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यह भी लोकतन्त्र है !!!

Image may contain: 4 people, people smilingक्या आप जानते हैं कि 1313 तक कश्मीर में एक भी मुस्लिम नहीं था !
राजा सुहादेव ने 1313 में व्यापार के लिए 1 मुस्लिम को कश्मीर आने दिया और आज कश्मीर से हिन्दू विलुप्त हो गया। 1992 में कश्मीरी पंडितों को पलायन के लिए मजबूर किया और आज जब पुनः उनको वापस भेजने की बात होती है, सबको साम्प्रदायिकता नज़र आती है। गंगा-जमुना तहज़ीब संकट में आ जाती है। उसका कारण है, हिन्दू नकाब पहने मुस्लिम एवं ईसाईयों का सत्ता पर अधिकार होना, जो निम्न लेख से स्पष्ट होता है।  यही कारण था कि जितने बदलाव हिन्दू पूजा पद्धति में हुए है, शायद ही किसी अन्य धर्म में हुए हो। जो गम्भीर अध्ययन एवं चिन्ता का विषय है।
नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणियों का मनन करते, एक शंका थी की भारत स्वतन्त्र होने उपरान्त एक बार फिर गुलाम होगा, लेकिन 2014 चुनावों के बाद अपने वास्तविक अस्तित्व में पदापर्ण करने के साथ एक शक्तिशाली देश बनने के साथ-साथ हिन्दू की जड़ें मजबूत होनी प्रारम्भ होंगी। 2014 में जिस सख्त अधेड़ आयु के नेतृत्व में जो पार्टी सत्ता में आएगी, वह व्यक्ति 2025 तक राज्य करेगा और जिस दिशा में यह भारत को लेकर चलेगा, उसके बाद आने वाला उसी दिशा में चलकर भारत ही नहीं वरन हिंदुत्व का परचम विश्व में फहराएगा। 
इन सबका अवलोकन करने पर यही निष्कर्ष निकलकर आता है कि नोस्त्रडॉमस ने जो गुलामी की बात कही थी, वह जवाहर लाल से लेकर मनमोहन सिंह की सरकार तक भारत-- लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर, नरसिम्हा राव, एवं अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल को छोड़ -- सभी मुस्लिम हिन्दू चोला पहन राज करते रहे और हिन्दू धर्म को क्षति पहुंचाते रहे। जहाँ तक डॉ मनमोहन सिंह की बात है, वह सिख थे, हैं और रहेंगे, परन्तु जहाँ तक प्रधानमंत्री पद की बात है, वह नाम के प्रधानमंत्री थे। इस सच्चाई को शायद ही कोई झूठला सके, क्योकि वास्तव में सरकार को हिन्दू चोला ओढे ईसाई (सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी) ही चला रहे थे।   
मजे की बात यह है कि इन मुस्लिम सत्ताधारियों ने राज एवं प्रसिद्धि हिन्दू नामों से पायी एवं इनके अंतिम संस्कार भी हिन्दू रीति के अनुसार ही हुए। किसी ने लेशमात्र आपत्ति नहीं की कि यह राजनेता मुस्लिम था तो अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से नहीं हो सकता। यदि अंतिम संस्कार में अवरोध उत्पन्न किये जाते, इनकी वास्तिकता जगजाहिर हो जाती और मुस्लिम होने के समाचार मात्र अफवाह बने रहते। 
अवलोकन करिये:-
Very Interesting Story About Illicit Relationship
Reality or fiction Gandhi Nehru family life style, Many things love, ditch, Sex, loots, What not ?? Jawaharlal Nehru, Indira gandhi, Sanjay Gandhi, Rajiv
VOICEOFJUSTICE.CO.IN

 जनता को भ्रमित किया 
Image result for godse gandhiमहात्मा गाँधी भी जो राम राज्य और रामधुन के सुरों की चादर ओढ़ तुष्टिकरण की राजनीती खेल रहे थे, के ही कारण नाथूराम गोडसे ने गाँधी को उसकी वास्तविक जगह पंहुचा दिया। यदि 30 जनवरी को वध नहीं किया होता, लगभग दो/तीन माह उपरान्त इसी महात्मा गाँधी ने मौहम्मद अली जिन्नाह की बात मानकर पाकिस्तान से वाया दिल्ली से ईस्ट पाकिस्तान( वर्तमान बांग्लादेश) 16 गज चौड़ी सड़क, जिसके दोनों तरफ मुस्लिम आबादी रहे, वाली शर्त मानकर भारत के एक और बटवारे की नीव रख दी होती।  

Image result for godse gandhiजनता को वास्तविकता से दूर रखने के लिए हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबन्ध लगाकर भ्रमित किया गया। क्योकि यह दोनों संस्थाएँ भारत के बटवारे और तुष्टिकरण विरोधी थी। मुस्लिम समाज को मूर्ख बनाया कि "ये दोनों संस्थाएँ मुसलमानों की दुश्मन हैं।" इतना ही नहीं, गोडसे के कोर्ट में दिए 150 बयानों को सार्वजानिक होने से पाबन्दी लगा दी। 
बचपन से यह सुनते हुए बड़ा हुआ कि RSS एक आतंकी संगठन है जो भी उसके सदस्य होते हैं वो देश के गद्दार हैं , केवल कांग्रेसी ही देशभक्त हैं और वामपंथ गरीबों के हक लिए आवाज उठाने वाली क्रांतिकारी दल......!
