
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
दिल्ली सरकार के अधिकारों को ले कर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद केजरीवाल सरकार ने राशन की होम डिलीवरी योजना को शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। इस योजना को शुरू करने के लिए उपराज्यपाल की मंजूरी भी नहीं ली गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जुलाई 6 को खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया है कि वह राशन उपभोक्ताओं को राशन की होम डिलीवरी करने की व्यवस्था करे। वहीं उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस योजना की प्रगति के संबंध में उन्हें रोज रिपोर्ट दें। इस संबंध में इस संबंध में उन्होने ट्विट के जरिए आम लोगों को भी जानकारी दी।
उपराज्यपाल ने आपत्ति जताई थी
इस योजना को ले कर उपराज्यपाल ने पहले भी आपत्ति जताई थी. 6 मार्च को कैबिनट से हरी झंडी मिलने के बाद भी इस याजना की फाइल राजनिवास में पड़ी हुई है। इस योजना के लिए उपराज्यपाल ने अब तक स्वीकृति नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मुख्यमंत्री की ओर बना उपराज्यपाल की अनुमति के इस योजना को शुरू करने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस योजना को ले कर फिर विवाद की स्थिति बन सकती है.
Approved Doorstep Delivery of Rations. Over ruled all objections to the proposal. Directed Food Dept to start its implementation immediately.
दिल्ली सरकार की ओर से राशन की होम डिलिवरी की योजना शुरू करने के पीछे तर्क दिया गया था कि जिन लोगों के लिए राशन उपलब्ध कराया जाता है उन तक पहुंच नहीं पाता. बिचौलिए बीच में ही राशन पर हाथ साफ कर लेते हैं. ऐसे में सरकार ने आम लोगों के घर तक राशन पहुंचाने की योजना बनाई थी. दिल्ली के राशन उपभोक्ताओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से राशन की होम डिलीवरी करने की दिल्ली सरकार की योजना को पहली बार मार्च महीने में कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी. वहीं इस मौके पर घोषणा की गई थी कि आम उपभोक्ताओं के लिए राशन पाने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं रहेगी. दिल्ली के कई इलाकों से शिकायतें आई थी कि आधार कार्ड न होने से राशन नहीं मिल पा रहा है. इसके बाद यह निर्णय लिया गया.
क्या है योजना
दिल्ली सरकार की ओर से जब इस इस योजना की घोषणा की गई तो कहा गया कि आम उपभोक्ताओं का राशन बिचौलिए चोरी कर लेते हैं. ऐसे में सरकार ऐसी योजना ला रही है कि जिसके तहत गेहूं, आटा व चावल पैकेट में मिलेगा, इससे मिलावट की गुंजाइश नहीं होगी। राशन की डिलीवरी करने वाला, उपभोक्ता के घर समय ले कर राशन पहुंचाने जाएगा. लेकिन इस योजना पर उपराज्यपाल ने कई तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए रोक लगा दी थी.
'वो दिन दूर नहीं जब केजरीवाल जेल पहुंचेंगे'--मनोज तिवारी
दिल्ली सरकार ने अपनी महत्वपूर्ण डोर स्टेप डिलीवरी योजना को लागू करने के लिए जून 6 को अपने अधिकारियों को निर्देश जारी कर तत्काल सेवा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जिसको लेकर भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अब अपने अनुसार बना लिया है और अपने हिसाब से संविधान चलाना चाहते है। डोर स्टेप योजना में कई खामियां हैं, जिसे लेकर उपराज्यपाल ने रोक लगायी थी।
तिवारी ने कहा कि केजरीवाल टीवी को देखकर फैसले ले रहे हैं और यदि ऐसे ही फैसले लिए गये तो वो दिन दूर नहीं जब केजरीवाल जेल पहुंचेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि संविधान के अनुसार दिल्ली सरकार की कैबिनेट कोई फैसले लेती हैं तो उपराज्यपाल उसे मानेंगे ही। लेकिन केजरीवाल ने संविधान शब्द हटा दिया और अब अपनी मनमानी चला रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा गया है कि अराजकता बर्दाश्त नहीं, संसद का कानून सर्वोच्च है और पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल सकता।
तिवारी ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल खुद नौकरशाह रहें हैं और उन्हें कानून पढ़कर फैसले लेने चाहिए लेकिन केजरीवाल फैसले को पढ़कर कार्य नहीं कर रहें हैं और टीवी को देखकर फैसले ले रहे हैं।
तिवारी ने यह भी कहा है कि डोर स्टेप योजना के तहत प्राईवेट कंपनी को बढ़ावा मिलेगा। राशन वितरण प्रणाली में पहले भी केजरीवाल सरकार पर स्कूटर से राशन पहुंचाने के भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं।
क्या भाजपा सत्ता में आने पर केजरीवाल को जेल भेज पाएगी?
