
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
कासगंज में अख़लाक़ या रोहित वेमुला नहीं, चंदन गुप्ता मरा है। इसलिए क़ातिलों के धर्म का पता नहीं चल पा रहा। तिरंगा यात्रा से परेशानी उन्ही को है जिन्हें वन्दे मातरम् से परहेज़ है। धर्म के ठेकेदार चुपचाप छुपे बैठे है कोई बहस नहीं। पत्थर फेंकने वाला राजपूत था, लेकिन तिरंगा यात्रा करने वाले छात्र पर गोली चलाने वालो का धर्म अभी तक मीडिया और सेक्युलर खोज नही पाये हैं...घायल हुए एक ओर युवा राहुल उपाध्याय की भी मृत्यु हो गयी है।
अब न ही किसी मॉब लिंचिंग, #not in my name, और न ही किसी असहसुष्णिता की रोने वाले की आवाज़ नहीं निकल रही। पता नहीं किस कोने में मुँह छिपाए बैठे हैं? अरे छद्दमों अब क्यों नहीं विधवा-विलाप करते? क्या अख़लाक़ या रोहित वेमुला पर विधवा-विलाप किसी से मिले चंदे पर किया जाता है?
जहां चंदन की मां संगीता ने कहा है कि उनका बेटा चंदन किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा था। उसने पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा नहीं लगाया तो उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। संगीता ने कहा, ‘मैं अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती हूं। मेरा बेटा तो भारत माता की जय बोल रहा था। अगर मेरे बेटे ने कोई गुनाह किया तो मुझे भी गोली मार दी जाए।
वहीं प्राइवेट हास्पिटल में काम करने वाले चंदन के पिता सुशील गुप्ता ने बेटे के लिए शहीद का दर्जा मांगा है। एबीपी न्यूज से बातचीत करते हुए सुशील ने कहा- ‘‘ मैं चाहता हूं कि मेरे बेटे को न्याय मिले। उसे आसामाजिक तत्वों ने गोली मार दी। अखलाक के मरने पर नौकरी और फ्लैट दे रहे हैं क्या हिंदू के लिए कुछ नहीं है। ” सुशील ने कहा कि उनका बेटा भारत माता की जय और वंदेमातरम बोलने के कारण जान से मार दिया गया।
इंटरनेट को बाधित कर अफवाह फैलने से रोका गया है । एबीपी न्यूज से बातचीत में डीजीपी ने घटना को सांप्रदायिक घटना माना। डीजीपी ने कहा कि कानून-व्यवस्था की बहाली के लिए पुलिस सख्त से सख्त कदम उठाएगी। हाउस टू हाउस सर्च कर रहे हैं। नेताओं के जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर उपद्रवियों पर रासुका की कार्रवाई होगी।
स्मरण होता है, 1965 भारत-पाक युद्ध के दौरान, सदाबहार गायक मौ. रफ़ी और महेन्द्र कपूर के गाए गैर-फिल्मी गीत "कहनी एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल कर रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से..." आज भी चरितार्थ हो रहा है। समय है, उस युद्ध के दौरान मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में पुलिस रिकॉर्ड की। काश! तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ताशकंत से वापस आ गए होते। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन्हे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहीं अधिक सख्त माना जाता है, "पाकिस्तान ज़िन्दाबाद" और तिरंगा रैली पर जानलेवा करने वालों के विरुद्ध पहाड़ बन टूटें। और इनके समर्थन में आने वाले किसी भी नेता पर नरमी बरतने की बजाए सख्ती से पेश आएं।
ये है स्वयं को शांतिप्रिय कहनेवालो लोगों का असली रूप ! यदि हिंसा में
कोर्इ मुसलमान मारा जाता, तो सेक्युलर मिडिया अब तक दिन-रात चर्चासत्र
आयोजित कर बवाल खडा करती आैर देश में अहिष्णुता बढने का ढिंढोर पीटकर मोदी
सरकार को बदनाम करती । किंतु मरनेवाला हिन्दू है, शायद इसलिए मिडिया शांत
है !एबीपी न्यूज के अनुसार कासगंज में हिंदुओं ने ही भड़काऊ नारे लगाए थे जिसके बाद ही ये घटना हुई।मैं पूछना चाहता हूँ एबीपी न्यूज वालों से कि आप मुसलमानों पर लगे आरोपों को झूठा साबित करने में तनिक भी देरी नहीं लगाते लेकिन पूरी खबर भी क्यों नहीं दिखाते?
