इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दूरंतो, राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस गाडिय़ों में वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में फ्लैक्सी किराया प्रणाली लागू नहीं होगी। इन गाडिय़ों में द्वितीय श्रेणी कुर्सीयान, स्लीपर, एसी थ्री, एसी टू और चेयरकार श्रेणियों में ही यह प्रणाली लागू की जायेगी। परिपत्र के अनुसार विमान किरायों की तर्ज पर बुकिंग आरंभ होने पर पहली दस प्रतिशत सीटें मूल किराये पर बुक होंगी। इसके आगे सीटों की बुकिंग दस-दस प्रतिशत बढऩे पर दस-दस फीसदी किराया भी बढ़ाने का प्रावधान है। उदाहरण के लिए अगर किसी ट्रेन में सौ सीटें हैं तो पहली दस सीटें मूल किराये पर आरक्षित की जायेंगी।
| मंत्रीजी ये टीवी क्या एच कम्पार्टमेंट में लगा है? क्या इस कम्पार्टमेंट की सुविधाओं के लिए किराये में वृद्धि की है? |
ग्यारहवीं सीट से 20वीं सीट तक 110 प्रतिशत किराया लिया जाएगा। इक्कीसवीं से 30 वीं सीट तक 120 प्रतिशत किराया लिया जायेगा। 31वीं सीट से 40वीं सीट तक 130 प्रतिशत तथा 41वीं सीट से 50वीं सीट तक 140 प्रतिशत किराया होगा। जबकि 51वीं सीट और उसके आगे सभी सीटों पर 150 प्रतिशत किराया देना होगा।
| रेलमंत्रीजी ये सुविधाएँ किसे दे रहे हो ? |
हालांकि एसी थ्री में 41वीं सीट से आगे सभी सीटों पर 140 प्रतिशत किराया ही देना होगा। इस श्रेणी के लिये 150 प्रतिशत किराया नहीं लिया जायेगा। रेलवे के इस निर्णय की मध्यम वर्ग ने तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि सेवा के अनुपात से किराया वृद्धि बहुत ज्य़ादा है। इससे कई स्थानों पर दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा जैसे मार्गों पर राजधानी /दूरंतो गाडिय़ों में एसी टू का अंतिम किराया लो कॉस्ट एयरलाइन के किराये के बराबर या कुछ ज्य़ादा हो सकता है।
राजधानी, दुरंतो और शताब्दी एक्सप्रेस में फ्लैक्सी फेयर सिस्टम पर चौतरफा विरोध के बाद दबाव में आई मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि इस फॉर्मूले को दूसरी अन्य ट्रेनों में लागू नहीं किया जाएगा। रेलवे के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार फैसले पर कुछ समय के बाद दुबारा विचार किया जाएगा। भारतीय रेलवे द्वारा किराये का नया सिस्टम आज यानि 9 सितंबर से ही लागू होगा।
एक समय था, जब वर्ष में एक ही बार बजट में ही वृद्धि होती थी, परन्तु आज बजट मात्र एक औपचारिकता ही रह गयी है। मनभावन बजट पेश कर, खूब वाहवाही लूट वर्ष के मध्य में जो कीमते बढ़ायी जाती हैं, यह जनता के साथ किसी घोर अत्याचार से कम नहीं। रेल मन्त्री को क्या बजट पेश करते समय इन बातों का ध्यान नहीं था, जो अब किराये में वृद्धि की जा रही है? फिर जिन गाड़ियों के किराये में वृद्धि की है इसका औचित्य क्या है? क्या आधार है? इन गाड़ियों में जो खाना दिया जाता है, करते है कोई चेक। किसी को जरुरत भी नहीं।
राजधानी में शायद ही कोई सफर हो, खाने को लेकर चिकचिक न होती हो। इतना घटिया स्तर का खाना होता है, शायद कोई भी मरीज़, कुछ अपवाद को छोड़कर, न खाये। जब भोजन की क्वालिटी पर वेटर के माध्यम से सुपरवाइजर को बुलावा कर शिकायत की जाती है, तो दो-तीन सब्ज़ियाँ जो दी जाती हैं, उनके स्वाद में और पहले दिए में ज़मीन आसमान का अंतर होता है। जो एक प्रश्न उत्पन्न करता है कि आखिर बाद में जो सब्ज़ी वगैरह दी गयी अन्य यात्रियों को क्यों नहीं? क्या यह यात्रियों के साथ धोखा नहीं? अचानक कहाँ से आ जाती है ये सब्जियाँ? यह बात