Related image1925 में संघ की स्थापना के बाद 3 बार कांग्रेसियों के द्वारा प्रतिबंधित किया गया। स्वंयसेवकों को जेल में बंद कर यातनाएं दी गई, आतंकवादी कहा गया। प्रज्ञा ठाकुर पर झूठे संगीन देशद्रोही का आरोप लगा कर कई बार अमानवीय ढंग से नारको टैस्ट करवा  कर अपाहिज बना दिया, हिंदू आतंकवाद की संज्ञा दी गई। हवाला के माध्यम से देशद्रोही गैर-सरकारी संगठनों को धन इकट्ठा करवा कर विभिन्न राज्यों में लाखों आदिवासियों एवं महादलितों का इसाईकरण किया गया और किया जा रहा है। वामपंथियों के साथ मिल कर देश में नक्सलवाद को चरम पर पहुंचाया। देश की सबसे बड़ी समस्या ‘काश्मीर’ नेहरू की देन है। उन्हीं के बेवकूफी की वजह से चीन के हाथों शर्मनाक हार हुई थी। और चीन युद्ध उपरान्त इसी "मुस्लिम विरोधी", "हिन्दू आतंकवादी" संगठन को गणतंत्र दिवस परेड में सम्मिलित किया जाता है, क्यों? आखिर इतनी घिनौनी राजनीति से क्यों जनता को भ्रमित किया गया?
अवलोकन करिये :-
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https://www.facebook.com/shridevkinandanthakurjivssct/videos/1421948301197293/
यही सुनकर बचपन में मेरे अंदर कांग्रेस प्रति देशभक्ति वाली भावना जागृत हुई। हर जिले में कांग्रेस भवन हुआ करते हैं जिसमें जिला भर के देशभक्त हर हप्ते जमा होते हैं, ऐसा बचपन में अक्सर सुना करता था......!
इस विश्वास का घड़ा 20 वर्षों तक सही सलामत रहा लेकिन जैसे जैसे मैं हिन्दू धर्मग्रंथो व पत्रिकाओं का अध्ययन करता गया .... सच्चाई सामने आती गई । कांग्रेस व बामपंथ की काली सच्चाई को जान गया और जानने की इच्छा हुई RSS को...
RSS को आतंकवादी संगठन जैसा दिखाने का प्रयास पिछले नौ दशकों से लगातार जारी है। कांग्रेस आजादी के पहले भी और बाद में भी हर तरह RSS को रोकने एवं निरस्त करने के लिए जी जान से लगी है। कांग्रेस के आलाकमान को पता है जिस दिन RSS अपने पूरे शबाब में आ जाएगा- कांग्रेस पूरी तरह से खत्म, इसलिए कुछ स्वार्थ की वजह से कांग्रेस की इस योजना में साथ दिया बुद्धिपिसाच वामपंथी ने । जो भारत के इतिहास को हिन्दूओं की जगह महान मुगलों का लिखवा दिया।

कांग्रेस के चाटुकार हिंदू नेताओं ने सबकुछ जानते समझते हुए भी लालच और पद की लालसा की वजह से कभी विरोध करने का दुस्साहस नहीं कर पाए। आज १०० में से ९० हिंदू को अपने इतिहास और आदर्श के बारे में मालूम ही नहीं है। पिछली सरकार की कपटी नीतियों की वजह से झूठतंत्र को विकसित किया गया , हिन्दू आस्था व भावनाओं को खंडित किया गया। अक्सर मेरे लेखों को पढ़, वास्तविकता से अज्ञान लोग साम्प्रदायिकता से अलंकृत कर देते है। वास्तव में जो कुछ भी लिखता हूँ, पिताश्री एम.बी.एल. निगम एवं प्रेरणास्रोत अपने सम्पादकों श्री के. आर. मलकानी और प्रो वी. पी. भाटिया से मिले ज्ञान को ही आधार बनाकर लिखता हूँ और जबतक साँस और साहस है लिखता रहूँगा।
जिसके कारण हमारी वर्तमान पीढ़ी शिक्षित हुए भी वास्तविक इतिहास से अनभिज्ञ है। लेकिन आज शिक्षा और साधनों के बीच भी नव युवाओं में इतिहास और संस्कृति के प्रति उदासीनता गहराती जा रही है, अब जरूरत महसूस हो रही है झकझोर कर जगाने की, सांस्कृतिक विरासत को जागृत करने की....!