दिल्ली विधान सभा चुनावों के दिनों में हर जलसे में केजरीवाल जनता को तत्कालीन मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 सबूत दिखाते फिरते थे, क्या हुआ? कुछ नहीं, क्यों कथनी और करनी में बहुत अन्तर होता है। सत्ता में आने पर क्या कार्यवाही हुई? ठीक उसी भाँति दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सांसद मनोज तिवारी का केजरीवाल को जेल होने की गीदड़ धमकी प्रतीत होती है। बल्कि ऐसा लगता है, जैसे छोटे बच्चों में जब किसी बात को लेकर मन-मुटाव होता है, जब बच्चे एक-दूसरे को डराने के लिए कहते हैं कि "देख मेरी बात मान ले, नहीं तो घर तेरी शिकायत कर दूंगा।" होता क्या है, कोई बच्चा किसी के घर जाकर एक शब्द भी नहीं बोलता। ठीक उसी तरह केजरीवाल-शीला दीक्षित-मनोज तिवारी की स्थिति है। जिस तरह केजरीवाल ने तत्कालीन के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की, वैसे ही यदि भाजपा या कांग्रेस सत्ता में आने पर केजरीवाल के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने वाले।
भाजपा और कांग्रेस को विरोध करना केजरीवाल पार्टी से सीखना चाहिए। जो अपनी अनुचित माँग को भी जनता में उचित मँगवाने के लिए शोर मचाते हैं, धरना देते हैं। भाजपा बस बहुत से बहुत आधा किलोमीटर तक प्रदर्शन कर कागज के शेर बन रही है। प्रदर्शन भी ऐसा जनता को पता ही नहीं। जिस कारण जनता के दिलो-दिमाग में भाजपा का विरोध शून्य हो रहा है। और केजरीवाल प्रभावी हो रहे हैं। यह कटु सत्य है, जिसे भाजपा को समझना होगा। क्योंकि दिल्ली में केजरीवाल द्वारा इतने अनैतिक काम हुए हैं, जिन पर भाजपा इस सरकार के विरुद्ध बहुत जबरदस्त माहौल बना सकती थी, लेकिन प्रदर्शन होता है यानि "जंगल में मोर नाचा किसने देखा", ऐसे प्रदर्शन से क्या फायदा। प्रदर्शन रामलीला मैदान से, राजघाट से, फ़िरोज़शाह कोटला से या शांतिवन से केजरीवाल निवास अथवा कार्यालय तक हो। जनता को ज्ञात हो, कि कोई राजनीतिक दल किसी सरकार की गलत नीतियों के विरुद्ध कुछ कर रही है, जनता के हित में कुछ कर रही हैं।
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20 विधायकों की सदस्यता क्या हुआ? राशन कार्ड बनाने वालों का क्या हुआ? और भी अन्य विधायकों के विरुद्ध क्या हुआ? कहावत है "you show me the man, I will show you the rule(s)" जो नेताओं पर शत-प्रतिशत सटीक बैठती हैं। चलते रहते हैं केस, और नेताजी अपनी नेतागिरी करते रहते हैं। काश ! यही अपराध किसी आम नागरिक ने किए होते, उसका जीना हराम हो जाता। जनता भी मुर्ख है, जो राशन कार्ड बनाने वालों के आगे-पीछे चक्कर लगाती रहती है। जनता आज भी भ्रष्टाचार झेल रही है।
क्या भाजपा सत्ता में आने पर केजरीवाल को जेल भेज पाएगी?
दिल्ली विधान सभा चुनावों के दिनों में हर जलसे में केजरीवाल जनता को तत्कालीन मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 सबूत दिखाते फिरते थे, क्या हुआ? कुछ नहीं, क्यों कथनी और करनी में बहुत अन्तर होता है। सत्ता में आने पर क्या कार्यवाही हुई? ठीक उसी भाँति दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सांसद मनोज तिवारी का केजरीवाल को जेल होने की गीदड़ धमकी प्रतीत होती है। बल्कि ऐसा लगता है, जैसे छोटे बच्चों में जब किसी बात को लेकर मन-मुटाव होता है, जब बच्चे एक-दूसरे को डराने के लिए कहते हैं कि "देख मेरी बात मान ले, नहीं तो घर तेरी शिकायत कर दूंगा।" होता क्या है, कोई बच्चा किसी के घर जाकर एक शब्द भी नहीं बोलता। ठीक उसी तरह केजरीवाल-शीला दीक्षित-मनोज तिवारी की स्थिति है। जिस तरह केजरीवाल ने तत्कालीन के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की, वैसे ही यदि भाजपा या कांग्रेस सत्ता में आने पर केजरीवाल के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने वाले।
| अगर कोई नागरिक ऐसे करे, क्या होती कार्यवाही? वैसे तो जनता पर कोई कार्यवाही नहीं होती। फ़ौरन नेताओं के फोन पहुँच जाते हैं। केवल वही गिरफ्त में आते हैं, जो तुरन्त नेताओं तक नहीं पहुँचते। |
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