दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात इलाके में दलितों पर अत्याचार का खौफनाक मामला सामने आया है। जबकि हरियाणा में भाजपा की सरकार है। यहां नूंह जिले के मोहलाका गांव में रहने वाले सात दलित परिवारों ने थाने में शिकायत देकर खुद पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों की कहानी बयान की है। गांव में मुसलमानों की आबादी 3000 से अधिक है, उनके बीच 7 दलित परिवार भी यहां रहते हैं। गांव के मुसलमान उन पर अपना धर्म बदलकर मुसलमान बनने का दबाव डाल रहे हैं। अत्याचार से तंग आकर एक परिवार गांव छोड़कर पलायन भी कर चुका है। हरियाणा के मेवात इलाके में मुसलमानों की आबादी अधिक है, लिहाजा आए दिन यहां हिंदुओं पर अत्याचार और हिंदू लड़कियों के अपहरण और बलात्कार के मामले सामने आते रहते हैं। उनका शिकार बनने वालों में ज्यादातर दलित हिंदू होते हैं।
दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात इलाके में दलितों पर अत्याचार का खौफनाक मामला सामने आया है। यहां नूंह जिले के मोहलाका गांव में रहने वाले सात दलित परिवारों ने थाने में शिकायत देकर खुद पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों की कहानी बयान की है। गांव में मुसलमानों की आबादी 3000 से अधिक है, उनके बीच 7 दलित परिवार भी यहां रहते हैं। गांव के मुसलमान उन पर अपना धर्म बदलकर मुसलमान बनने का दबाव डाल रहे हैं। अत्याचार से तंग आकर एक परिवार गांव छोड़कर पलायन भी कर चुका है। हरियाणा के मेवात इलाके में मुसलमानों की आबादी अधिक है, लिहाजा आए दिन यहां हिंदुओं पर अत्याचार और हिंदू लड़कियों के अपहरण और बलात्कार के मामले सामने आते रहते हैं। उनका शिकार बनने वालों में ज्यादातर दलित हिंदू होते हैं।
दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात इलाके में दलितों पर अत्याचार का खौफनाक मामला सामने आया है। यहां नूंह जिले के मोहलाका गांव में रहने वाले सात दलित परिवारों ने थाने में शिकायत देकर खुद पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों की कहानी बयान की है। गांव में मुसलमानों की आबादी 3000 से अधिक है, उनके बीच 7 दलित परिवार भी यहां रहते हैं। गांव के मुसलमान उन पर अपना धर्म बदलकर मुसलमान बनने का दबाव डाल रहे हैं। अत्याचार से तंग आकर एक परिवार गांव छोड़कर पलायन भी कर चुका है। हरियाणा के मेवात इलाके में मुसलमानों की आबादी अधिक है, लिहाजा आए दिन यहां हिंदुओं पर अत्याचार और हिंदू लड़कियों के अपहरण और बलात्कार के मामले सामने आते रहते हैं। उनका शिकार बनने वालों में ज्यादातर दलित हिंदू होते हैं।
क्या कर रही है हरियाणा पुलिस?
