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अटल जी के वनलाइनर्स थे मशहूर, "मैं औरों के दलदल में अपना कमल खिलाता हूं"

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को (ग्वालियर) मध्यप्रदेश भारत में हुआ। इनके पिता का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था।हरदिल अजीज अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता का एक कारण उनकी वाकपटुता और विनोदी स्वभाव भी था। संसद और जनसभाओं में उनके कहे "वन लाइनर" दशकों बाद भी लोगों के जेहन में हैं।
ऐसे ही एक मौके पर जब उनसे पूछा गया कि भाजपा में ही दो दल (वाजपेयी और आडवाणी के धड़े) हैं तो à¤…टल बिहारी वाजपेयी को घर पर खाना बनाने का शौक था।उन्होंने तपाक से कहा-"मैं किसी दलदल में नहीं हूं। मैं औरों के दलदल में अपना कमल खिलाता हूं।"
बेजोड़ वक्ता वाजपेयी ने राजनीतिक तंज भी बड़े ही मजेदार तरीके से किए। अक्सर में उन्हें कठिन सवालों में उलझाने की कोशिश होती थी, लेकिन वह चतुराई से दिए जवाब से सवाल की ही हवा निकाल देते थे।
ये है सोनिया गांधी के साथ अटल जी की दुर्लभ तस्वीर...
ये है सोनिया गांधी के साथ अटल जी की दुर्लभ तस्वीर
तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संसद में उनकी सरकार को भ्रष्ट, निकम्मा और अक्षम बताया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सारे शब्द सामने डिक्शनरी रखकर निकाले गए हैं।
एक दफा लोजपा नेता रामविलास पासवान ने (तब कांग्रेस के सहयोगी दल) राम मंदिर के मुद्दे पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा राम के बारे में बातें करती है लेकिन उसमें राम नहीं है, जबकि वह मेरे नाम में हैं। इस वाजपेयी ने तुरंत कहा-"पासवान जी, हराम में भी राम होता है।" रामविलास पासवान की पार्टी अब भाजपा का सहयोगी दल है।
अवलोकन करें:--


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24 अक्‍टूबर 1998 को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्‍वर्णिम चतुर्भुज…
इसी तरह पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने एक दफा कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के बिना अधूरा है। इस पर वाजपेयी ने कहा-"पाकिस्तान के बगैर भारत भी अधूरा है।"
उनके एक अन्य प्रसिद्ध वनलाइनर में उन्होंने सरकार गिराने को लेकर कहा-"लोकतंत्र वह है जहां दो बेवकूफ लोग एक ताकतवर इंसान को हरा देते हैं।"
इसी तरह अपने संबंध में उन्होंने एक बार कहा था-"मेरे पास बाप-दादा की संपत्ति नहीं है, लेकिन मेरी मां का आशीर्वाद है।"

atal bihari vajpayee and indira gandhiइंदिरा ने भाषण देने के तरीके पर कसा तंज, तो अटल जी ने दिया था ऐसा जवाब

पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज नेता श्रीमती इंदिरा गांधी फायरब्रांड नेत्री मानी जाती रहीं। वे इतनी तेजतर्रार थीं कि उनके सामने सामान्यत: कोई नेता बोलने की हिम्मत नहीं करता था। मगर उनके दौर के विपक्षियों में अटलबिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता रहे, जो अपनी तीक्ष्ण बुद्धि, विराट अनुभव और गजब की हाजिरजवाबी से इंदिराजी को भी चुप कर देते थे।
ऐसा ही एक बार हुआ जब इंदिराजी ने अटलजी पर तंज कसा। बदले में अटलजी ने ऐसा जवाब दिया कि इंदिराजी ने फिर कभी अटलजी पर चुटकी नहीं ली।
किस्सा तब का है जब इंदिराजी प्रधानमंत्री थीं। तब अटलजी अपने भाषणों से जनसभाओं में गजब भीड़ जुटाया करते और लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। वे भाषण को प्रभावी बनाने के लिए अपने हाथों की लय का खूब इस्तेमाल करते।
इस पर एक बार इंदिरा गांधी ने कहा, 'अटलजी, आप भाषण देते समय इस तरह हाथ हिलाते हैं, जैसे जर्मनी का तानाशाह हिटलर हिलाया करता था"।
इस तंज में बहुत-सी बातें छुपी हुई थीं। अटलजी इसे ताड़ गए। हाजिरजवाब अटल तुरंत बोले- 'तो क्या कभी आपने किसी को पांव हिलाकर भाषण देते हुए सुना है?" अटलजी के इस जवाब से इंदिरा सन्न रह गईं। ऐसा करने का साहस भी उन्हीं में था।
उनका नेतृत्व, दूरदर्शिता, परिपक्वता और वाकपटुता ने उन्हें अलग पहचान दी--राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ट्वीट किया- हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। उनका नेतृत्व, दूरदर्शिता, परिपक्वता और वाकपटुता ने उन्हें अलग पहचान दी। अटलजी का विराट व्यक्तित्व रहा है और हम सबको उनकी कमी महसूस होगी।
Extremely sad to hear of the passing of Shri Atal Bihari Vajpayee, our former Prime Minister and a true Indian statesman. His leadership, foresight, maturity and eloquence put him in a league of his own. Atalji, the Gentle Giant, will be missed by one and all #PresidentKovind
— President of India (@rashtrapatibhvn) 16 August 2018
वह वास्तव में अजातशत्रु थे-- वैंकैया नायडू, उपराष्ट्रपति 
He was a real ‘Ajatha shatruvu’ (One who has no enemies) who got along with people from all sections. He was the first non-congress PM, an able leader and provided a stable government. He practiced politics of principles and infused values into politics.
उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने ट्वीट किया- वह वास्तव में अजातशत्रु थे, जिन्होंने सभी धड़ों के लोगों को अपने साथ किया। वह पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री और योग्य नेता थे, जिन्होंने स्थिर सरकार दी। उन्होंने सिद्धांतों की राजनीति की और राजनीति में मूल्यों को भरा।
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर PM मोदी ने किया ट्वीट- 'नि:शब्द हूं, शून्य में हूं'
मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। --नरेन्द्र मोदी, प्रधानमन्त्री  
अटल जी के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि- अटल जी आज हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दुःख सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति !
मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा- ''मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है।''
अटल जी आज हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दुःख सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति !— Narendra Modi (@narendramodi) 16 August 2018
अटल जी ने अपने विचारों और सिद्धांतों से भारतीय राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी है।--अमित शाह 
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट किया- जहां एक तरफ अटल जी ने विपक्ष में जन्मी पार्टी के संस्थापक व सर्वोच्च नेता के तौर पर संसद और देश में एक आदर्श विपक्ष की भूमिका निभाई वहीं प्रधानमंत्री के रूप में देश को एक निर्णायक नेतृत्व भी प्रदान किया। अटल जी ने अपने विचारों और सिद्धांतों से भारतीय राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी है।
विचारधारा के लिए समर्पित एक स्वयंसेवक व संगठन के एक अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में अटल जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। एक ऐसे विरले राजनेता,प्रखर वक्ता,कवि और अभिजात देशभक्त,भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन न सिर्फ भाजपा बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
अटलजी के निधन से हुए दुःख को शब्दों में बयान नहीं की जा सकता--राजनाथ सिंह 
Pained beyond words at the demise of Shri Atalji. He had cherished the ideal of a developed and powerful India in which all persons lived together in unity, peace and harmony.
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया- अटल बिहारी के निधन से हुए दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। उन्होंने शक्तिशाली और विकसित भारत के विचार को पोषित किया, जिसमें सभी लोग एकता, शांति और सौहार्द के साथ रह सकें।
आज एक राजनीतिक युग का अंत हो गया--शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमन्त्री, मध्य प्रदेश 
मैं परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। हम सब के लिए ये दुखदायी क्षण है। हमारे सिर से पितृतुल्य ऐसे व्यक्तित्व का साया उठ गया, जिसने हमेशा चुनौतियों से लड़ने का साहस दिया, नई राह दिखाई। आज एक राजनीतिक युग का अंत हो गया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- मैं परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। हम सब के लिए ये दुखदायी क्षण है। हमारे सिर से पितृतुल्य ऐसे व्यक्तित्व का साया उठ गया, जिसने हमेशा चुनौतियों से लड़ने का साहस दिया, नई राह दिखाई। आज एक राजनीतिक युग का अंत हो गया।
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संसद में अटलजी का पहला भाषण सुनते ही नेहरू ने कर दी थी यह भविष्यवाणी

