आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
भाजपा को सत्ता से दूर करने की जो जेडीएस और कांग्रेस ने जो गठबंधन कर, येदियुरप्पा को सबसे बड़े दल भाजपा के नेता को शपथ दिलाए जाने पर रात को सुप्रीम कोर्ट के बंद दरवाज़ों को खुलवाकर शीघ्र विश्वासमत करने पहुँच पर सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी बात स्वीकार कर ली, जिसे समस्त भाजपा विरोधियों से इसे भाजपा की हार बताने लगे, विपरीत इसके सुप्रीम कोर्ट को भी शायद यह आभास हो गया था कि जिस डगर पर ये भाजपा विरोधी गठबंधन जा रहा बहुत काँटों भरी है। और राज्य बहुत जल्द मध्यावर्धि चुनाव की ओर चल निकला है। येदियुरप्पा ने भी त्याग पत्र देकर सोने पर सुहागे का काम किया है। वो भी समझ चुके थे कि दाल जलकर काली होने जा रही है।
कर्नाटक में अब जेडीएस और कांग्रेस के बीच सरकार में साझेदारी को लेकर टकराव की बातें सामने आ रही हैं। कुमारस्वामी ने सरकार में 30-30 महीने के बंटवारे का फॉर्मूला खारिज कर दिया है। वहीं, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सभी मूल्यों को ध्यान में रखते हुए हमें सत्ता में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। अब मंत्रिमंडल में बंटवारे को लेकर कुमारस्वामी आज दिल्ली में सोनिया और राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले हैं। बता दें कि बुधवार(मई 23) को राज्य में शपथग्रहण होना है।
कर्नाटक में सरकार गठन के लिए कांग्रेस और जनता दल (एस) के बीच 30 महीने का पावर शेयरिंग फॉर्मूला तय होने की अफवाहों के बीच एचडी कुमारस्वामी सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने जा रहे कुमारस्वामी अपने दिल्ली दौरे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर उनसे सरकार गठन की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह का न्योता देंगे।
कुमारस्वामी ने कहा- सत्ता बंटवारे की कोई बात नहीं हुई
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जेडीएस-कांग्रेस सत्ता में 30-30 महीने की साझेदारी करने की खबरें हैं। कुमारस्वामी से इसी पर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं हुई है। मैं कल (सोमवार को) राहुल और सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली जा रहा हूं। यहीं केबिनेट विस्तार पर उनके साथ चर्चा होगी। ये सरकार अगले पांच साल तक चले, इसके लिए मैं उनके साथ सभी मुद्दों पर चर्चा करूंगा। शपथ लेने के 24 घंटे के अंदर हम बहुमत साबित कर देंगे।
खड़गे ने कहा- सरकार बनाने का फैसला हम करेंगे
उधर, मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार बनाने पर फैसला हमारा हाइकमान करेगा। हम एक राष्ट्रीय पार्टी हैं। जेडीएस को हमने समर्थन दिया है, जो एक क्षेत्रीय पार्टी है। सभी मूल्यों के साथ हमें ये ध्यान रखना होगा कि हमने समर्थन दिया है तो हमें सत्ता में हिस्सा मिले।
राहुल-सोनिया से मिलकर तय होगा कितने मंत्री बनेंगे
कुमारस्वामी ने बताया कि मंत्रियों के विभागों के बंटवारे पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। वह सोमवार को दिल्ली में सोनिया और राहुल गांधी से मिलेंगे। इस बातचीत में ही तय होगी कि कांग्रेस-जेडीएस के कितने-कितने विधायक मंत्री बनेंगे।
शनिवार रात कांग्रेस-जेडीएस के बीच हुई बैठक में सत्ता के बंटवारे पर चर्चा हुई थी।
दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं
कयास लग रहे हैं कि कर्नाटक में दो उपमुख्यमंत्री होंगे। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष जी परमेश्वर ने इस बात की ओर इशारा किया है।
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80 दशक का कड़वा सच