आज जो धर्म और संस्कृति की विरासत बची है, उसमें भी अधिकतर सीधे-सादे व अशिक्षित ग्रामीण जनो का योगदान है जो बिना किसी लाभ को जाने स्वस्थ दिल से धर्म और धरोहर को संभालने मे लिप्त हैं, परिवार और वंश के पुराने संस्कार और मान्यताओं को अपना कर्म और धर्म मानते चले आ रहे हैं। लेकिन जो कोई थोड़ा बहुत पढ़ लिख गए या शहर की ओर रुख कर लिए वो सारे के सारे कांग्रेसी और वामपंथी के फरेबी ज्ञान के जाल में उलझकर अपने धर्म-संस्कारों से दूर होते चले गए। खत्म हो गई वो लंगोट बांधकर रामनवमी और दुर्गा नवमी में कुश्ती का दंगल, वो लाठियो का करतब, वो भाले- बरछे को लंबी दूरी तक फेंकने की कला, वो हाथों में जोड़ की आजमाने की खेल।
आज तो हम लोग प्रगतिशील बनने में लगे हैं अपने बच्चों के साथ बैठ कर टीवी पर सास बहू के झगड़े , पाश्चात्य संस्कृति की कामुक नुमाइस या मोबाइल पर लव चैटींग में...? वक्त कहां है इस फालतु संस्कृति और धर्म के लोचे में पड़ने का..... पढाओ , पैसे कमाओ और ऐश करो। 
दिल से कहें तो इस पूरे संसार में हिन्दू समाज को जितना मुर्ख बनाया गया उतना किसी को भी नहीं बनाया गया और हिन्दू समाज इतना निष्क्रिय भी है की इसे लगातार लूटा गया।

फेसबुक पर Jitendra Agarwal ने जुलाई 16 को अपनी वॉल पर निम्न पेस्ट किया:
7 hrs
"अकबर अली अंसारी" सूफियों द्वारा भारत का इस्लामीकरण"
तवलीन सिंह जानी मानी लेखिका है। 26 फरवरी, 2017 के अमर उजाला समाचार पत्र में आप पाकिस्तान की दरगाह में हुआ आंतकवादी हमले के विषय में लिखती है।
"सिंध में पिछले दिनों जब शहबाज कलंदर की दरगाह पर आत्मघाती हमला हुआ, तो उस हमले के खिलाफ भारत से बहुत कम आवाजें सुनाई पड़ीं। उल्टे पाकिस्तान से ज्यादा आवाजें सुनाई पड़ीं कि इस्लाम का यह सूफियाना रूप उनकी विरासत है। सूफियाना इस्लाम भारत के सनातन धर्म से प्रेरणा लेकर पैदा हुआ। सूफियाना इस्लाम भारत की भी विरासत है और इसे सुरक्षित रखना आज और भी ज्यादा जरूरी हो गया है, क्योंकि वहाबी इस्लाम का हिंसक, जेहादी रूप देख कई देश इस्लाम के खिलाफ हो गए हैं। सो अगर हम यह दिखा सकें कि सूफियाना इस्लाम की वजह से भारत में सदियों से हिंदू-मुस्लिम शांति-प्यार से रह रहे हैं, तो हो सकता है कि इस्लाम को लोग नई नजरों से देखने लगें।"
तवलीन सिंह कि सूफियों के विषय में दी गई राय एकतरफा है। प्राय: हिन्दू समाज में भी यही माना जाता है कि हिंदुस्तान में जितने भी मुसलमान सूफी, फकीर और पीर आदि हुए हैं, वे सभी उदारवादी थे। हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। वे भारतीय दर्शन और ध्यान योग की उपज थे। मगर यह एक भ्रान्ति है। भारत देश पर इस्लामिक आकर्मण दो रूपों में हुआ था। प्रथम इस्लामिक आक्रमणकर्ताओं द्वारा एक हाथ में तलवार और एक में क़ुरान लेकर भारत के शरीर और आत्मा पर जख्म पर जख्म बनाते चले गए। दूसरा सूफियों द्वारा मुख में भजन, कीर्तन, चमत्कार के दावे और बगल में क़ुरान दबाये हुए पीड़ित भारतीयों के जख्मों पर मरहम लगाने के बहाने इस्लाम में दीक्षित करना था। सूफियों को इस्लाम में दीक्षित करने वाली संस्था कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस लेख में हम ऐतिहासिक प्रमाणों के माध्यम से यह जानेंगे की सूफियों द्वारा भारत का इस्लामीकरण किस प्रकार किया गया।
सूफियों के कारनामें 
हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कर उन्हें मुसलमान बनाने के लिए सूफियों ने साम-दाम, दंड-भेद की नीति से लेकर तलवार उठाने तक सभी नैतिक और अनैतिक तरीकों का भरपूर प्रयोग किया।
1. शाहजहाँ की मुल्ला मुहीबीब अली सिन्धी नामक सूफी आलिम से अभिन्नता थी। शाहजहाँ ने इस सूफी संत को हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित करने की आज्ञा दी थी[i]।
2. सूफी कादरिया खानकाह के शेख दाऊद और उनके शिष्य शाह अब्दुल माली के विषय में कहा जाता है कि वे 50 से 100 हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित करते थे[ii]।
3.सूफी शेख अब्दुल अज़ीज़ द्वारा अनेक हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित किया गया[iii]।
4. सूफी मीरान भीख के जीवन का एक प्रसंग मिलता है। एक हिन्दू जमींदार बीरबर को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। उसने सूफी मीरान भीख से सजा मांफी की गुहार लगाई। सूफी ने इस्लाम कबूल करने की शर्त लगाई। हिन्दू बीरबर मुसलमान बन गया। सूफी ने इस्लाम की सेवा में उसे रख लिया[iv]।
