बीएस ने एक सूत्र के हवाले से खबर दी है कि 'ये एक पायलट के तौर पर खरीद है। इसके असर से रिजर्व में थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई है। ये कोई महत्वपूर्ण खरीदी नहीं है जब तक इसमें हम कोई ट्रेंड न देखें। सूत्र के मुताबिक 'सरकार ने ये फैसला बजट से पहले ही ले लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका एलान नहीं किया गया।'
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक जिसमें रूस और टर्की भी शामिल है डॉलर के खिलाफ हेज करने के लिए सोना खरीदते हैं। टर्की के केंद्रीय बैंक ने तो नीति बनाकर डॉलर की विदेशी मुद्रा भंडार में ताकत घटाई। टर्की के कमर्शियल बैंकों के पास बड़ी मात्रा में सोना है।
पूरे विश्व में अमेरिका के केंद्रीय बैंक के पास सबसे ज्यादा 8133.5 टन सोना है। इसके बाद जर्मनी के पास 3,372 टन सोना है। तीसरे नंबर पर IMF के पास 2814 टन सोना है। भारत इस लिस्ट में 558.1 टन सोने के साथ 11वे नंबर पर है। रूस पिछले 3 साल से हर साल 200 टन सोना खरीद रहा है।
वो ये कदम डॉलर पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए कर रहा है। बीएस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकार गोल्ड मोनेटाइजिंग स्कीम के लिए ये सोना इकट्ठा कर रही है। चीन भी सोना खरीद रहा है।
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