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दलित नेता एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद कहाँ फरार हो गया?

सहारनपुर हिंसा की आग में सुलग रहा है। सहारनपुर हिंसा से योगी सरकार के काम-काज पर सवाल उठ रहे हैं। इस हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार इलाके के किसान और मजदूर बने हैं। लेकिन, जिस तरह से जातीय हमलों को अंजाम दिया जा रहा है, उससे यह बात साफ हो गई है कि यह सोची-समझी साजिश है। इस बात का अंदेशा और बढ़ जाता है जब हम भींड के व्यवहार को ध्यान से देखते हैं। सहारनपुर में जहां भी हिंसा हुई है वहां हमलावर अचानक आते हैं, खून-खराबा करते हैं और ऐसे गायब हो जाते हैं कि पुलिस प्रशासन को भनक ही नहीं लगती। ऐसी जगहों पर हमला किया गया है जहां पुलिस की मौजूदगी कम हो और सनसनी ज्यादा फैले। जो कहीं न कहीं सहारनपुर में भड़की हिंसा में साजिश की ओर इशारा करते हैं। 

छह नेताओं ने भीम सेना को दिये लाखों रुपए –

सहारनपुर में मौजूद प्रदेश के आला अफसरों और खुफिया विभाग ने शासन को एक रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, जातीय हिंसा की वजह राजनीतिक षड्यंत्र है। यह हिंसा दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने के लिए साजिश है। इसमें घटनास्थल, हिंसा का प्रारूप, समय-सीमा और लोग, सब कुछ तय था। इन दंगों में बाहरी उपद्रवियों का प्रयोग भी किया गया है।
देखिये किस तरह भगवान हनुमान की मूर्ति को जूते मार रहे भीम आर्मी वाले 
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https://www.facebook.com/dk.shrivastava.58/videos/2195783120648012/
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि भीम सेना को विभिन्न दलों के छह नेताओं ने आर्थिक सहायता दी है। इन छह नेताओं में एक अल्पसंख्यकों का कद्दावर नेता भी शामिल है। विभिन्न जनपदों से सहारनपुर में पहुंचे 18 अपर पुलिस अधीक्षकों, एसटीएफ व एटीएस ने इन नेताओं और उपद्रवियों की कुंडली तैयार कर ली है और इनपर जल्द ही कार्रवाई होगी।
सुभाष चंद दूबे को सहारनपुर हिंसा के बाद एसएसपी की पोस्ट से सस्पेंड कर दिया गया था। उन्होंने कहा है कि, भीम सेना एक गैरकानूनी संगठन है, जिसके मेंबर पर्सनल बैंक खातों में चंदा जमा करते हैं। जांच में इसके तीन पर्सनल बैंक खातों का पता चला है। संगठन की एक्टिविटीज को देखते हुए ऐसा इनके नक्सलियों से भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। आपको बता दें कि यह संगठन सहारनपुर के 700 गांवों में एक्टिव है।
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भीम सेना नाम के इस संगठन का गठन 2013 में हुआ था जो दलितों को लीड करती है। इसका चीफ एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद है और वह हिंसा के बाद से ही फरार है। ऐसा खुलासा हुआ है कि हर गांव में भीम सेना के 8 से 10 मेंबर मौजूद हैं। ये सभी अपने सिर पर नीला कपड़ा बांधें दिखते हैं। भीम सेना के बढ़ते प्रभाव से मायावती के राजनीतिक भविष्य को अधिक खतरा है।
एक राजनीतिक दल ने इस पूरी हिंसा को प्लान किया है।उस राजनीतिक दल ने इस हिंसा को कराने के लिए 50 लाख रुपए खर्च किए।
खूफिया रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि वो राजनीतिक दल चाहता है कि सहारनपुर में हिंसा जारी रहे। ताकि सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार पर ये आरोप लगे कि यूपी में दलितों को निशाना बनाया जा रहा है।
भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर की गिरफ्तारी जल्द यूपी के मुख्य गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा के मुताबिक सहारनपुर में जातीय संघर्ष देखा गया वो एक सोची समझी साजिश थी।
एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में सहारनपुर और आस पास के जिलों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं लेकिन जिस तरीके की हिंसा इस बार हमने देखा वैसा पहले नहीं देखा गया। 
मणि प्रसाद मिश्रा ने सहारनपुर में 20 अप्रैल, 5 मई, 9 मई और 23 मई को हुई घटनाओं का जिक्र किया। मणि प्रसाद मिश्रा ने बताया कि 20 अप्रैल की हिंसा के बाद एक के बाद एक कई घटनाए सामने आई हैं।
इस मामले में स्थानीय पुलिस की तरफ से भी कोताही बरतने की बात सामने आई है। वहीं मुख्य गृह सचिव ने कहा कि भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर को जल्दी ही गिरफ्तारी किया जाएगा।
यूपी सरकार को बदनाम करने की साजिश सहारनपुर हिंसा मामले में एक राजनीतिक दल की भूमिका संदिग्ध है अभी तक जो रिपोर्ट सामने आई है उसके मुताबिक पूरी हिंसा की प्लानिग की गई थी जिसका मकसद यूपी सरकार को बदनाम करना है। 5 मई को राजपूतों और दलितों के बीच विवाद के बाद सहारनपुर में हिंसा ने बड़ा रुप ले लिया था।
जिसके बाद से पुलिस- प्रशासन सहारनपुर में हालात सामान्य करने में लगा है। पूरी कोशिश के बाद भी मामला शांत नहीं हो पा रहा है क्योंकि इसके पिछे बड़ा राजनितिक खेल है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि जो 50 लाख रुपए इस हिंसा को कराने में खर्च किए गए वो कहां से और कैसे आए।
पूरे यूपी में हिंसा भड़काने की थी तैयारी इंटेलिजेंस ब्यूरो सहारनपुर हिंसा के बारे में सूचनाएं और तथ्य इक्टठा करने की कोशिश कर रहा है। एक अधिकारी के मुताबिक सहारनपुर हिंसा के बाद चेन बनाकर पूरे यूपी में हिंसा भड़काने की तैयारी थी। सहारनपुर हिंसा में बाहरी लोगों ने बड़ी भूमिका निभाई है वो कौन लोग है पुलिस अभी इसकी जांच कर रही है। सहारनपुर हिंसा की शुरुआत 5 मई को एक जुलूस को लेकर दलित और राजपूत समुदाय के बीच हुई झड़प से हुई थी। उस झड़प में एक ठाकुर युवक की मौत हो गई थी जिसके बाद राजपूतों ने 50 दलितों के घरों को जला दिया था।


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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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