आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुजरात में मिली भाजपा की जीत को लाज बचाने वाली जीत करार दिया है। जीत के संदर्भ में भाजपा पर तंज कसते हुये ममता बनर्जी ने कहा है कि यह जीत भाजपा की नैतिक हार को दर्शाता है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणामों का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दूरगामी असर होगा।
| हिन्दुओं के इन मकानों को किसने तोडा? |
विजयवर्गीय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दुख होगा कि बीजेपी दोनों राज्यों में जीती है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हमारी जीत का पूरे देश पर असर होगा। इसका बंगाल की राजनीति पर भी दूरगामी असर पड़ेगा। भाजपा की जीत को नैतिक हार बताने वाली ममता के ट्वीट पर वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह चाहती थीं कि गुजरात में भाजपा हार जाये, इसलिए भाजपा के खिलाफ ट्वीट करने के बजाये, ममता बनर्जी को दुख जताना चाहिये कि हम चुनावों में जीते। पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि ममता को गुजरात चुनावों पर विचार प्रकट करने के बजाये पश्चिम बंगाल पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
वीरभूम में विधायक अनुब्रत मंडल की अगुवाई में होगा ब्राह्मण सम्मलेन का आयोजन
गुजरात चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद तथा पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते जनाधार को रोकने के लिये तृणमूल कांग्रेस ने अब राज्य में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन करने का फैसला किया है।ममता को अब आभास होना शुरू हो गया है कि जो कांग्रेस एक दशक के अपने कार्यकाल में हिन्दू आतंकवाद बताकर हिन्दुओं को बदनाम करती रही, और दूसरी ओर जो राहुल गाँधी अमेरिका में जाकर कहता है कि "हिन्दू आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है", वही राहुल गुजरात में जनेऊ पहन मन्दिरों में माथा टेक भाजपा के हिन्दू कार्ड को चुनौती देने में कुछ सीमा तक सफल हुए। राहुल की गिरगिट की तरह रंग बदलने की शैली ममता को भी भा गयी है। कल तक तुष्टिकरण कर मुस्लिम द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे जानलेवा हमलों को नज़रअंदाज़ कर रही थी, अब वही ममता हिन्दू वोट की खातिर बंगाल में ब्राह्मण सम्मलेन आयोजित करने जा रही है।जीती बीजेपी, हारी कांग्रेस, डरी टीएमसी
क्या बंगाल का ब्राह्मण समाज उस सम्मलेन में सम्मिलित होने से पूर्व ममता से पूछेगा:--1. तुम्हारे शांतिप्रिय दंगाइयों द्वारा ली गयी हिन्दुओं की मौत पर क्यों सूरदास बन बैठी थी?
2. तुम्हारे शांतिप्रिय दंगाइयों द्वारा जिन माँओं की गोद सूनी हुई, क्यों अब तक कोई कार्यवाही नहीं की?
3. आखिर किसके इशारे पर मुस्लिम कट्टरपंथी हिन्दू मन्दिरों और घरों को जला रहे थे?
4. हिन्दुओं पर जानलेवा हमला करने वालों पर कार्यवाही क्यों नहीं की?5. मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा तोड़े गए मन्दिरों का सरकार ने जीणोंद्वार क्यों नहीं किया?
7. जब हिन्दुओं पर जानलेवा हमले हो रहे थे, उनके मन्दिरों को तोडा जा रहा था, तब धर्म-निरपेक्षता कौन-सी कब्र में विश्राम कर रही थी?
8. गौ-हत्या का समर्थन करने वाली ममता में उबजा ब्राह्मण प्रेम कौन से धर्म-निरपेक्ष नाटक का भाग है?9. ममता बताएं उनके अब तक के राज में हिन्दुओं पर कितने हमले हुए, और कितने हमलों को आपकी पुलिस ने रजिस्टर किया और उनमे से कितनों पर कार्यवाही कर दोषियों को दण्डित किया गया?
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| किसने पनाह दी थी, बाहरी दंगाइयों को? |
10. ममता जी हिन्दुओं पर जितने जानलेवा हुए और मन्दिरों को जलाया/तोडा गया, यदि उसका 1%भी हिन्दुओं ने मुसलमानों के विरुद्ध किया होता, क्या आप और आपकी सरकार ऐसे ही हाथ पर हाथ रखे बैठी होती? यदि नहीं, फिर अब क्यों हाथ पर हाथ रखे बैठी रहीं? क्या इसी का नाम धर्म-निरपेक्षता है?
