पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इन दिनों हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं| बात करें अगर मौजूदा वक़्त की तो जातीय हिंसा से सुलग रहे सहारनपुर में शांति बहाल करने में अब तक तो प्रशासन नाकाम ही दिख रहा है और शायद यही वजह है कि योगी सरकार के लिए भी सहारनपुर एक बड़ी चिंता का सबब बना हुआ है|
जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल हुए 80 साल के फूल सिंह अभी भी उस खौफनाक मंजर को याद करके सिहर उठते हैं| ऐसे में सहारनपुर में हिंसा भड़काने का आरोप जिस संगठन भीम आर्मी पर लग रहा है उसको लेकर यूपी की इंटेलिजेंस पुलिस ने सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपी है। दरअसल इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी लगातार भीम आर्मी की मदद करती रही है| बता दें कि सहारनपुर पिछले तीन दिन से सुलग रहा है|
योगी ने कहा कि हमारे आने से जिन लोगों का धरातल खिसक चुका है, जिन्होंने जातीय भेदभाव फैलाया है, जिन्होंने समाज को तोड़ करके अपना राजनीतिक उल्लू सीधा किया है, स्वाभाविक रूप से उन्हें उत्तर प्रदेश में हम सब की मौजूदगी अच्छी नहीं लगेगी, इसलिए वे कुछ ना कुछ तो करेंगे ना. इसके लिए हम सब को तैयार रहना पड़ेगा, हमें भी तैयार रहना पड़ेगा और मीडिया को भी तैयार रहना पड़ेगा.
योगी ने कहा कि सहारनपुर की घटना को हम लोग समय रहते नियंत्रित कर लेंगे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के पिछले पांच वर्षों में 450 से भी अधिक दंगे हुए लेकिन हमारे 66 दिनों के कार्यकाल में एक भी दंगे नहीं हुए, सहारनपुर में कुछ घटनाएं जरूर घटित हुए हैं, एक सिलसिला बना है लेकिन हम लोग उसकी गहराई पर पहुँच गए हैं, बस ऑपरेशन करना बाकी है, जल्द ही हम इसका सम्पूर्ण समाधान कर लेंगे.
योगी ने मायावती का बिना नाम लिए कहा कि सहरानपुर की घटना के पीछे किसका हाथ है यह पूरा देश जानता है, सहारनपुर में जाकर दलितों को कौन भड़का रहा है यह पूरा देश देख रहा है, कुछ दिनों में हम लोग सब कुछ सामने रख देंगे.
पुलिस की जांच में सहारनपुर दंगों में BHIM ARMY, मायावती और उनके भाई आनंद कुमार का नाम आ रहा है, पिछले कुछ दिनों के अन्दर BHIM ARMY के बैंक खाते में करीब 50-55 लाख रुपये ट्रांसफर हुए हैं, माना जा रहा है कि यह रुपये मायावती के भाई ने मायावती के कहने से ट्रांसफर किये हैं, पुलिस को BHIM ARMY के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की तलाश है, एक बार चंद्रशेखर आजाद को पकड़ लिया गया तो पुलिस उससे सब कुछ उगलवा लेगी.
योगी ने कहा कि हमारे आने से जिन लोगों का धरातल खिसक चुका है, जिन्होंने जातीय भेदभाव फैलाया है, जिन्होंने समाज को तोड़ करके अपना राजनीतिक उल्लू सीधा किया है, स्वाभाविक रूप से उन्हें उत्तर प्रदेश में हम सब की मौजूदगी अच्छी नहीं लगेगी, इसलिए वे कुछ ना कुछ तो करेंगे ना. इसके लिए हम सब को तैयार रहना पड़ेगा, हमें भी तैयार रहना पड़ेगा और मीडिया को भी तैयार रहना पड़ेगा.
योगी ने कहा कि सहारनपुर की घटना को हम लोग समय रहते नियंत्रित कर लेंगे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के पिछले पांच वर्षों में 450 से भी अधिक दंगे हुए लेकिन हमारे 66 दिनों के कार्यकाल में एक भी दंगे नहीं हुए, सहारनपुर में कुछ घटनाएं जरूर घटित हुए हैं, एक सिलसिला बना है लेकिन हम लोग उसकी गहराई पर पहुँच गए हैं, बस ऑपरेशन करना बाकी है, जल्द ही हम इसका सम्पूर्ण समाधान कर लेंगे.