5. दारा शिकोह के अनुसार सूफी शेख अब्दुल क़ादिर द्वारा अनेक हिन्दुओं को मुसलमान बनाया गया[v]।
6. मीर सैय्यद अली हमदानी द्वारा कश्मीर का बड़े पैमाने पर इस्लामीकरण किया गया। श्रीनगर के काली मंदिर को तोड़कर उसने अपनी खानकाह स्थापित करी थी। हिन्दू ब्राह्मणों को छलने के लिए हमदानी के शिष्य नूरुद्दीन ने नुंद ऋषि के नाम से अपने को प्रसिद्द कर लिया। नूरुद्दीन ने श्रीनगर की प्रसिद्द हिन्दू उपासक लाल देह के हिन्दू रंग में अपने को पहले रंग लिया। फिर उसके उपासकों को प्रभावित कर इस्लाम में दीक्षित कर दिया। उसके मुख्य शिष्यों के नाम बामुद्दीन, जैनुद्दीन, लतीफुद्दीन आदि रख दिया।ये सभी जन्म से ब्राह्मण थे[vi]।
सूफियों द्वारा इस्लाम की सेवा करने के लिए मुस्लिम शासकों को हिन्दुओं पर अत्याचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जिससे हिन्दू तंग आकर इस्लाम ग्रहण कर ले।
1. अल्तमश द्वारा नियुक्त सुहरावर्दी ख़लीफ़ा सैय्यद नूरुद्दीन मुबारक ने इस्लाम की सेवा के लिए
- शरिया लागु करना।
-मूर्तिपूजा और बहुदेवतावाद को कुफ्र घोषित करना।
-मूर्तिपूजक हिन्दुओं को प्रताड़ित करना।
-हिन्दुओं विशेष रूप से ब्राह्मणों को दंड देना।
-किसी भी उच्च पद पर किसी भी हिन्दू को न आसीन करना[vii]।
2. बंगाल के सुल्तान गियासुद्दीन आज़म को फिरदवासिया सूफी शेख मुज्जफर ने पत्र लिख कर किसी भी काफिर को किसी भी सरकारी उच्च पद पर रखने से साफ़ मना किया। शेख ने कहा इस्लाम के बन्दों पर कोई काफिर हुकुम जारी न कर सके। ऐसी व्यवस्था करे। इस्लाम, हदीस आदि में ऐसे स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं[viii]।
3. मीर सैय्यद अली हमदानी द्वारा कश्मीर के सुलतान को हिन्दुओं के सम्बन्ध में राजाज्ञा लागु करने का परामर्श दिया गया था। इस परामर्श में हिन्दुओं के साथ कैसा बर्ताव करे। यह बताया गया था।
-हिन्दुओं को नए मंदिर बनाने की कोई इजाजत न हो।
-हिन्दुओं को पुराने मंदिर की मरम्मत की कोई इजाजत न हो।
-मुसलमान यात्रियों को हिन्दू मंदिरों में रुकने की इजाज़त हो।
- मुसलमान यात्रियों को हिन्दू अपने घर में कम से कम तीन दिन रुकवा कर उनकी सेवा करे।
-हिन्दुओं को जासूसी करने और जासूसों को अपने घर में रुकवाने का कोई अधिकार न हो।
-कोई हिन्दू इस्लाम ग्रहण करना चाहे तो उसे कोई रोकटोक न हो।
-हिन्दू मुसलमानों को सम्मान दे एवं अपने विवाह में आने का उन्हें निमंत्रण दे।
-हिन्दुओं को मुसलमानों जैसे वस्त्र पहनने और नाम रखने की इजाजत न हो।
-हिन्दुओं को काठी वाले घोड़े और अस्त्र-शस्त्र रखने की इजाजत न हो।
-हिन्दुओं को रत्न जड़ित अंगूठी पहनने का अधिकार न हो।
-हिन्दुओं को मुस्लिम बस्ती में मकान बनाने की इजाजत न हो।
-हिन्दुओं को मुस्लिम कब्रिस्तान के नजदीक से शव यात्रा लेकर जाने और मुसलमानों के कब्रिस्तान में शव गाड़ने की इजाजत न हो।
-हिन्दुओं को ऊँची आवाज़ में मृत्यु पर विलाप करने की इजाजत न हो।
-हिन्दुओं को मुस्लिम गुलाम खरीदने की इजाजत न हो।
मेरे विचार से इससे आगे कुछ कहने की आवश्यता ही नहीं है[ix]।
4. सूफी शाह वलीउल्लाह द्वारा दिल्ली के सुल्तान अहमद शाह को हिन्दुओं को उनके त्योहार बनाने से मना किया गया। उन्हें होली बनाने और गंगा स्नान करने से रोका जाये। सुन्नी फिरके से सम्बंधित होने के कारण सूफी शाह वलीउल्लाह द्वारा शिया फिरके पर पाबन्दी लगाने की सलाह दी गई। शिया मुसलमानों को ताजिये निकालने और छाती पीटने पर पाबन्दी लगाने की सलाह दी गई[x]।
5. मीर मुहम्मद सूफी और सुहा भट्ट की सलाह पर कश्मीर के सुल्तान सिकंदर ने अनंतनाग,मार्तण्ड, सोपुर और बारामुला के प्राचीन हिन्दुओं के मंदिरों को नष्ट कर दिया। हिन्दुओं पर जज़िया कर लगाया गया। कश्मीरी हिन्दू ब्राह्मणों को सरकारी पदों से हटाकर ईरान से मौलवियों को बुलाकर बैठा दिया गया[xi]।
सूफियों द्वारा हिन्दू मंदिरों का विनाश।
इतिहास में अनेक उदहारण मिलते हैं जब सूफियों ने अनेक हिन्दू मंदिरों का स्वयं विध्वंश किया अथवा मुस्लिम शासकों को ऐसा करने की प्रेरणा दी।
1. सूफी मियां बयान अजमेर में ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के समीप रहता था। गुजरात से बहादुर शाह जब अजमेर आया तो सूफी मियां उससे मिले। उस समय राजगद्दी को लेकर गुजरात में अनेक मतभेद चल रहे थे। मियां ने बहादुर शाह की खूब आवभगत करी और उसे अजमेर को राजपूत काफिरों से मुक्त करने की गुजारिश करी। बाद में शासक बनने पर बहादुर शाह ने अजमेर पर हमला कर दिया। हिन्दू मंदिरों का सहार कर उसने अपने वायदे को निभाया[xii]।