पूरी खबर ये है कि ये घटना सुनियोजित थी, मुसलमानों को पहले से पता था कि उनके मोहल्ले से तिरंगा रैली निकलने वाली है इसलिए कुछ आतंकी प्रवृति के मुसलमानों ने आनन-फानन में अपने मोहल्ले में भी तिरंगा फहराने का कार्यक्रम आयोजित कर लिया और रास्ते पर कुर्सियाँ बिछाकर रास्ता रोक दिया ताकि तिरंगा रैली में विघ्न डालकर माहौल खराब किया जा सके साथ ही ध्वजवंदन कार्यक्रम की आड़ लेकर बच भी सकें।
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अब तिरंगा रैली के दौरान बंद रास्ता देखकर देशभक्तों का तो खून खौलना ही था और वही हुआ भी,फिर भी उन्होंने जो नारे लगाए वो भड़काऊ नहीं थे।"हिंदुस्तान में रहना होगा वंदेमातरम् कहना होगा", "भारत माता की जय", क्या एबीपी न्यूज वालों के हिसाब से ये नारे भड़काऊ है??और यदि भड़काऊ हैं भी तो क्या इतने भड़काऊ हैं कि उन्हें सुनकर शांतिप्रिय लोगों को ए के 47 से उस रैली पर गोलियां दागने का अधिकार मिल गया?
एबीपी न्यूज जैसी ही भाषा आज सपा प्रवक्ता की भी इस मामले में थी लेकिन खैर जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो दूसरों को क्या दोष दें??शहीद चंदन ने तो यही सोचा होगा कि योगी जी मुख्यमंत्री हैं,अपनी सरकार है और अपना ही शहर है तो चलो इस गणतंत्र दिवस पर शान से बेखौफ होकर तिरंगा रैली निकालते हैं लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा सोचना उसकी गलती रही।अब योगी जी से हाथ जोड़कर बस यही निवेदन है कि या तो आरोपियों की गिरफ्तारी का झुनझुना दिखाने की बजाय उनका तुरंत एनकाउंटर करके अपनी देशभक्ति दिखाएं साथ ही कासगंज का पुलिस प्रशासन जोकि तिरंगा रैली को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहा उसके दोषियों पर सख्त कार्यवाई करें अन्यथा या फिर साफ साफ एलान कर दें कि यूपी में भी कश्मीर की तरह ही तिरंगा फहराना फिलहाल निषेध है।
कासगंज में गणतंत्र दिवस के अवसर पर निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान वंदेमातरम् के जवाब में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पथराव व गोलीबारी करने वाले हिंसक उपद्रवियों के साथ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उपद्रवियों के हमले में मारे गए विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता हिमांशु गुप्ता के परिवार को समुचित आर्थिक सहायता की भी मांग करता हूं।
योगी राज में प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति में लगातार हो रहा सुधार कुछ निहित स्वार्थी राजनेताओं को पच नहीं रहा है और वह तरह-तरह के हथकंडे अपना कर लोगों को भडका रहे हैं। कासगंज के उपद्रवियों के विरूद्ध ऐसी कडी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे पूरे प्रदेश को संदेश जाए।
योगी सरकार बनने के बाद मुजफ्फरनगर के खालापार में गौकशी की सूचना पर पहुंची पुलिस पर उपद्रवियों ने पथराव कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी में अवरोध डाला था। पथराव व पुलिस के वाहन तोडे गये थे। सरकार ने पुलिस के पेंच कसे तो सारे उपद्रवी गिरफ्तार कर जेल में डाले गये। पत्थरबाजों का सरपरस्त हाजी शेर कई महीनों से जेल में है और अब उसकी हालत हाजी चूहा जैसी हो गई है। यह सपा पोषित नेता था। कासगंज के उपद्रवियों से कडाई से पेश आना चाहिए।
हिंसा के बाद अभी भी कासगंज में कर्फ्यू जारी है। झड़प के दौरान मारे गए युवक चंदन गुप्ता के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रही साध्वी प्राची को अलीगढ़ जिले के सिकंदराराऊ में पुलिस ने रोका। गुस्साई साध्वी प्राची ने वहीं पंत चौराहे पर धरने पर बैठ गई। पुलिस ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है।
एतिहातन के तौर पर कासगंज की ओर आने वाले सभी वाहनों को रोक दिया गया। कासगंज की सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
छावनी में तब्दील शहर
उपद्रव के बाद पूरा शहर कर्फ्यू की जद में आ गया। जगह-जगह गली मोहल्लों में सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। शहर छावनी में तब्दील कर दिया गया। मौके पर पहुंचे डीएम को विरोध का सामना करना पड़ा।