व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर लिखी जा रही हैं। और उसके बाद जो नाश्ता/जलपान आदि से लेकर अगले भोजन तक जो स्वाद होता है, खाने का मन होता है। उस कम्पार्टमेंट के यात्रियों के प्रशंसा का पात्र बन जाता हूँ। क्या रेलमन्त्री ने इस ओर ध्यान दिया? यदि नहीं, तो क्यों? प्रभुजी बहुत गम्भीर मामला है, ऑंखें खोलिये। सफर के अंत होने से 15/20 मिनट पूर्व सब लोग टिप लेने आते हैं। कम से कम 100 रूपए और जब किराया बढ़ गया है तो टिप भी बढ़ेगी। वेटर, सफाई कर्मचारी, कम्बल आदि देने वाला सब को अलग-अलग चाहिए। आधे से ज्यादा कम्पार्टमेंट खाली होता है। और मंज़िल आते-आते गिनती के यात्री ही शेष रहते हैं।
रेलवे के इस फैसले पर रेल मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि रोजाना दो करोड़ तीस लाख से ज्यादा लोग रेलवे में सफर करते हैं, राजधानी, दुरंतो और शताब्दी में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या एक फीसदी से भी कम है, इसलिए फ्लैक्सी किराये का असर बहुत ही कम यात्रियों पर पड़ेगा। हर दिन बारह हजार से ज्यादा ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती है, फ्लैक्सी किराया सिर्फ 81 ट्रेनों में लागू होगा, बावजूद इसके ये तर्क बीजेपी नेताओं के गले भी नहीं उतर रही, उनका कहना है कि इन किरायों से रेलवे को आमदनी तो ना के बराबर होती है, मगर इससे सरकार की छवि को नुकसान होगा, मध्यमवर्ग के बीच इसे लेकर गलत मैसेज जा सकता है।यात्रियों से मिलने वाले राजस्व का लक्ष्य इस साल 51 हजार करोड़ रुपये है, पिछले साल ये लक्ष्य 45 हजार करोड़ रुपये था, यानि इस साल 6 हजार करोड़ ज्यादा जुटाने का लक्ष्य है। भारतीय रेल के अधिकारियों का कहना है कि हम लोग यात्री सुविधाओं के लिये इस साल 18 सौ करोड़ रुपये खर्च कर रहे है, जिसमें प्लेटफॉर्म एरिया को दुरुस्त करना, लिफ्ट लगाना, पानी की मशीनें लगाना और इसी तरह की अन्य सुविधाएं शामिल है। ऑल इंडिया रेलवे फे़डरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि बढ़ोत्तरी गरीब रथ और जनशताब्दी ट्रेनों के लिये नहीं है, जिनसे आम लोग यात्रा कर रहे हैं। शताब्दी और राजधानी का इस्तेमाल वो लोग करते हैं जो प्रीमियम सेवा पर खर्च करने में समर्थ हैं।
सूत्रों ने कहा कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने यह फैसला रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के विरोध के वावजूद लिया। सिन्हा ने कहा था कि इसका असर मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, जिसका खामियाजा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
लेकिन प्रभु ने सिन्हा के विरोध को खारिज कर दिया। इसके बाद सिन्हा ने यह मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और भाजपा अध्यक्ष के समक्ष उठाया, और उन्हें समझाने में कामयाब रहे।
सिन्हा ने तर्क दिया कि रेलवे के वाणिज्यिक लाभ के लिए भाजपा अपना राजनीतिक नुकसान नहीं सह सकती, क्योंकि इस फैसले से मध्यम वर्ग तथा कम आय कमाने वाला एक बड़ा तबका नाराज है, जो यात्रा के लिए हवाई जहाज नहीं, रेल पर निर्भर है।
सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि इसके बाद शाह ने इस विवादित कदम के नफे-नुकसान के बारे में प्रभु से बातचीत की। प्रभु ने दावा किया कि इस फैसले से रेलवे को 500 करोड़ रुपये का लाभ होगा। प्रभु का यह फैसला शुक्रवार से ही प्रभाव में आ गया।
शाह ने कथित तौर पर यह स्पष्ट किया कि 500 करोड़ रुपये के लिए भाजपा मध्यम वर्ग की नाराजगी का जोखिम मोल नहीं ले सकती, वह भी ऐसे वक्त जब पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं।
