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कर्नाटक का किला गंवाकर क्या ये बहाने बनाएगी कांग्रेस?


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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
जैसी सम्भावनाएं थीं, कर्नाटक चुनाव परिणाम वैसे ही आए हैं, और उसका कारण है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ने के बावजूद भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए येदियुरप्पा को मुख्यमन्त्री घोषित करते ही, दिल्ली विधान सभा चुनाव सामने आ गए थे। क्योकि किरण बेदी को दिल्ली का मुख्यमन्त्री बनाए जाने पर भाजपा की हार दीवारों पर लिखी जा चुकी थी और बेदी भी उतनी ही मतों से हारी, जितनी मतों से हार की उम्मीद की जा रही थी। जातीय समीकरण के आगे भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोपी को ही मुख्यमंत्री घोषित कर दिया।
जिस तरह लालू यादव के वर्षों लम्बित पड़े केसों को जीवित कर, जमानत पर बाहर आये लालू को पुनः जेल भेज दिया गया, सम्भव है कांग्रेस जेडीएस को अपना समर्थन कर येदियुरप्पा की फाइल को खोल लालू की तर्ज़ पर येदियुरप्पा को संकट में डाल सकती है। देखना यह है कि चूहा-बिल्ली की दौड़ में कौन जीतता है? जहाँ तक प्रधानमन्त्री मोदी की बात है, उनकी ईमानदारी पर उनके घोर विरोधियों को भी कोई शंका नहीं।
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2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब को छोड़कर जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं वहां कांग्रेस को हार मिली है. इन सभी हार के बाद कांग्रेस ने करीब-करीब एक जैसे बहाने बनाए हैं. ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि कांग्रेस इस हार के बाद भी कुछ इसी तरह बहाने बना सकती है.
एंटी इन्कमबेंसी (सत्ता विरोधी लहर): पूरे चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के नेता कहते रहे कि कर्नाटक में कोई एंटी इन्कमबेंसी नहीं है. जबकि रिजल्ट देखकर साबित होता है कि उनके यह दावे बिल्कुल गलत थे. कर्नाटक की जनता सिद्धारमैया की सरकार को पसंद नहीं कर रही थी, लोगों के बीच उन्हें लेकर नाराजगी थी. कांग्रेस इस हार का ठिकरा सिद्धारमैया के सिर पर फोड़ सकती है. पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो कांग्रेस को कहीं भी हार मिलने पर राहुल गांधी को इससे बचाया जाता रहा है.
एंटी इन्कमबेंसी (सत्ता विरोधी लहर): पूरे चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के नेता कहते रहे कि कर्नाटक में कोई एंटी इन्कमबेंसी नहीं है. जबकि रिजल्ट देखकर साबित होता है कि उनके यह दावे बिल्कुल गलत थे. कर्नाटक की जनता सिद्धारमैया की सरकार को पसंद नहीं कर रही थी, लोगों के बीच उन्हें लेकर नाराजगी थी. कांग्रेस इस हार का ठिकरा सिद्धारमैया के सिर पर फोड़ सकती है. पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो कांग्रेस को कहीं भी हार मिलने पर राहुल गांधी को इससे बचाया जाता रहा है.
अवलोकन करें:--

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वोटिंग को महज 20 दिन बचे हैं। इससे पहले अलग-अलग न्यूज चैनल और एजेंसियां ओपिनियन पोल जारी ...
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कर्नाटक चुनाव में सिर्फ 8 दिन शेष हैं। राज्य की तीन बड़ी पार्टी कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस की निगाहें राज्य के लिंगाय....
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ईवीएम में गड़बड़ी: हर चुनाव की तरह कांग्रेस इस हार के बाद भी आरोप लगा सकती है कि बीजेपी ने ईवीएम में गड़बड़ी की थी. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद मतगणना के दौरान ही ईवीएम में छेड़छाड़ की बात कह चुके हैं.
नहीं चल पाया लिंगायत कार्ड: कांग्रेस नेतृत्व कह सकता है कि लिंगायतों को अलग धर्म की मान्यता देने का फैसला गलत साबित हुआ है.
कन्नड़ अस्मिता का कार्ड फ्लॉप: गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजराती अस्मिता का कार्ड खेला था, जिसका उन्हें काफी फायदा हुआ था. इसी तर्ज पर सीएम सिद्धारमैया ने कर्नाटक में कन्नड़ अस्मिता का मुद्दा छेड़ा था. इसी के तहत कर्नाटक झंडा, कन्नड़ भाषा के प्रचार आदि मुद्दे को जोरशोर से उठाया था, लेकिन ये दावं बिल्कुल उलट साबित हुआ है.
जब से कर्नाटक विधानसभा (1973 तक मैसूर नाम था) का गठन हुआ तब से राज्य में सिर्फ दो मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए हैं. सिद्धारमैया ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं. इससे पहले डी देवराज उर्स ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। अब अगर सिद्धारमैया जीतते, तो उनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज होते। इससे पहले एस एम कृष्णा भी पांच साल का रिकॉर्ड बना सकते थे, लेकिन उन्होंने पांच महीने पहले ही विधानसभा भंग कर चुनाव करा दिए थे.
Karnataka Election Results 20181. पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वह कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री होंगे. जो लगातार दूसरी बार सीएम बनते। ऐसा कर्नाटक की राजनीति में कोई भी मुख्यमंत्री नहीं कर पाया था।
2. 33 साल में वह दूसरे मुख्यमंत्री होंगे, जो सत्ता में वापसी करेगा. इससे पहले जनता दल के रामकृष्ण हेगड़े और देवराज उर्स ही ऐसा कर पाए थे.