योगी ने मायावती का बिना नाम लिए कहा कि सहरानपुर की घटना के पीछे किसका हाथ है यह पूरा देश जानता है, सहारनपुर में जाकर दलितों को कौन भड़का रहा है यह पूरा देश देख रहा है, कुछ दिनों में हम लोग सब कुछ सामने रख देंगे.
पुलिस की जांच में सहारनपुर दंगों में BHIM ARMY, मायावती और उनके भाई आनंद कुमार का नाम आ रहा है, पिछले कुछ दिनों के अन्दर BHIM ARMY के बैंक खाते में करीब 50-55 लाख रुपये ट्रांसफर हुए हैं, माना जा रहा है कि यह रुपये मायावती के भाई ने मायावती के कहने से ट्रांसफर किये हैं, पुलिस को BHIM ARMY के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की तलाश है, एक बार चंद्रशेखर आजाद को पकड़ लिया गया तो पुलिस उससे सब कुछ उगलवा लेगी.
अपना नाम सामने आने से मायवती घबरा गयी हैं, उन्होंने आज बयान जारी करके कहा है कि BHIM ARMY से मेरा और मेरे भाई का कोई सम्बन्ध नहीं है, मेरे खिलाफ गलत रिपोर्ट तैयार की गयी है, उन्होंने BJP पर ही BHIM ARMY को पैदा करने का आरोप लगा दिया जबकि BHIM ARMY बीजेपी के खिलाफ ही आन्दोलन कर रही है.
भीम आर्मी का मुखिया बहुत बड़ा आरोपी है इसके खिलाफ पुलिस में कई अपराधिक मामले दर्ज है और सबसे बड़ी बात मायावती कि पार्टी ही इस भीम आर्मी कि मदद करती आई है| अब इस सहारनपुर में हुई हिंसा को लेकर सीधा सीधा आरोप जिस संगठन पर लग रहा है वो और कोई नही भीम आर्मी है|
BHIM ARMY उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश कर रही है, इनका मकसद हिन्दुओं में आपस में फूट डालना और दलितों को हिन्दुओं और खासकर सवर्णों के खिलाफ भड़काकर अपनी रोटी सेंकना है, साफ़ साफ़ कहें तो कुछ लोग नेता बनने और करोड़ों रुपये कमाने के लिए दलितों के सर पर रखकर बन्दूक चला रहे हैं मतलब उनका मिसयूज़ कर रहे हैं.
इन लोगों ने सहारनपुर में दलितों को राजपूतों के खिलाफ इतना भड़का दिया है कि पिछले 20-25 दिनों से दोनों समुदायों के खिलाफ दंगे हो रहे हैं, अब तक एक ठाकुर और एक दलित की मौत हो चुकी है, दलितों को भड़काने के लिए JNU के आजादी गैंग के लोग भी पहुँच रहे हैं, BHIM ARMY ने हाल ही में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, JNU के आजादी गैंग के सदस्य यहाँ भी दिखे थे, देश में बहुत बड़ी साजिश हो रही है, बीजेपी को वोट देने के लिए बहुत मुश्किल से हिन्दू समाज एकजुट हुआ था लेकिन अब उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है, एक जाती को दूसरी जाति के खिलाफ भड़काया जा रहा है.
BHIM ARMY उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश कर रही है, इनका मकसद हिन्दुओं में आपस में फूट डालना और दलितों को हिन्दुओं और खासकर सवर्णों के खिलाफ भड़काकर अपनी रोटी सेंकना है, साफ़ साफ़ कहें तो कुछ लोग नेता बनने और करोड़ों रुपये कमाने के लिए दलितों के सर पर रखकर बन्दूक चला रहे हैं मतलब उनका मिसयूज़ कर रहे हैं.
इन लोगों ने सहारनपुर में दलितों को राजपूतों के खिलाफ इतना भड़का दिया है कि पिछले 20-25 दिनों से दोनों समुदायों के खिलाफ दंगे हो रहे हैं, अब तक एक ठाकुर और एक दलित की मौत हो चुकी है, दलितों को भड़काने के लिए JNU के आजादी गैंग के लोग भी पहुँच रहे हैं, BHIM ARMY ने हाल ही में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, JNU के आजादी गैंग के सदस्य यहाँ भी दिखे थे, देश में बहुत बड़ी साजिश हो रही है, बीजेपी को वोट देने के लिए बहुत मुश्किल से हिन्दू समाज एकजुट हुआ था लेकिन अब उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है, एक जाती को दूसरी जाति के खिलाफ भड़काया जा रहा है.