2. लखनौती बंगाल में रहने वाले सुहरावर्दी शेख जलालुद्दीन ने उत्तरी बंगाल के देवताला (देव महल) में जाकर एक विशाल मंदिर का विध्वंश कर उसे पहले खानकाह में तब्दील किया फिर हज़ारों हिन्दू और बुद्धों को इस्लाम में दीक्षित किया[xiii]।
सूफियों द्वारा हिन्दू राज्यों पर इस्लामिक शासकों द्वारा हमला करने के लिए उकसाना
1. चिश्ती शेख नूर क़ुतुब आलम ने बंगाल के दिनाजपुर के राजा गणेश की बढ़ते शासन से क्षुब्ध होकर जौनपर के इस्लामिक शासक सुल्तान इब्राहिम शाह को हमला करने के लिए न्योता दिया। गणेश राजा ने भय से अपने बेटे को इस्लाम काबुल करा अपनी सत्ता बचाई।
2. शेख गौस द्वारा ग्वालियर के किले को जितने में बाबर की सहायता करी गई थी[xv]।
3. शेख अहमद शाहिद द्वारा नार्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में हज़ारों अनुयाइयों को नमाज पढ़ने के बाद सिखों के राज को हटाने के लिए इस्लाम के नाम पर रजामंद किया गया[xvi]।
सूफियों का हिन्दुओं के प्रति सौतेला व्यवहार
हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के नाम से प्रसिद्द सूफियों का हिन्दुओं के प्रति व्यवहार मतान्ध और संकुचित सोच वाला था।
1. सूफी वलीउल्लाह का कहना था की मुसलमानों को हिन्दुओं के घरों से दूर रहना चाहिए जिससे उन्हें उनके घर के चूल्हे न देखने पड़े[xvii]।
यही वलीउल्लाह सुल्तान मुहम्मद गजनी को खिलाफत-ए-खास के बाद इस्लाम का सबसे बड़ा शहंशाह मानता था। उसका कहना था की मुहम्मद के इतिहासकारों ने नहीं पहचाना की मुहम्मद गजनी की जन्मपत्री मुहम्मद साहिब से मिलती थी इसीलिए उसे जिहाद में आशातीत सफलता प्राप्त हुई[xviii]।
हिन्दुओं पर अथाह अत्याचार करने वाले ग़जनी की प्रसंशा करने वाले को क्या आप हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक मानना चाहेंगे?
2. सूफी सुहरावर्दी शेख जलालुद्दीन द्वारा अल्लाह को हिन्दुओं द्वारा ठाकुर, धनी और करतार जैसे शब्दों का प्रयोग करने से सख्त विरोध था[xix]।
इस लेख के माध्यम से हमने भारत वर्ष के पिछले 1200 वर्षों के इतिहास में से सप्रमाण कुछ उदहारण दिए है जिनसे यह सिद्ध होता हैं सूफियों का मूल उद्देश्य भारत का इस्लामीकरण करना था। अजमेर के ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती, दिल्ली के निजामुद्दीन औलिया, बहराइच के सालार गाज़ी मियां के विषय में कब्र पूजा: मूर्खता अथवा अन्धविश्वास नामक लेख में विस्तार से प्रकाश डाला जायेगा। आशा है इस लेख को पढ़कर पाठकों की इस भ्रान्ति का निवारण हो जायेगा की सूफी संतों का कार्य शांति और भाईचारे का पैगाम देना था।
पर ये अजीब सा समाज आज तक भी सुधर नहीं सका है, पाकिस्तान और बांग्लादेश की तो बात ही छोड़िये; 1947 के बाद से भारत के ही कई इलाकों में हिन्दुओ को साफ़ कर दिया गया है।"
ये तमाम इलाके 100% हिन्दू इलाके थे, पर हिन्दू यहाँ से पूरी तरह ही समाप्त कर दिया गया है।
No automatic alt text available.आपको कुछ आंकड़े देते है, पूर्वी भारत का एक राज्य है मिजोरम यहाँ पर 1941 तक 1 भी इसे नहीं था, यहाँ पर ईसाइयत का नामो निशाँ नहीं था, कांग्रेस की ही लगातार यहाँ सत्ता रही। 
https://www.facebook.com/modinewshindi/videos/415021865515779/
1951 में यहाँ 0% ईसाई थे, आज यहाँ 34% ईसाई है, और हिन्दू है 29%; पूरे उत्तर पूर्व को कांग्रेस ने ईसाई बना दिया है, और असम को ये इस्लामिक बनाने पर तुली थी, असम में भी हिन्दू 60% ही है, और मुसलमान 38%, कुछ समय और कांग्रेस की सरकार रहती तो असम इस्लामी स्टेट होता इसी कांग्रेस ने कश्मीर से भी धीरे धीरे हिन्दुओ को साफ़ कर दिया, कश्यप ऋषि का बसाया हुआ कश्मीर आज इस्लामिक स्टेट है। हिन्दू हर तरफ से लुटता गया, पुरे उत्तर पूर्व में हिन्दू संस्कृति थी आज लगभग पुरे उत्तर पूर्व से हिन्दू और हिन्दू संस्कृति लगभग लुप्त हो गयी, हिन्दुओ ने सिर्फ खोया पाया कुछ नहीं।
**
पिछले दिनों सोनी चैनल पर कपिल शर्मा के शो में *श्री राहत इँदौरी साहब*
*ने एक शेर पढकर अपनी टी आर पी बढाने का प्रयास किया है*...
*उनके उसी मशहूर शे'र का जवाब है*।।
मैंने *राहत इन्दौरी साहब* के इस शेर को सुना है लेकिन इस शेर को पढ़ने का उनका अंदाज इतना तल्ख था कि हैरानी हुई और दुख भी....
*जनाब राहत इन्दौरी साहब का वह शे'र था*..