3. ऐसे में कर्नाटक की राजनीति में सिद्धारमैया पहले मुख्यमंत्री होंगे, जो लगातार 10 साल पूरे करेंगे. कर्नाटक की राजनीति में सिर्फ 4 बार ऐसे मौके आए हैं, जब सिर्फ एक मुख्यमंत्री ने करीब 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है. इससे पहले 10 बार कर्नाटक की राजनीति पांच साल का कार्यकाल 2 या 3 मुख्यमंत्रियों ने मिलकर पूरे किए हैं.

कर्नाटक चुनाव के नतीजों की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीटों पर 70 फीसदी वोटिंग हुई थी। कर्नाटक उन चुंनिंदा राज्यों में से एक है जहां कांग्रेस की सरकार है। अतीत में भी ये राज्य कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी बूटी का काम कर चुका है। 1975 से 77 में लगी इमरजेंसी की हार के बाद इसी राज्य ने इंदिरा गांधी की राजनीति में वापसी कराई थी। वहीं, इसी राज्य से सोनिया गांधी ने भी राजनीति की शुरुआत की थी।

 इन महारथ‍ियों के बल पर छीनी सत्‍ता

Karnataka Assembly Election Results भाजपा संगठन की योजना के अनुरूप चुनाव वाले प्रदेशों में करीब एक साल पहले ही व‍िस्‍तारक कार्यकर्ता न‍ियुक्‍त कर द‍िए जाते हैं। ये व‍िस्‍तारक पूर्णकाल‍िक होते हैं। इन व‍िस्‍तारकों की चयन प्रक‍िया भी आसान नहीं होती है। चयन प्रक‍ियाओं से गुजरने के बाद चयन‍ित व‍िस्‍तारकों को एक सप्‍ताह के प्रश‍िक्षण के ल‍िए भेजा जाता है, ज‍िसमें उन्‍हें काम की जानकारी दी जाती है और उसके बाद इन्‍हें हर व‍िधानसभा में तैनात कर द‍िया जाता है। 
सफल हुई पन्‍ना प्रमुख योजना 
उत्‍तर प्रदेश के व‍िधानसभा चुनावों में भाजपा संगठन ने पन्‍ना प्रमुख योजना और बूथ प्रमुख योजना को पायलट प्रोजेक्‍ट की तरह शुरू क‍िया था। इस प्रोजेक्‍ट का उद्देश्‍य हर घर से वोट बाहर न‍िकालना था। इस प्रोजेक्‍ट के तहत हर गली में एक पन्‍ना प्रमुख न‍ियुक्‍त क‍िया गया था। पन्‍ना प्रमुख को केवल 50 वोट डलवाने का ज‍िम्‍मा द‍िया गया। पन्‍ना प्रमुख चुनाव की घोषणा के साथ ही सक्र‍िया हो जाते हैं और 50 लोगों से रोजाना संपर्क करने लगते हैं।
इस प्रोजेक्‍ट की नींव करीब एक साल पहले ही कर्नाटक में रख दी गई थी। कर्नाटक भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री अरुण कुमार और प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव की टीम ने इस काम को अंजाम द‍िया। अरुण कुमार और मुरलीधर राव की की कार्यशैली और नरेंद्र मोदी-अम‍ित शाह के द‍िशा न‍िर्देशों की बदौतल भाजपा ने कर्नाटक फतह कर ल‍िया है।
अगला नंबर राजस्‍थान का 
कर्नाटक चुनाव में भाजपा की जीत के बाद कांग्रेस पार्टी केवल कुछ ही राज्‍यों में स‍िमट कर रह गई है। इस समय पंजाब, म‍िजोरम और मेघालय में कांग्रेस पार्टी की सरकार है। अब भाजपा का पूरा फोकस राजस्‍थान पर है। भाजपा हर हाल ही में राजस्‍थान में सत्‍ता की वापसी करना चाहती है। संगठन के सूत्रों के मुताब‍िक, भाजपा ने राजस्‍थान में पन्‍ना प्रमुख और व‍िस्‍तारकों के चयन की प्रक्र‍िया शुरू कर दी है।