संसद में अटलजी का पहला भाषण सुनते ही नेहरू ने कर दी थी यह भविष्यवाणी
जब अटलजी पहली बार लोकसभा में पहुंचे और भाषण दिया
तब पंडित नेहरू ने कहा था कि वाजपेयी
 एक दिन भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
आज पूरा देश एक ही प्रार्थना कर रहा था कि उसके लाड़ले नेता अटल बिहारी वाजपेयी का स्वास्थ्य सामान्य हो जाए लेकिन गुरुवार शाम 5.05 बजे वे इस दुनिया को छोड़कर चले गए। क्या भाजपाई, क्या विरोधी, हर कोई अटलजी का कायल रहा है। यहां तक कि जवाहरलाल नेहरू ने भी एक बार अटलजी की तारीफ करते हुए भविष्यवाणी की थी कि यह शख्स एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।
संसद में अटलजी के भाषण उतने ही प्रभावी होते थे, जितने जनसभाओं में। जब वह पहली बार लोकसभा में पहुंचे और भाषण दिया तब पंडित नेहरू ने कहा था कि वाजपेयी एक दिन भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
उनके प्रधानमंत्री काल में मीडिया एडवाइजर रहे प्रोफेसर अशोक टंडन ने एक इंटरव्यूर में कहा है कि अटलजी की हिंदी काबिले तारीफ थी। तमिल नेता अन्नादुरई लोकसभा में उनका भाषण सुनने के लिए जरूर उपस्थित रहते थे। एक बार तो उन्हें सुनने के लिए वह नार्थ एवेन्यू से पैदल आए थे। जम्मू-कश्मीर नीति पर अटल ने इंसानियत-जम्हूरियत और कश्मीरीयत की बात कही थी।
अटल के करीबी आचार्य निशांतकेतु बताते हैं- "जब वह विदेश मंत्री थे तब मुझे पटना में पत्र से सूचित किया कि वह आ रहे हैं और मेरे घर पर ही रुकेंगे। एयरपोर्ट पर उन्हें लेने के लिए करीब सौ लोगों के साथ कैलाशपति मिश्र पहुंचे। वह अटल को अतिथिशाला ले गए। अटल ने कहा, मुझे तो निशांतकेतु के यहां जाना था। देखा कि कैलाशपति मिश्र उदास हैं तो उन्होंने कहा कि अतिथिशाला में अतिथि को साला कहा जाता है। हम वहां भला क्यों ठहरें।"
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भारत ने आज अपने एक महान सपूत को खो दिया-- राहुल गाँधी 
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी शोक संवेदना प्रकट की। राहुल ने कहा कि आज भारत ने अपने एक महान सपूत को खो दिया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी को करोड़ों लोग चाहते थे। राहुल ने कहा, 'हम लोग हमेशा उन्हें याद करेंगे।'View image on Twitter


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Today India lost a great son. Former PM ji, was loved and respected by millions. My condolences to his family & all his admirers. We will miss him: Congress President Rahul Gandhi (File pic)
राहुल ने कहा, 'भारत ने आज अपने एक महान सपूत को खो दिया। लाखों-करोड़ों लोग अटल जी से प्रेम और उनका सम्मान करते थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और उनके प्रशंसकों के साथ हैं। हम उन्हें बहुत याद करेंगे।'
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वाजपेयी को दिया ऐसे सम्मान कर दिया सभी को कायल
देश के तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार (16 अगस्त 2018) को निधन हो गया. पूरा देश उनके इस निधन से शोक में डूबा हुआ है. हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. उनकी लोकप्रियता पार्टी के परे थी. उनका पार्थिव शरीर पहले उनके निवास स्थान पर ले जाया गया. वहां पर उनके आखिरी दर्शन करने और श्रद्धांजलि देने के लिए सभी पार्टियों के नेता पहुंचे. इसी में एक नाम है, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का. आमतौर पर वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने वालों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्प चक्र चढ़ाकर नमन किया. लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया अकेले नेता थे, जिन्होंने घुटने के बल बैठकर उनकी देह के सामने अपना सिर जमीन पर टिका दिया.


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Congress leader Jyotiraditya Madhavrao Scindia pays tribute to former Prime Minister at his residence in Delhi.
अटल बिहारी वाजपेयी मूलत: यूपी के बटेश्वर के रहने वाले थे, लेकिन उनका जन्म ग्वालियर में हुआ था. वहीं उनकी पढ़ाई लिखाई हुई और बचपन बीता. ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयराजे सिंधिया भाजपा की संस्थापक सदस्यों में से एक थीं. हालांकि उनके पिता माधव राव सिंधिया ग्वालियर से अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव लड़े थे और जीते थे.
ग्वालियर और सिंधिया परिवार से वाजपेयी का गहरा नाता
अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार का नाता भले बटेश्वर से था, लेकिन उनका शुरुआती समय ग्वालियर में ही बीता. वहीं से उन्होंने स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई की. यहां तक कि पत्रकारिता का शुरुआत उन्होंने वहीं से प्रकाशित एक अखबार से की. उनके पिता ग्वालियर स्टेट में शिक्षक थे. उस समय इस स्टेट पर सिंधिया घराने का राज चलता था. अटल बिहारी वाजपेयी ने एक इंटरव्यू में स्वीकार भी किया था कि हम तो सिंधिया घराने के नौकर हैं.

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