यूपी की इंटेलिजेंस पुलिस ने इसकी रिपोर्ट योगी आदित्यनाथ को सौंपी है| इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी लगातार भीम आर्मी की मदद करती रही है|
देखिये वीडियो:
रिपोर्ट में सामने आया है कि मायावती के भाई आनंद कुमार भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर के लगातार संपर्क में रहे हैं| बड़ी बात ये है कि सहारनपुर में हुए बवाल के बाद भी मायावती के भाई आनंद कुमार चंद्रशेखर के संपर्क में थे और किसी तीसरे आदमी के जरिए दोनों में बात होती रही|
सहारनपुर पिछले कुछ दिनों से सुलग रहा है. मायावती की रैली से लौटते वक्त एक दलित युवक की हत्या के बाद तनाव इतना बढ़ा कि कल दो जगह फिर गोली चली. सहारनपुर के हालात को काबू करने के लिए योगी सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है. सहारनपुर के डीएम औऱ एससपी और आईजी को हटा दिया गया है. सहारनपुर में इंटरनेट सेवाओँ पर रोक लगा दी गई है.
अधिकारियों के सुनाई खरी खोटी
सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर गांव में सूबे में गृह विभाग के सबसे बड़े अधिकारी यानी राज्य के गृह सचिव पहुंचे तो उन्हें लोगों ने घेर लिया और जमकर खरी खोटी सुनाई. तीन दिन पहले सहारनपुर के इसी शब्बीरपुर गांव में मायावती गई थीं, तब से हालात बिगड़े.
मायावती की रैली से लौट रहे युवकों पर हमला हुआ, जिसमें एक दलित युवक की मौत हो गई और इसका आरोप राजपूतों पर लगा. कल फिर दलितों औऱ राजपूतों में गोलीबारी की दो घटनाएं हुई. योगी सरकार ने हालात को संभालने के लिए पूरे महकमे को सहारनपुर में उतार दिया है. गृह सचिव एमपी मिश्रा और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आदित्य मिश्रा सहारनपुर में कैंप कर रहे हैं. प्रशासन दावा है कि अब धीरे-धीरे अब हालात सामान्य हो रहे हैं.
सहारनपुर के अफसरों पर गिरी गाज गाज
सहारनपुर हिंसा को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने जिले के डीएम एनपी सिंह, एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे और रेंज के आईजी जे के शाही को हटा दिया है. सहारनपुर के हालात को लेकर सीएम योगी अफसरों से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं. तो योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह को इसमें राजनीतिक साजिश लग रही है.
सहारनपुर में दलितों औऱ राजपूतों के बीच पांच मई से चल रहा संघर्ष योगी सरकार के लिए चिंता की बड़ी वजह बनता जा रहा है. वहीं सहारनपुर की घटनाओं को लेकर जमकर राजनीति भी हो रही है. बीएसपी का प्रतिनिधिमंडल कल रात फिर सीएम से मिला और लोगों को सुरक्षा देने की मांग की.
क्या हुआ था सहारनपुर में ?
आपको बता दें कि सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में पांच मई को उस वक्त झड़पें शुरू हो गई थीं जब गांव के कुछ दलित निवासियों ने ठाकुरों(अगड़ी जाति के लोगों) की ओर से राजपूत राजा महाराणा प्रताप की जयंती पर एक जुलूस निकालने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था.
इसके बाद दलित समुदाय के लोगों ने शहर के गांधी उद्यान में नौ मई को एक महापंचायत करने की कोशिश की, ताकि पांच मई की झड़पों में प्रभावित हुए लोगों के लिए मुआवजे और राहत की मांग की जा सके, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें महापंचायत आयोजित करने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण दलित समुदाय सड़कों पर उतर गया. फिर हुई हिंसा में दलित प्रदर्शनकारियों ने शहर में कथित तौर पर एक पुलिस चौकी और एक दर्जन से ज्यादा बाइकों को आग के हवाले कर दिया.
सहारनपुर में दलितों की अगुवाई भीम आर्मी नाम का संगठन कर रहा था. रविवार को हजारों दलित अधिकार कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर भी इस मौके पर मौजूद थे. उन पर सोशल मीडिया में एक आपत्तिजनक वीडियो साझा करने और सहारनपुर में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप है.
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