इस नारे से इंदिरा गांधी ने जीता था कर्नाटक,सोनिया ने ऐसे दी थी सुषमा को पटखनी
Karnataka Elections Counting 2018इमेरजेंसी बाद  साल 1977 के आम चुनाव में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इंदिरा कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाली रायबरेली सीट से हार गई थी। इसके बाद आया 1978 का कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट का लोकसभा उपचुनाव। इंदिरा गांधी ने पहली बार दक्षिण भारत की इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया।
इस उपचुनाव में एक नारा काफी फेमस रहा- 'एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमगलूर-चिकमगलूर। इस चुनाव में इंदिरा के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल खड़े थे। इंदिरा ने ये चुनाव 70 हजार वोटों से जीता था और राष्ट्रीय राजनीति में वापसी की थी।
बेल्लारी में सोनिया बनाम सुषमा 
साल 1998 में कांग्रेस बुरी तरह बिखरने लगी थी। इसके बाद इसी साल सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभाली थी। 1999 में अपना पहला चुनाव दो सीटों से लड़ा था। हालांकि, उन्हें एक सुरक्षित सीट की तलाश थी। नोमिनेशन की लास्ट डेट से पहले सोनिया के बेल्लारी से लड़ने की घोषणा की।
बीजेपी ने सोनिया के खिलाफ वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को खड़ा किया। इस चुनाव में बीजेपी ने  भारतीय बेटी बनाम विदेशी बहू का नारा गढ़ा था। लेकिन, ये नारा नहीं चला और सोनिया गांधी अपना पहला चुनाव जीतने में सफल रही। 
राजीव गांधी को मिली हार
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस को 400 सीटें मिली। इस चुनाव में इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी पीएम बने। राजीव गांधी के पीएम बनने के लगभग ढाई महीने बाद कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हुए। सभी को उम्मीद थी कि कर्नाटक भी कांग्रेस की झोली में जाएगा।
इस चुनाव में लेकिन विधानसभा में क्षेत्रिय नेता  रामकृष्ण हेगड़े ने चुनावी रैली में एक बात कही। हेगड़े ने कहा- लोकसभा में वोट मिला तो राजीव प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन विधानसभा में वोट देने से वह मुख्यमंत्री तो नहीं बन जाएंगे। आखिर में कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस की हार हुई।


Omar abdullahकांग्रेस की हार पर उमर अब्‍दुल्‍ला ने क‍िया अनोखा ट्वीट

भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक में कांग्रेस के हाथ से सत्‍ता छीन ली। कांग्रेस की इस हार पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट क‍िया ज‍िसके बाद वो सुर्ख‍ियों में आ गए। दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस की हार पर उमर अब्‍दुल्‍ला ने जो ट्वीट क‍िया था, वो जूलियस सीजर का एक फ्रेज था।
शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बढत म‍िली लेक‍िन धीरे धीरे भाजपा ने उसे पटखनी दे दी। कांग्रेस केनेताओं के चेहरे से खुशी धीरे धीरे जाती रही और कांग्रेस का कर्नाटक में वापसी का सपना टूट गया।
Et tu .
इस बीच जम्‍मू कश्‍मीर के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला ने ट्वीट क‍िया 'Et tu #Karnataka'। हालांक‍ि लोगों को इसे समझने में देर लगी ये जूलियस सीजर का फ्रेज है ज‍िसका मतलब था कर्नाटक तुम भी। मतलब साफ है क‍ि वो कांग्रेस की हार से काफी दुखी हैं। बता दें क‍ि कर्नाटक से कांग्रेस को जीत की पूरी उम्‍मीद थी। 

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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