*"सभी का खून है शामिल यहाँ की मिटटी में*
*किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है "*
*उनको उन्ही की भाषा में विनम्र जवाब*:-
*खफा होते है हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी है*
*जहाँ भर से लताड़े जा चुके है, इनका मान थोड़ी है..*
*ये कृष्ण-राम की धरती, सजदा करना ही होगा*
*मेरा वतन ये मेरी माँ है, लूट का सामान थोड़ी है*
*मैं जानता हूँ, घर में बन चुके है सैकड़ों भेदी*
*जो सिक्कों में बिक जाए वो मेरा ईमान थोड़ी है*
*मेरे पुरखों ने सींचा है इसे लहू के कतरे कतरे से*
*बहुत बांटा मगर अब बस, खैरात थोड़ी है*
*जो रहजन थे उन्हें हाकिम बना कर उम्र भर पूजा*
*मगर अब हम भी सच्चाई से अनजान थोड़ी है ?*
*बहुत लूटा फिरंगी तो कभी बाबर के पूतों ने*
*ये मेरा घर है मेरी जाँ, मुफ्त की सराय थोड़ी है*
*आप मेरे पसंदीदा शायर हैं, होंगे पर मुल्क़ से बढ़कर थोड़ी हैं*
*समझे राहत इंदौरी**एक इंदौरी*
**
क्या आपको पता है कि UPA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी ने आतंकी याकूब मेमन के लिये सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका लगाई थी
वही रात 2 बजे वाली !
गोपाल कृष्ण गाँधी कांग्रेस की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हो चुके है ।
ये वही सज़्ज़न हैं जो याकूब मेमन की फाँसी रुकवाने के लिये एड़ी चोटी एक कर दिया था , और 'भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी" का नारा लगाने वाले कन्हैया कुमार को भविष्य का महान नेता बताया था।
गाँधी जी भगत सिंह के फांसी के समर्थक थे.. .और पोता गोपाल कृष्ण गांधी याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ !
यह कौन सा लोकतन्त्र या कौन से धर्म-निरपेक्षता है?

मुस्लिम साथ दे, तो हम BJP को हरा देगें
मायावती (यह कथन लोकतंत्र है)
●मुसलमान और यादव को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखानी चाहिए!
लालू प्रसाद यादव (यह कथन भी लोकतंत्र है)
●मुस्लिम और दलितो को एक हो जाना चाहिए !
केजरीवाल (यह भी लोकतंत्र है)
●मुसलमान और यादव हमारी ताकत है!
मुलायम सिंह (यह भी लोकतंत्र है)
●मुसलमान मेरे दिल मे है! मुसलमान मेरा भाई है। इस्लाम
मेरी रूह है!
ओबैसी (यह भी लोकतंत्र है)
● मुसलमान और दलित इस देश की आत्मा मे बसे है!
राहुल गांधी (यह भी लोकतंत्र है)
● सिख और मुस्लिम उनको जवाब दे!
संजय सिंह (यह भी लोकतंत्र है)
● ईसाईयो को यह जान लेना चाहिए कि अब तक उनके साथ सिर्फ धोखा हुआ है!
केजरीवाल (गोवा मे-यह भी लोकतंत्र है)
●मुसलमानो ने मिलकर इनकी (हिदुओं की) औकात दिखा देनी चाहिए!
छोटा ओबैसी (यह भी लोकतंत्र है)
●मुसलमान हमारी पार्टी की नीव है,हम इसे कैसे अलग कर सकते है! मुसलमान ही तो हमारी ताकत है!
आजम खान(यह भी लोकतंत्र है)
पर भारत मे अगर कोई हिंदुत्व की बात कर दे, हिंदुओं एक हो जाओ कह दे, तो वो सांप्रदायिक है! वह देश की जनता को भड़का रहा है, देश मे अशांति फैलाने का प्रयास कर रहा है! गंगा जमुनी संस्कृति में दरार पैदा कर रहा है! ....
वर्तमान परिस्थिति में हमारे देश में हिंदुत्व की बात करना सांप्रदायिकता कहलाता है! सांप्रदायिकता व देश मे तनाव फैलाने की कोशिश माना जाता है! बाकी कोई कुछ भी कह ले सब लोकतंत्र है!
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जुनैद भी "मुसलमान" था. अख़लाक़ भी मुसलमान" था. सलीम भी मसुलमान है ! अमरनाथ गुफा की "खोज" करने वाला चरवाहा(गप,झूट) भी मुसलमान था !
किन्तु अमरनाथ यात्री बस पर हमला करने वाले मुसलमान नहीं आतंकी थे, गोधरा में ट्रेन जलाने वाले मुसलमान नहीं बल्कि भीड़ थी, मुम्बई में हमला करने वाला कसाब मुसलमान नहीं आतंकी था ! कश्मीर से हिन्दुओ को मार मार कर भगाने वाले मुसलमान नहीं बल्कि भीड़ थी !
कहने का मतलब, मुसलमान केवल तभी मुसलमान होता है, जब वह या तो ''मज़लूम होता है या मददगार'' होता है. जब मुसलमान ''ज़ालिम होता है या आतंकवादी'' होता है तो वह मुसलमान नहीं होता !
दूसरी तरफ़ हिंदू केवल तभी हिंदू होता है जब वह गोरक्षक होता है ! जब वह गुजरात, बाबरी, दादरी में होता है ! आतंक का तो धर्म नहीं होता परन्तु आतंक का रंग ज़रूर होता है. ''भगवा आतंक'' !
वाह रे दोगलो, कौन सी पाठशाला में ये दोगलापंथी पढ़ते हो...
कौन सा मास्टर साहब ये दोगलापंथी पढ़ाता है ????
या पैदा ही ये सब पढ़ कर हुए हो ??
