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| रिज़र्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल |
सरकार के किसी भी काम का विरोध करना गलत नहीं, करना भी चाहिए। लोकतन्त्र भी यही कहता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस यानि यूपीए सरकार भी नोट बदलने के पक्ष में थी, लेकिन किस दबाव में नहीं कर पायी, यह उनकी समस्या है।
परन्तु कांग्रेस महासचिव मोहन प्रकाश ने नयी मुद्रा पर वर्तमान आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का जो मुद्दा उठाया है उसमे वजन दिखता है क्योंकि प्रकाश के अनुसार सरकार का यह कहना कि नयी मुद्रा की छपाई का काम छह महीने से चल रहा था तो छह माह पूर्व गवर्नर सुब्बा राव थे, पटेल नहीं। इस मुद्दे पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि "गवर्नर सुब्बाराव के कार्यकाल में उर्जित के हस्ताक्षर कैसे हुए?"
विमुद्रीकरण के बाद 11 नवंबर से लोगों के हाथ में 2000 का नोट आ गया। इसके साथ ही लोगों ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी। पड़ताल में लोगों ने उर्जित पटेल के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि अगर नोटों को छापने की तैयारी छह महीने पहले से चल रही थी तो तीन महीने पहले आरबीआई के गवर्नर बने उर्जित पटेल के साइन कैसे आ गए। अब कांग्रेस ने भी सवाल उठाया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के मध्य प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर सवाल उठाया कि नए नोट छापने की प्रक्रिया छह महीने पहले ही शुरू कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि अगर यह सही है तो नए नोट पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे हैं, जबकि उन्होंने यह जिम्मेदारी इसी साल सितंबर में संभाली है।
मध्य प्रदेश के नेपानगर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने से पहले इंदौर पहुंचे मोहन प्रकाश ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, '500 और 1,000 रुपये की नोटबंदी के मद्देनजर नए नोट लाने की प्रक्रिया छह माह पहले से चलाने का दावा किया जा रहा है, मगर इन नोटों पर आरबीआई के गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल के दस्तखत कैसे हैं, जबकि पटेल ने नौवें महीने (सितंबर) में यह जिम्मेदारी संभाली है।'
मोहन प्रकाश ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश यात्राएं करने वाले उद्योगपतियों पर भी सवाल उठाया और कहा कि कालेधन के जो दोषी हैं, वे तो प्रधानमंत्री के साथ विदेशों में घूमते हैं और देश का मेहनतकश, गरीब आदमी कई दिनों से समस्याएं झेल रहा है। उनके पास खाना खाने तक के पैसे नहीं हैं।
नदियों और कब्रिस्तान में नोट फैंकने वालों से निवेदन
गरीब जनता के लिये मोदीजी ने जो जन धन योजना के अन्तर्गत बेंक खाते खुलवाए थे तो अब उसका सदुपयोग जनता की भलाई के लिये किया जा सकता हॆ, काले धन को नष्ट करने वालो से प्रार्थना है कि वे अपना बेनामी पेसा नष्ट न करके गरीबो के खातों में डाल दे और सरकार भी ऐसा करने वालों के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करें। ऐसे गरीबो के खातों का विवरण हर शहर में बेंको द्वारा अखबारों में प्रकाशित किया जाये ऐसा करने से उन लोगों के मुँह भी बँद हो जायेंगे जो कहते थे मोदीजी काला धन निकाल कर सबके खातों में डालने वाले थे पन्द्रह लाख हर नागरिक के खाते में डाल कर क्या पूरे देश को अकर्मण्य.बनाना हॆ पर कूछ ज़रूरतमंदों का भला हो जाये इससे बढ़ कर योजना की कामयाबी क्या होगी? या रक्षा कोष में जमा करवा दें। सुझाव है, मानना या न मानना यह सरकार और नोट बर्बाद करने वालों से बस एक निवेदन है। जैसाकि कल समाचार पढ़ रहा था कि "सूरत के बिल्डर लालजीभाई पटेल ने 6,000 करोड़ रुपए सरेंडर किए दूसरी खबर यह आई है राजस्थान के गांव जालौर जिले के रानीवाड़ा तहसील के जाखड़ी गांव में एक राजपूत शेर ने 80 करोड रुपए को गांव में बांट दिया जिसके कारण हर एक गांव वाले के घर में दो लाख रुपए आराम से पहुंच गए इसी प्रकार तमिलनाडु के एक मंत्री ने अपने पास जमा पड़े 300 करोड रुपए को अपने पहचान वाले छोटे-मोटे दुकानदार साफ-सफाई वाले और परिचित लोगों को दो - दो, ढाई - ढाई लाख रुपए देकर बहुत बड़ा आशीर्वाद प्राप्त किया, चौथी न्यूज़ यह है कि इंदौर के गुजराती बिजनेसमैन शंकरलाल विद्वान मैं अपने पास काम कर रहे 600 मजदूरों को एक एक लाख रुपए बांटकर काला धन को रास्ते लगाया, हाशमी न्यूज़ यह है महाराष्ट्र के पुणे के एक डॉक्टर ने अपनी कमाई हुई 20 बरस की कमाई को वापस अपने पुराने कस्टमर यानी जान पहचान वाले मरीजों को बुला बुला कर 2 / 2 लाख रुपए बांट दिए मरीज खुश होकर घर गये दोस्तों सुनने में बड़ा अजीब लगा पर मैं सोचता हूं काला धन नष्ट करने का सबसे बड़ा तरीका यही है दोस्तों गांव वाले या छोटे मोटे दुकानदार या जान पहचान वाले लोगों की सहायता कर आप आपस में बैठकर यह खुशियां प्राप्त कर सकते हैं इस से क्या है हर घर थोड़ा बहुत खुशियां अपने जीवन में ला सकता है नोटों को जलाना या फेकना लक्ष्मी का अपमान होता है जो आप को नुकसान पहुंचा सकता है जला कर फेकना या नष्ट करना यह एक तरह का अपराध है, जो भी अपने काला धन यूज़ करना चाहता है ताकि किसी गरीब के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आएगी।"
ऐसा करने से कम से कम उन निर्धन परिवारों का कुछ माह भोजन पानी तो चलेगा। साथ में उनका आशीर्वाद भी मिलेगा।

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