्वितीय द्वारा बताता है। इसे किसी मुग़ल शासक ने नहीं बनवाया था। मुख्य द्धार से लेकर समस्त किले की बनावट किसी इस्लामिक निर्माण से कहीं मेल नहीं खाती। समस्त बनावट हिन्दू वास्तु पर आधारित है। लाल किले के निर्माण का रहस्योघाटन टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह द्वारा प्रकाशित बहुचर्चित Illustrated Weekly ने अपने मार्च 1971 के अंक में किया था।

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