ये किस्सा आंध्रप्रदेश का है । कांग्रेस के मुख्यमंत्री हुआ करते थे विजय भास्कर रेड्डी। इंदिरा गांधी से मिलने गए दिल्ली। 3 दिन वहां आंध्र भवन में पड़े रहे पर इंदिरा ने मिलने का समय न दिया सो बिना मिले बैरंग हैदराबाद लौट आये। उधर आंध्र में सुविख्यात फ़िल्म अभिनेता एन,टी.रामाराव एक राजनेता के रूप में बड़ी तेजी से उभर रहे थे। उन्होंने इस घटना को तेलुगु गौरव, तेलुगु आत्मसम्मान का मुद्दा बना दिया । पूरे प्रदेश में रथ यात्रा निकाली और कहते फिरे की विजय भास्कर रेड्डी करोड़ो तेलुगु लोगों के प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली गए थे। उनको मिलने का समय न दे के इंदिरा ने तेलुगु गौरव का अपमान किया। नारा चला -- तेलुगु बिड्डा ( गौरव ) ।
1983 में आंध्र में चुनाव हुए और एनटीआर की पार्टी तेलुगूदेशम ने 196 सीट जीत ली। एनटीआर मुख्यमंत्री बने।
पर इंदिरा गांधी इतनी तानाशाही प्रवृत्ति की महिला थी कि उसने एनटीआर को हटाने का मन बना लिया। वयोवृद्ध एनटीआर अपनी Byepass सर्जरी कराने अमरीका गए। पीछे से कांग्रेस के राज्यपाल रामलाल ने एनटीआर को बर्खास्त कर तेलुगू देशम के ही एक बागी नेता को शपथ दिला दी। एनटीआर के पास पूर्ण बहुमत था। 156 विधायक अब भी उनके साथ थे । बीमार एनटीआर बिस्तर से उठ खड़े हुए और अपने 156 विधायकों के साथ हैदराबाद से दिल्ली के लिए AP Express में सवार हो निकल पड़े। उन दिनों AP एक VVIP ट्रैन होती थी, उसे बीच मे ही रोक दिया गया, जो ट्रेन कभी एक मिनट लेट नही हुई वो पूरे 36 घंटे देरी से दिल्ली पहुंची। एनटीआर अपने 156 विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे। दुनिया जहान का मीडिया वहां उपस्थित था । पर कोई सुनवाई न हुई । उधर रामलाल ने नए मुख्यमंत्री राजेश्वर राव को बहुमत सिद्ध करने के लिए 30 दिन का समय दिया। इधर आंध्र लौट के एनटीआर ने चैतन्य रथम नामक रथयात्रा निकाल दी। वो जहां जाते लाखों लोगों का हुजूम उनके स्वागत को टूट पड़ता । उन्होंने एक बार फिर तेलुगु गौरव -- सम्मान को ही मुद्दा बनाया। उनके साथ देश का पूरा विपक्ष जुट गया, ये बात है Aug--Sept 1984 की। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में Op Bluestar की आग बुझी नही थी। पंजाब जल रहा था, तभी आंध्र में ये तमाशा शुरू हो गया। समूचा विपक्ष और मीडिया एनटीआर के साथ खड़ा था। प्रचंड बहुमत से जीत के आयी उनकी सरकार को इंदिरा गांधी ने बर्खास्त किया था। अंततः1 महीने बाद इंदिरा को झुकना पड़ा। रामलाल को हटा के शंकर दयाल शर्मा को गवर्नर बनाया गया और उन्होंने 16 Sept 1984 को एनटीआर को पुनः शपथ दिलाई।
सिर्फ 2 महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 में इंदिरा की हत्या हो गयी और उससे उपजी सहानुभूति लहर में अपनी माँ की लाश पे चढ़ के राजीव गांधी 410 सीट जीत के प्रधानमंत्री बना । कांग्रेस को इतना प्रचंड बहुमत मिला कि चौधरी चरण सिंह को छोड़ सारा विपक्ष हार गया । भाजप की सिर्फ 2 सीट आयी। पर आंध्र के लोग इंदिरा से इतने नाराज थे कि उस प्रचंड सहानुभूति लहर में भी तेलुगुदेशम 30 सीट जीत गयी आन्ध्रप्रदेश में और TDP 5 साल मुख्य विपक्षी दल बन के रही।
सिर्फ 2 महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 में इंदिरा की हत्या हो गयी और उससे उपजी सहानुभूति लहर में अपनी माँ की लाश पे चढ़ के राजीव गांधी 410 सीट जीत के प्रधानमंत्री बना । कांग्रेस को इतना प्रचंड बहुमत मिला कि चौधरी चरण सिंह को छोड़ सारा विपक्ष हार गया । भाजप की सिर्फ 2 सीट आयी। पर आंध्र के लोग इंदिरा से इतने नाराज थे कि उस प्रचंड सहानुभूति लहर में भी तेलुगुदेशम 30 सीट जीत गयी आन्ध्रप्रदेश में और TDP 5 साल मुख्य विपक्षी दल बन के रही।
आज के नौजवानों को राहुल गाँधी की दादी का ये इतिहास पता होना चाहिए ।
आपको पता होना चाहिए कि इस देश मे राष्ट्रपति और राज्यपाल को रबर स्टैम्प किसने बनाया ?