इन्दिरा गाँधी योगा करे तो समाजवाद, मोदी सरकार करे तो साम्प्रदायिकता !!!
अक्‍सर आप बाबा रामदेव या श्रीश्री रविशंकर जैसे आध्‍यात्मिक गुरुओं के दवाओं से लेकर एफएमसीजी कारोबार के बारे में सुनते होंगे। आपको एक ऐसे बा...
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तुम योग का विरोध करते हो,
वो विश्व को योग करवाता है.
तुम अपने परिवार की मुर्तियाँ बनवाते हो
https://www.facebook.com/hindutvakranti/videos/846405828849498/
वो शिवाजी महाराज और पटेल की मूर्तियां बनवाता है..
.तुम हज हाउस और जुम्मे की छुट्टियाँ घोषित करते हो,
वो चार धाम को जोड़नेवाली सड़के बनवाता है..
Image may contain: 2 people, text.तुम इफ्तार की पार्टियां देते हो,
वो राष्ट्रपति भवन मे हवन करवाता है..
.तुम तुष्टिकरण करते हो,
वो विकास की राह दिखाता है...
तुम जातिवाद फैलाते हो,
वो हिंदुत्व का स्वाभिमान जगाता है...
तुम उसकी राह मे कीचड़ फैलाते हो,
वो कीचड़ मे कमल खिलाता है....
महादेव की माया है...
मोदी मोदी छाया है..
कर्मचारियों और नेताओं की नियुक्ति में भेदभाव क्यों?
जब कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों को पचास वर्ष की उम्र में निकाले जाने पर सरकार द्वारा विचार किया जा सकता हैं तो क्यों नहीं निम्नलिखित विचार जनहित में किया जाए।
*1-* नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाए ?
*2-* क्यों नहीं नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाए ?
*3-* क्यों नहीं नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य किया जाए ?
*4-* क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए LAW की डिग्री अनिवार्य हो, स्वास्थ्य मंत्री बनने के लिये MBBS की डिग्री अनिवार्य हो, समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हो, मानव संसाधन के लिए M.Ed. की डिग्री अनिवार्य हो, वित्त मंत्री को अर्थशास्त्री होना अनिवार्य हो इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किया जाए।
*5-* क्यों नहीं फ्री का डीजल, पेट्रोल, फोन की सुविधा, हवाई सुविधा, रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होता हैं उसमें कटौती की जाए।
*6-* क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक किये जाए।
*7-* क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन बंद किया जाय जिस पर सरकार प्रति वर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं ।
*8-* क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद किया जाए, जिस पर देश का करोड़ों रूपये नुकसान होता हैं ।
*9-* क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं ? यह कौन सा मानक हैं ? नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश हैं क्या ? जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ?
*देश को कितना गर्त में आप नेताजी लोग ले जायेंगे?* जब स्वयं की तनख्वाह लाखों में करते हैं तो सभी पार्टियों के कोई भी नेता विरोध नहीं करता सभी मिलकर मेज थपथपा देते हैं । क्या देश पर आप की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार नहीं पडता ? गजब की सोच हैं आप नेताओं की जब कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता तो यह उपरोक्त बिन्दुओं पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता हैं !!

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सबसे(नेताओ से, मुस्लिम संगठनो से, हिन्दू संगठनों से) शांतिपूर्ण मांग।
दर्द उनका भी तो महसूस करो।
कश्मीरी हिन्दू भी तो इंसान थे, हमारी कलम भारतीय के साथ है, उनका भी अधिकार उन्हें मिलना चाहिए।
अंबेकराइट पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विजय मानकर की इस तस्वीर का इस्तेमाल यूट्यूब से किया गया है। सोशल मीडियो पर इन दिनों एक वीडियो त...
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Farida Khanam बिल्कीस बानो , जाकीया जाफरी का नाम आप ना जानते हों ये संभव नही ! लेकिन क्या आप गिरीराज किट्टु का नाम जानते है ? जिसे कश्मीरी हिन्दू होने सजा पुरी भीड ने जब तक दी थी तब रेप होते होते वह मर नहीं गई ? 64 हिन्दू औरतों को अस्मत लुटने के बाद जिन्दा जलाया गया !
Image may contain: 1 person, textआपने अखलाख का नाम भी सुना होगा यह भी सुना होगा की कीस तरह मंदिर से उसके खिलाफ जहर उगला गया ! लेकिन क्या आप टिकालाल टपलु और कश्मीर की उन मस्जिदों से उगते जहर के बारे में जानते हैं जहाँ से नारे लग रहे थे " रूस ने हारी बाजी है अब हिन्दू जात की बारी है " ?
मस्जिदें जहर उगलती रही और उस जहर से निलकंठ गंजु जैसे हजारों दलितों के भी घर जलाते रहे उनकी औरतों से बलात्कार होते रहे ! निलकंठ गंजु की लाश कई दिनों तक कश्मीर की सड़कों पर पड़ी रही और उठाने तक का साहस ना कर सका ! वो सामाजिक दलित कार्यकर्ता थे
कश्मीर चला है पाकिस्तान , हिन्दू आदमीयों कदमों पर, हिन्दू औरतें बांहो मे !
हजारों हजार कट गये ! जिस घाटी के सारे राजा हिन्दू रहे वो हिन्दूओ की लाशों से पट गई , हिन्दू विहीन हो गई !