पुलिस ने शिकायतों की पुष्टि की है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने महिला समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मुख्य आरोपी इस्लाम एक भगोड़ा घोषित अपराधी है और उसके पास अवैध हथियार भी हैं। पुलिस यहां से पलायन कर चुके लोगों के बारे में भी पड़ताल कर रही है। कुछ समय पहले ही हुकुमचंद नाम के एक शख्स ने गांव छोड़ दिया। अब वहां पर उसके 2 बेटे ही रहते हैं। परिवार के बाकी सदस्य गांव छोड़कर जा चुके हैं। यहां रहने वाले 7 दलित परिवारों के लिए न सिर्फ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, बल्कि आए दिन मारपीट भी होती है। दलित परिवारों की महिलाओं के साथ छेड़खानी भी की जाती है। शिकायतकर्ता ने भी अपने साथ हुई मारपीट की अर्जी पुलिस में दी है।
हिंदुओं का जीना हुआ मुहाल
मेवात के इस इलाके में बीते कुछ सालों में मुस्लिम आबादी में भारी इजाफा हुआ है। इसके कारण यहां हिंदुओं का जीना मुश्किल है। पिछले साल सितंबर में एक दलित परिवार की बेटी का अपहरण हुआ था। उस केस में लव जिहाद की बात सामने आई थी। उस घटना के बाद हरियाणा अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने दौरा किया था और पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। हरियाणा के नूंह जिले में 80 फीसदी आबादी मुसलमानों की है, जबकि दलितों की संख्या 1 फीसदी से भी कम है। गरीब होने के कारण दलितों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
वो हिंदू हैं इसलिए मीडिया को असहिष्णुता नहीं दिखी
निम्न घटना जुलाई 2016 की है। वन्दे मातरम हो राष्ट्रीय गीत पर अल्पसंख्यकों को आपत्ति होने पर कितना शोर मचाते हैं, सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच जाते हैं, लेकिन इस घटना पर लगभग सभी ने ऐसे चुप्पी साध ली, जैसे मीडिया को कोई चुनाव लड़ना हो।
कल्पना कीजिए क्या होगा अगर किसी स्कूल में गैर-हिंदू छात्रों को गायत्री मंत्र या सरस्वती वंदना करने को कहा जाए। ज़ाहिर है मीडिया से लेकर देश के बुद्धिजीवी तक आसमान सिर पर उठा लेंगे। जहां पर ऐसी घटना हुई अगर वहां पर बीजेपी की सरकार हुई तो इसके लिए सीधे प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा। लेकिन क्या होगा अगर किसी स्कूल में पढ़ने वाले हिंदू बच्चों से जबरन नमाज पढ़वाई जाए? अगर ऐसा हुआ तो कुछ नहीं होगा। सरकार और प्रशासन चाहे जो करे, लेकिन दिल्ली का मीडिया माफिया कान में तेल डाल लेगा।
हरियाणा के स्कूल में हिंदू बच्चों से पढ़वाई नमाज
हरियाणा के दिल्ली से सटे मेवात जिले के तावडू की यह घटना है। यहां ग्रीन डेल्ज़ पब्लिक स्कूल में एक मुस्लिम टीचर ने ईद मिलन समारोह के दौरान बच्चों को जबरन नमाज़ पढ़वाया। इतना ही नहीं, उन्हें कुरान पढ़ने को भी मजबूर किया गया। बच्चों ने घर जाकर जब यह बात अभिभावकों को बताई तब मामले ने तूल पकड़ा। हरियाणा पुलिस ने समझदारी दिखाते हुए वक्त रहते हालात को संभाल लिया। पुलिस ने थाने में ही पंचायत करवाई। इस पंचायत में स्कूल की मालिक हेमा शर्मा ने माना कि हिंदू बच्चों से नमाज के लिए जोर-जबरदस्ती की गई है। उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने एक एनजीओ के जरिए ईद मिलन कार्यक्रम किया था। जिसमें दिल्ली से आए एक टीचर ने बच्चों के साथ यह जोर-जबरदस्ती की। वो इस बहाने धर्म का प्रचार करने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल पंचायत ने स्कूल पर 5.51 लाख रुपये जुर्माना और 2 साल तक फीस नहीं बढ़ाने की सज़ा दी है।
मीडिया से गायब हो गई यह ख़बर
धार्मिक आजादी और असहिष्णुता का रोना रोने वाले राष्ट्रीय मीडिया से यह खबर पूरी तरह गायब हो गई। जबकि यह खबर सभी अखबारों और चैनलों के पास भी थी। 6 जुलाई को हुई इस घटना को कुछ लोकल अखबारों को छोड़ दें तो कहीं भी जगह नहीं मिली। वैसे यह अच्छी बात है कि ऐसी भड़काऊ खबरें मीडिया में न ही छापी जाएं। लेकिन सवाल यही है कि क्या मीडिया दोनों धर्मों के लिए एक ही पैमाना अपनाता? जाहिर है ऐसा नहीं है। अगर मामला हिंदू छात्रों से जुड़ा होता तो अब तक मीडिया दंगे भड़काने की कोशिश में जुट चुका होता।
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