कौन था जो लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा के चुनी हुई सरकारों को इस तरह बर्खास्त कर देता था।
और किसने डाली ये परंपरा, बहुमत सिद्ध करने के लिए 30 दिन देने की ।
आपको पता होना चाहिए कि इस देश मे राष्ट्रपति और राज्यपाल को रबर स्टैम्प किसने बनाया ?
कौन था जो लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा के चुनी हुई सरकारों को इस तरह बर्खास्त कर देता था।
और किसने डाली ये परंपरा, बहुमत सिद्ध करने के लिए 30 दिन देने की ।
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माना जा रहा है कि कांग्रेस परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाएगी। जेडीएस ने भी दो उपमुख्यमंत्री होने की बात से इनकार नहीं किया है। कुमारस्वामी की सोनिया-राहुल से इस मुद्दे पर भी चर्चा की उम्मीद है। माना जा रहा है कि कांग्रेस राज्य की 33 सदस्यों वाली कैबिनेट में अपने पास 20 मंत्रालय रखेगी। हालांकि 20 सीटों के बावजूद कांग्रेस का कैबिनेट में प्रतिनिधित्व कम ही रहेगा। कांग्रेस के पास राज्य की 68 सीटें हैं जबकि जेडीएस के पास 37 विधायक हैं। मुख्यमंत्री पद के अलावा जेडीएस अपने पास महत्वपूर्ण मंत्रालय जैसे कि वित्त, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग को रखना चाहता है। कांग्रेस के महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘मई 23 को अकेले कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद के तौर पर शपथ लेंगे। इसके बाद गुरुवार(मई 24) को फ्लोर टेस्ट होगा। उसी दिन स्पीकर का चुनाव भी होगा।’
लिंगायतों की मांग है कि उन्हें उप-मुख्यमंत्री का पद दिया जाए। कांग्रेस में सबसे ज्यादा 16 लिंगायत विधायक है। वहीं जेडीएस के पास चार हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने जेडीएस को बिना शर्त समर्थन दिया है। इसी वजह से वह गठबंधन को बनाए रखने के लिए कोई मांग नहीं करेगी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने निर्णय ले लिया है कि वह डिप्टी सीएम का पद दलित को देगी। इसके लिए परमेश्वर उनकी पहली पसंद हैं। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि कर्नाटक में दो डिप्टी सीएम बन सकते हैं। एक कांग्रेस पार्टी से होगा तो दूसरा जेडीएस से।
कर्नाटक में भाजपा को 104, कांग्रेस 78 और जेडीएस गठबंधन को 38 सीटें मिली हैं। चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है।
इससे पहले राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के आधार पर भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी। लेकिन उन्होंने मई 19 को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव का सामना किए बिना ही पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्यपाल वजुभाई वाला ने कुमारस्वामी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया था।
पहले भी ऐसा कर चुके कुमारस्वामी
- कुमारस्वामी ने सरकार में साझेदारी के फॉर्मूला पर जनवरी 2006 में 20-20 महीने के लिए भाजपा के साथ सरकार बनाई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने भाजपा को सत्ता का नेतृत्व सौंपने से इनकार कर दिया था। लिहाजा, सरकार गिर गई थी। इसके बाद 2008 में हुए चुनावों में भाजपा को बहुमत मिला और येद्दयुरप्पा मुख्यमंत्री बने थे।
कांतिवीरा स्टेडियम नहीं अब विधानसभा में ही लेंगे शपथ
राज्यपाल से मुलाकात के बाद कुमारस्वामी ने शनिवार को घोषणा की थी कि वे 21 मई यानी सोमवार को कांतिवीरा स्टेडियम में दोपहर 12 से 1.50 बजे के बीच शपथ ग्रहण करेंगे। लेकिन बाद में उन्होंने घोषणा की थी कि शपथ ग्रहण कार्यक्रम 23 मई को आयोजित किया जाएगा। इस बदलाव के लिए उन्होंने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि होने का हवाला दिया था। शपथ ग्रहण के दिन में बदलाव के बाद अब स्थान को भी बदलकर विधानसभा के अंदर अपनी सीट पर ही शपथ लिए जाने की बात कही गई है। हालांकि कुमारस्वामी ने रविवार को कहा कि वे मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के बाद ही शपथ ग्रहण स्थल पर निर्णय लेंगे।


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