लगभग हिन्दुस्तान के सभी राज्यो मे मुस्लिम आबादी उतने ही प्रतिशत है जितने प्रतिशत कश्मीर मे हिन्दू थे ! लेकिन इतने अत्याचारों के बाद भी साडे पाॅच लाख हिन्दू मे कोई एक आतंकवादी नही बना , आतंकी संगठन बनाना तो दुर की बात है ! कन्हैया कुमार , जे एन यु मे कश्मीर मांगे आजादी के नारे लगाते कश्मीरी , रोहित वेमुल्लाह के नाम को भुनातें वामपंथी कभी इस और भी ध्यान देंते तब सामाजिक न्याय की बात होती !
हजारों हिन्दू संगठन तिस्ता सितलवाड जैसे एन जी औ गुजरात की बेवाऔ की लड़ाई लड रहे है और एक मुस्लिम संगठन नही जो आज भी विरां पडे कश्मीर मे कश्मीरीयों के आवासों मे उन्हें बसाने की बात कर सके , उनकी सामाजिक न्याय मे बात कर सके !
तिस्ता सितलवाड हिन्दू नही - फरीदा खानम मुस्लिम नही !
​​​​​"तुलनात्मक अध्ययन"👇​​​​
​​​​​एक समय था कि अफगानिस्तान में बौद्ध मंदिरों को तोपों से उड़ा दिया गया था और आज वहां के राष्ट्रपति हमारे मुल्क के इतने पक्के दोस्त हैं कि हमारे देश पे आतंकवादी हमला हुआ तो उन्होंने दक्षेस सम्मलेन में पाक जाने से मना कर दिया।
​​​​​एक समय था जब ईरान हमारी एक नहीं सुनता था, आज उन्ही ने भारत को *चाबहार* बंदरगाह बनाने और ईरान में अपनी फौजें रखने की इज़ाज़त दे दी।
​​​​​एक समय था कि नार्थ ईस्ट में terrorists हमला करके म्यांमार भाग जाते थे। आज वहां की सरकार के सहयोग से इंडियन आर्मी ने वहीँ जा के उनके terrorist camps तबाह कर दिए।
एक​​​​​ समय था जब खाड़ी देश पाक का साथ देते थे। दाऊद बरसों तक दुबई में शरण लिए रहा। आज सऊदी अरब ने दाऊद की संपत्ति ही जब्त कर ली।
एक  समय  था जब खाड़ी देश भारत को कमजोर और गरीब समझते थे, आज अचानक क्या हुआ जो उन्हीने भारत के PM के आगमन पे अपने यहाँ पहला हिन्दू मंदिर बनाने के लिए जमीन दे दी।
आज अचानक  क्या हुआ जो हमारी 26 जनवरी की परेड में UAE का फौजी दस्ता शामिल हुआ।
👉​​​​​आज अचानक क्या हुआ जो भारत में इतनी हिम्मत आ गयी कि चीन के अरुणांचल के बॉर्डर में सड़कें बना ली, हवाई पट्टी बना ली, 100 मिसाइल भी तैनात कर दिए और टैंक की डीवीजन पोस्ट कर दी।
👉​​​​​आज अचानक क्या हुआ जो USA के नवनिर्वाचित प्रेजिडेंट ने सबसे पहले भारत के PM को फोन करके आभार व्यक्त किया ।
👉​​​​​आज अचानक क्या हुआ जो ऑस्ट्रेलिया, इंडिया को यूरेनियम देने को राजी हो गया।
👉​​​​​आज अचानक जापान ने इंडिया के साथ युद्धाभ्यास किया ।
*प्रश्न*- क्या भारत में *नरेंद्र मोदी* के आलावा वर्तमान नेताओं जैसे कि लालू, मुलायम, अखिलेश, सोनिया, ममता, केजरीवाल आदि में कोई नेता है इस कैलिबर का जो इस प्रकार विश्व को झुका ले।
देशभक्ति या देशभक्ति स्वाँग?

Image may contain: 2 peopleराहुल गांधी और कांग्रेस  का  षड्यंत्र अब बेनक़ाब हो चुका है । देखिये सबूत :-
1.JNU में भारत विरोधी नारे लगे तो राहुल वहाँ पहुँच गए  उनका साथ देने और उसका नतीजा, ये आग दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल की जाधोपुर यूनिवर्सिटियों तक पहुँची।
2.पाकिस्तान से LOC पर टेंशन चल रही है जनहानि और धनहानि हो रही है, उसको और भड़काने व मोदी सरकार को हटाने के लिए इन्होंने पाकिस्तान से मदद माँगी और अपने आदमी पाकिस्तान भेजे ताकि देश को अस्थिर किया जा सके ।
3.अब चीन से टेंशन चल रही है भारतीय सेना ने 7 जुलाई को चीनी बॉर्डर पर टेंट लगाये तो 8 जुलाई को ये खुद गुपचुप चीनी दूतावास जा पहुँचते हैं, जिसका नतीजा, 9 जुलाई को ही चीन ने POK के रास्ते भारत में घुसने की धमकी दे डाली।
4.10 जुलाई को ही अमरनाथ यात्रियों पर आँतकीं हमला और 7 महिलाओं व बच्चों की बर्बर हत्या ।
समझ नहीं  आता क्या चाहता है ये और इसकी पार्टी इस देश से ? क्यों ये देश व मोदी सरकार को अस्थिर करने की साज़िश रच रहे हैं ? क्यों ये देश को दुबारा ग़ुलामी की तरफ़ धकेलने की कोशिश में लगे हैं ?
और ऐसा अजीब प्राणी है हिन्दू, की आज तक इस कांग्रेस को वोट भी दे देते है। 
वैसे लिखने को बहुत है, लेकिन पाठक इतने लम्बे लेख को पढ़ते-पढ़ते थक न जाएं, इसलिए अभी विराम दे रहा हूँ। 

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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