शहर के उपद्रव के बाद एसपी सुनील कुमार सिंह ने कासगंज कोतवाली, सोरों, गंजडुंडवारा, अमांपुर, सिढ़पुरा, पटियाली, ढोलना समेत थानों से पुलिस फोर्स शहर में तैनात कर दी। इसके अलावा एटा, हाथरस, अलीगढ़ रेंज से पुलिस फोर्स बुलाया गया है।
कुछ समय बाद ही आईजी रेंज अलीगढ़ और कमिश्नर के कासगंज शहर पहुंचने की सूचना मिली है। पूरे शहर में बाजारों में सन्नाटा पसर गया है।
पुलिस के वाहन माइकों से घोषणा कर लोगों से अपने अपने घरों में जाने की सूचना प्रसारित कर रहे हैं। इसी दौरान बिलराम गेट पर रुके डीएम आरपी सिंह को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े तेवर में डीएम को खरी खरी सुना गये।
मेरे बेटे ने पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं कहा तो उसे गोली मार दी-- चंदन गुप्ता की मां संगीता गुप्ता
कासगंज सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए चंदन गुप्ता की मां ने नया खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को जबरन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोलने को कहा जा रहा था। चंदन की मां संगीता ने कहा, ‘मुझे भी गोली मार दो। मैंने वंदे मातरम् बोला है। मैं भारत माता की जय बोलती हूं। मैं हिंदुस्तान जिंदाबाद’ बोलती हूं। मेरा बेटा चंदन किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा था। उसे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा था, लेकिन उसने इनकार कर दिया था। उन्होंने उसकी गोली मार कर हत्या कर दी।’ संगीता ने कहा कि भारत माता की जय बोलना कोई गुनाह है तो मुझे भी गोली मार दी जाए। संगीता ने कहा, ‘मैं अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती हूं। मेरा बेटा तो भारत माता की जय बोल रहा था। अगर मेरे बेटे ने कोई गुनाह किया तो मुझे भी गोली मार दी जाए। 26 जनवरी को मेरा बेटा हिंदुस्तान जिंदाबाद बोल रहा था। क्या हिंदुस्तान में रहकर ऐसा बोलने के लिए किसी से अनुमति लेनी होगी। हमें सरकार से इस बात का इंसाफ चाहिए।’ कासगंज में हिंसा भड़कने और चंदन की हत्या के बाद पुलिस ने अब तक 49 लोगों को हिरासत में लिया है। बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इसमें चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया था। हालात को देखते हुए कासगंज को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
गणतंत्र दिवस के मौके पर भड़की हिंसा पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। शहर में अब भी तनाव बरकरार है। चंदन का शनिवार (27 जनवरी) को अंतिम संस्कार किया गया था। इसमें कासगंज-एटा क्षेत्र के सांसद राजवीर सिंह और इलाके के तीन विधायक भी शामिल हुए। इससे पहले साध्वी प्राची ने भी कासगंज में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी थी। बीबीसी हिंदी के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजय आनंद ने कहा कि हर व्यक्ति पर नजर नहीं रखी जा सकती है। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद शनिवार को दोबारा हिंसा भड़कने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘हर एक व्यक्ति पर निगरानी नहीं रखी जा सकती है। जो लोग हिंसा के लिए दोषी हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है।’
शनिवार (27 जनवरी) को शहर के सहावर गेट इलाके में करीब दो दर्जन दुकानों में लूटपाट के बाद आगजनी की कोशिश की गई थी। नदरई गेट और बाराद्वारी में कई दुकानों में आग लगा दी गई। ये दोनों इलाके कासगंज नगर कोतवाली से कुछ ही दूरी पर स्थित हैं। सांप्रदायिक हिंसा को देखते हुए शहर में सुरक्षाबलों की मौजूदगी बढ़ दी गई है। पुलिस के आला अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं। शहर में दाखिल होने वाले लोगों की तलाशी ली जा रही है। इसके बावजूद एक रोडवेज बस समेत तीन बसों में आग लगा दी गई। बाइक को भी जला दिय गया।(एजेंसी इनपुट के साथ)
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