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मनोज वाजपेयी जैसे भांड की फिल्म हिंदुओं/ब्राह्मणों पर सुनियोजित हमला है; फिल्म का प्रोडूसर/डायरेक्टर और हीरो सभी ब्राह्मण; मतलब ब्राह्मणों के दुश्मन खुद ब्राह्मण हो गए; सुप्रीम कोर्ट गिरफ़्तारी पर रोक न लगाएं

सुभाष चन्द्र

आज "घूसखोर पंडत" जैसी फिल्मों के कसूरवार हिन्दू ही है। फिल्मों में किस तरह हिन्दू मन्दिरों और साधु-संतों का मजाक फिल्म सन्यासी, हीरा आदि कई फिल्मों में उड़ाया जा चुका है। फिल्म सन्यासी में गीत "चल सन्यासी मन्दिर में ..." और फिल्म हीरा का "मै तुझसे मिलने आयी मन्दिर जाने के बहाने..." क्या साबित कर रहे हैं, सोंचा कभी? अगर शुरू में ही ऐसी फिल्मों का विरोध किया जाता आज "घूसखोर पंडत" जैसी फ़िल्में बनाने की कोई निर्माता-निर्देशक सोंचने की हिम्मत नहीं करता। किसी हिन्दू संगठन ने इन फिल्मों का विरोध करने की बजाए इस गीतों पर झूमते नज़र आए।       

Bollywood किसी हाल में हिंदू विरोधी एजेंडा नहीं छोड़ सकता रह रह कर इस भांड इंडस्ट्री को खुजली होती है कि हिंदुओं का अपमान करने के लिए और अबकी बार फिर से हिंदुओं पर ब्राह्मणों को टारगेट करके हमला किया है बेशर्म इतने हैं कि फिर भी कह रहा है मनोज बाजपेयी कि हम लोगों की भावनाएं समझते हैं जबकि सच्चाई यह है कि फिल्म का नाम रखते हुए ही उन्हें पता था जबरदस्त विरोध होगा लेकिन सोचा होगा कोर्ट से बच निकलेंगे ऐसा कहते है सेंसर बोर्ड से अनुमति लिए बिना ही फिल्म को उतार दिया मैदान में जिस अब विरोध के बाद वापस ले लिया गया है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
फिल्म का प्रोडूसर है नीरज पांडेय, मनोज बाजपेयी से साथ एक वह भी ब्राह्मण है और डायरेक्टर रितेश शाह है जो कश्मीरी बताया गया है, वह भी भुला भटका कश्मीरी पंडित ही होगा क्योंकि गूगल कहता है they can neither deny nor confirme that he is a brahmin. यानी पूरी टीम ब्राह्मणों की जो दुश्मन हो गए ब्राह्मण समाज के

आये दिन ख़बरें आती है मदरसे में मौलाना ने बच्चियों का रेप कर दिया कभी फिल्म बना कर दिखाओ और टाइटल दो “बलात्कारी मौलाना” या “72 हूरों के प्यासे” और लव जेहादी मुस्लिम”, फिर तमाशा देखो या बना कर दिखाओ “बलात्कारी पादरी” एक दिन में भूत उतर जाएगा उनके खिलाफ फिल्म बनाने का याद तो होगी Bollywood को कमल हसन की “विशवरूपम” क्या तबाही मचाई थी मुसलमानों ने और कमल हसन को 75 से ज्यादा कट लगाने पड़े थे

जिस योगी और उसके गुरु मोदी की पीछे पड़े थे लोग हटाने के लिए, वो ही योगी तुरंत मैदान में आया ब्राह्मणों के लिए और बाजपेयी की फिल्म के लोगो के खिलाफ FIR करने के आदेश दे दिए और सुना है लखनऊ से पुलिस टीम मुंबई रवाना हो गई है

लेकिन किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट को फिल्म के प्रोडूसर/डायरेक्टर और मनोज बाजपेयी की गिरफ़्तारी पर रोक नहीं लगानी चाहिए क्योंकि ऐसी रोक उनके खिलाफ मुकदमा कुंद कर देगी जैसे पहले भी होता आया है

-20 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता Leena Manimekalai की गिरफ़्तारी पर रोक लगा कर उसे बचा लिया जबकि उस पर कई राज्यों में डाक्यूमेंट्री फिल्म “काली” के लिए माँ काली का अपमान करने वाले निकृष्ट पोस्टर के लिए केस दर्ज थे आज किसी राज्य में उन मुकदमों का कुछ पता नहीं है

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण 27 जनवरी, 2021 को “तांडव” फिल्म के डायरेक्टर अली अब्बास, प्रोडूसर हिमांशु मेहरा  और लेखक गौरव सोलंकी की गिरफ़्तारी पर रोक लगाने से मना कर दिया लेकिन उसे मार्ग दिखा दिया कि हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत ले सकते हो बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें और अमेज़न प्राइम की हेड अपर्णा पुरोहित को 3 हफ्ते की transit anticipatory bail दी थी 

5 मार्च, 2021को सुप्रीम कोर्ट ने अपर्णा पुरोहित की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी जिसे 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई

इस सबके खिलाफ “तांडव” केस का क्या हुआ किसी को नहीं पता ऐसे और भी मामले मिल सकते हैं और वैसे भी हिंदुओं को नीचा दिखाने वाली फिल्मों पर कोर्ट उदार रहते हैं कभी कभी तो फिल्म की रिलीज़ रोकने से मना कर देते हैं और तारीख इतनी लंबी लगा देते हैं कि फिल्म रिलीज़ हो जाती है लेकिन सुनवाई नहीं होती

कहने का तात्पर्य यह है कि एक बार गिरफ़्तारी पर रोक लगने के बाद केस ठंडे बस्ते में चले जाते है और इसलिए हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट अब मनमानी “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” पर लगाम लगानी चाहिए

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