11. अपने मुस्लिम प्रेम की खातिर क्यों दुर्गा-पूजन का विरोध किया गया?12. क्यों अपने मुस्लिम-प्रेम की खातिर दुर्गा विसर्जन पर पाबंदियाँ लगाई गयीं?
| हिन्दुओं के विरुद्ध हो रहे अन्याय का विरोध करती भाजपा नेत्री रूपा गांगुली |
14. क्या ब्राह्मण सम्मेलन करवाने से आपका मुस्लिम वोट घिसक नहीं जाएगा?
15. इतने वर्ष साम्प्रदायिकता का नंगा नाच खेलने वालों को हिन्दू (ब्राह्मण) कैसे याद आ गए?
इस कड़ी में वीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक अनुब्रत मंडल की अगुवाई में बंगाल में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो भाजपा से भयभीत तृणमूल कांग्रेस अब बंगाल में हिन्दू वोट अपनी ओर खींचने के लिये ऐसा कर रही है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के विधायक अनुब्रत मंडल ने कहा है कि पार्टी की ऐसी कोई मंशा नहीं है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस ने मौलवी सम्मेलन का आयोजन किया था। उसी तर्ज पर ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन होगा। श्री मंडल ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस सभी धर्मों का सम्मान करती हैं। हमारे यहां ईद भी मनाया जाता हैं और दुर्गा पूजा भी धूमधाम से संपन्न होती है। एेसे में हमने राज्य में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन करने का निर्णय लिया है।
2019 के लिये बिल्ली के गले में बंध गयी घंटी
मालूम हो कि 34 वर्षों के वामपंथी शासन का अंत करने वाली तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी की गुजरात चुनाव पर पैनी नजर थी. गुजरात चुनाव के नतीजों ने सिर्फ तृणमूल की ही नहीं वामपंथियों की भी चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि ममता से लेकर पश्चिम बंगाल के वामपंथी नेता भी मान रहे थे कि 22 वर्षों की व्यवस्था विरोधी कारक, जीएसटी व नोटबंदी से भाजपा नहीं ऊबर पायेगी और पीएम मोदी के अपने ही गृह राज्य में हार के बाद से उनका विजय रथ रूक जायेगा. चुनाव की घोषणा होने के साथ ही ममता बनर्जी ने कहा था कि भाजपा वहां नैतिक रूप से हार चुकी है. सोमवार को नतीजे आये और गुजरात चुनाव का नतीजा भाजपा के पक्ष में चला गया. हालांकि, पिछले चुनाव के मुकाबले सीटें कम होने को ममता ने मुद्दा बनाते हुये इसे भाजपा की नैतिक हार करार दे दिया. साथ ही कहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव के लिये बिल्ली के गले में घंटी गुजरात में बंध गई. उन्होंने इसे भाजपा की लाज बचाने वाली जीत करार दिया है और गुजरात की जनता को संतुलित मतदान के लिए शुभकामनाएं दी है.
भाजपा के चाणक्य अमित शाह की है बंगाल पर नजर

अमित शाह का फाइल फोटो
गौरतलब है कि ममता को यह भली भांति पता है कि गुजरात व हिमाचल प्रदेश के चुनाव संपन्न होते ही भाजपा का बंगाल में प्रभाव बढ़ेगा. अगले साल देश के अन्य चार राज्यों में चुनाव होने हैं. साथ ही बंगाल में भी 2021 में चुनाव होने हैं. इससे पहले 2019 में बंगाल में लोक सभा चुनाव है. जबकि जल्द ही बंगाल में पंचायत चुनाव हैं. इस स्थिति में बंगाल में भी भाजपा के चाणक्य और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पैनी नजर रहेगी. बंगाल में भाजपा अपने प्रभाव और जनाधार को बढ़ाने के लिये पूरी ताकत झोंक रही है. एक समय ममता बनर्जी के राइट हैंड माने जाने वाले मुकुल राय को भी भाजपा ने अपने खेमे में कर लिया है. बंगाल में भाजपा ने कांग्रेस और वामफ्रंट को पछाड़ कर तृणमूल के मुख्य विरोधी दल के रूप में अपना स्थान बना लिया है. गुजरात व हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद से ही बंगाल भाजपा के नेता और कार्यकर्ता काफी उत्साहित हैं.


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