राजधानी, शताब्दी तथा दूरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया नौ सितंबर से ही लागू हो गया है, जिसकी घोषणा बुधवार को की गई थी।
नई प्रणाली के तहत प्रत्येक 10 फीसदी बर्थ की बिक्री पर ट्रेन के किराये में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। बढ़ोतरी अंत में 50 फीसदी तक पहुंच जाएगी।
सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि शाह के हस्तक्षेप के बाद ही रेलवे की ओर से इस फैसले को अभी ‘प्रायोगिक तौर पर’ लागू करने की बात कही गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी प्रभु को फैसला वापस लेने का आदेश दे चुकी है। लेकिन इसकी घोषणा सिर्फ इसलिए नहीं की गई, ताकि कहीं यह संदेश न चला जाए कि सरकार को विपक्ष के विरोध के आगे झुकना पड़ा।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने फ्लेक्सी फेयर के खिलाफ आवाज उठाई है और इसे वापस लेने की मांग की है।
प्रभु के एक और फैसले को लेकर मनोज सिन्हा ने आपत्ति जताई थी। यह फैसला हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों के लिए रेलवे पास रद्द करने से संबंधित था।
सिन्हा ने कथित तौर पर इस मुद्दे को भी शाह के समक्ष उठाया।
कमेटी के अधिकांश सदस्य भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या इससे संबद्ध संगठनों से हैं।
एक सूत्र ने आईएएनएस से कहा, “फ्लेक्सी फेयर अभी फिलहाल कुछ दिनों के लिए जारी रहेगा। समस्या यह है कि दोनों ही फैसले केवल नौकरशाहों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए और इसमें राजनीतिक नफे-नुकसान का आकलन नहीं किया गया था।”
सूत्रों ने कहा कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने यह फैसला रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के विरोध के वावजूद लिया। सिन्हा ने कहा था कि इसका असर मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, जिसका खामियाजा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
लेकिन प्रभु ने सिन्हा के विरोध को खारिज कर दिया। इसके बाद सिन्हा ने यह मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और भाजपा अध्यक्ष के समक्ष उठाया, और उन्हें समझाने में कामयाब रहे।
सिन्हा ने तर्क दिया कि रेलवे के वाणिज्यिक लाभ के लिए भाजपा अपना राजनीतिक नुकसान नहीं सह सकती, क्योंकि इस फैसले से मध्यम वर्ग तथा कम आय कमाने वाला एक बड़ा तबका नाराज है, जो यात्रा के लिए हवाई जहाज नहीं, रेल पर निर्भर है।
सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि इसके बाद शाह ने इस विवादित कदम के नफे-नुकसान के बारे में प्रभु से बातचीत की। प्रभु ने दावा किया कि इस फैसले से रेलवे को 500 करोड़ रुपये का लाभ होगा। प्रभु का यह फैसला शुक्रवार से ही प्रभाव में आ गया।
शाह ने कथित तौर पर यह स्पष्ट किया कि 500 करोड़ रुपये के लिए भाजपा मध्यम वर्ग की नाराजगी का जोखिम मोल नहीं ले सकती, वह भी ऐसे वक्त जब पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं।
राजधानी, शताब्दी तथा दूरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया नौ सितंबर से ही लागू हो गया है, जिसकी घोषणा बुधवार को की गई थी।
नई प्रणाली के तहत प्रत्येक 10 फीसदी बर्थ की बिक्री पर ट्रेन के किराये में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। बढ़ोतरी अंत में 50 फीसदी तक पहुंच जाएगी।
सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि शाह के हस्तक्षेप के बाद ही रेलवे की ओर से इस फैसले को अभी ‘प्रायोगिक तौर पर’ लागू करने की बात कही गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी प्रभु को फैसला वापस लेने का आदेश दे चुकी है। लेकिन इसकी घोषणा सिर्फ इसलिए नहीं की गई, ताकि कहीं यह संदेश न चला जाए कि सरकार को विपक्ष के विरोध के आगे झुकना पड़ा।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने फ्लेक्सी फेयर के खिलाफ आवाज उठाई है और इसे वापस लेने की मांग की है।
प्रभु के एक और फैसले को लेकर मनोज सिन्हा ने आपत्ति जताई थी। यह फैसला हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों के लिए रेलवे पास रद्द करने से संबंधित था।
सिन्हा ने कथित तौर पर इस मुद्दे को भी शाह के समक्ष उठाया।
कमेटी के अधिकांश सदस्य भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या इससे संबद्ध संगठनों से हैं।
एक सूत्र ने आईएएनएस से कहा, “फ्लेक्सी फेयर अभी फिलहाल कुछ दिनों के लिए जारी रहेगा। समस्या यह है कि दोनों ही फैसले केवल नौकरशाहों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए और इसमें राजनीतिक नफे-नुकसान का आकलन नहीं किया गया था।”
जब सुरेश प्रभु जी को रेलवे मंत्रालय सौंपा गया था लगभग 2 साल पहले, तो बड़े जोर-शोर से प्रचार किया गया था कि बड़े ही योग्य व्यक्ति हैं, बहुत कार्य-कुशल हैं। रेलवे का कायाकल्प कर देंगे, बिलकुल क्रांति ला देंगे। दो साल हो गए कुछ कायाकल्प या क्रांति तो दिखी नहीं। ट्रेनें वैसे ही लेट चल रही है, आबादी के हिसाब से ट्रेनों की संख्या अभी भी कम है। हाँ यात्री किराये में जरूर क्रांति आयी है। योग्य मंत्री जी ने यात्रियों के जेब से पैसे निकालने के जरूर अनूठे, अनोखे और क्रन्तिकारी तरीके ईजाद किये हैं। ट्रेन में सुविधाओं में वृद्धि हो न हो लेकिन किराये में वृद्धि जरूर की जा रही है, नए-नए तरीके अपना के।
प्रभु जी जब रेल मंत्री बने थे तो जनता को उम्मीद थी कि रेलवे में गुणात्मक परिवर्तन होगा, गुणात्मक वृद्धि होगी। तो लो जी, प्रभु जी ने आपकी उम्मीद पूरी कर दी। कर दी है गुणात्मक वृद्धि इस बार। अरे रुकिए, रुकिए, ट्रेनों में मिलने वाली सुविधाओं में नहीं बल्कि यात्री किरायों में। गुणात्मक का आशय गुण से नहीं, गुणा से है, आंग्लभाषा के जानकार मित्रों को बता दूँ, कि ये क्वालिटेटिव नहीं मल्टीप्लिकेटिव वृद्धि है। इस बार तीन तरह के ट्रेनों में किराए की वृद्धि की गयी है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस में। वृद्धि ऐसी कि चक्कर खा जायेंगे कम पढ़े-लिखे लोग इसको समझने में।
शुरू के 10% टिकट तो बेस रेट पर ही बिकेंगे, यानि जितना किराया अभी लगता है उतना ही। लेकिन ज्योंही 10% टिकटें बिक जाएँगी, किराये में भी 10% की वृद्धि। फिर अगले 10% टिकट के लिए 10% और वृद्धि, मतलब बेस किराये पर 20% ज्यादा। फिर अगले 10% टिकट के लिए 10% और वृद्धि, मतलब बेस किराये पर 30% ज्यादा। फिर अगले 10% टिकट के लिए 10% और वृद्धि, मतलब बेस किराये पर 40% ज्यादा। सिर्फ 3 AC के टिकट के लिए इतना ही, लेकिन 2 AC, स्लीपर, चेयर कार, 2 S के टिकट के लिए फिर अगले 10% टिकट के लिए 10% और वृद्धि, मतलब बेस किराये पर 50% ज्यादा। लेकिन इसके बाद किराये में कोई वृद्धि नहीं होगी। मतलब आपको कम से कम बेस किराया और ज्यादा से ज्यादा बेस किराया का डेढ़ गुणा ज्यादा किराया देंगे पड़ेगा। उसके साथ, जो अलग-अलग चार्जेज हैं, वो सब तो देना ही है।

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