
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
कर्नाटक में बीते पांच दिन का समय राजनीतिक तौर पर उथल-पुथल का रहा है। इन दिनों में कांग्रेस ने लगातार ये आरोप लगाए कि भाजपा उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। इस दौरान कांग्रेस ने तीन ऑडियो टेप भी जारी किए। जिनमें कई सीनियर भाजपाई नेताओं पर आरोप लगाए गए। भाजपा की सरकार गिरने के बाद अब जेडीएस और कांग्रेस की सरकार बनना तया है। ऐसे में सवाल है क्या भाजपा के इन नेताओं पर केस दर्ज होंगे, जिन पर विधायकों को ललचाने का आरोप है।
वाजपेयी की तर्ज़ पर येदियुरप्पा का इस्तीफा
कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के मतविभाजन का सामना किए बिना विधानसभा में इस्तीफा देने के एलान ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद दिला दी। 22 साल पहले 13 दिन तक प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी ने लोकसभा में पर्याप्त संख्या में सांसद नहीं होने पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वाजपेयी सरकार के गिरने के बाद जद-एस नेता कुमारस्वामी के पिता एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने थे और अब येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद कुमारस्वामी सीएम पद की शपथ लेंगे।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तरह ही 1996 में लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी। जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने मतविभाजन का इंतजार किए बिना ही पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, मैं राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपने जा रहा हूं लेकिन फिर पूर्ण बहुमत के साथ लौटकर सदन में आऊंगा। ठीक उसी तरह से येदियुरप्पा ने विधानसभा में कहा, मैं विश्वास प्रस्ताव पर जोर नहीं दूंगा और सीधे राज्यपाल के को अपना इस्तीफा सौंपने जा रहा हूं।
मोदी अभी इन्दिरा गाँधी से पीछे
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली का भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की कार्यशैली से तुलना की जाती है, जिस तरह कोई निर्णय लेने में तनिक भी संकोच नहीं करती थीं, ठीक उसी भाँति मोदी भी संकोच नहीं करते। राजे-रजवाड़ों का प्रिवी पर्स समाप्त करने की बात हो या बैंकों के राष्ट्रीयकरण करने की,पार्टी में ही हो रहे विरोध की भी चिन्ता नहीं की। ठीक उसी तरह नोट बंदी हो या पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक मोदी ने भी किसी विरोध की चिंता नहीं की। लेकिन इंदिरा द्वारा जब किसी सरकार को गिराने के आरोप लगे, सब निराधार सिद्ध हुए, क्योंकि इंदिरा गाँधी ने कहीं कोई सबूत नहीं छोड़ा। चर्चित रेलमन्त्री ललित नारायण मिश्रा की मृत्यु हो या स्टेट बैंक से 60 लाख निकलने पर नागरवाला काण्ड या फिर पूर्ण बहुमत से 1977 में जनता पार्टी की सरकार आदि आदि इन सभी आरोपों से साफ बरी हुई।
अवलोकन करें:--
80 दशक का कड़वा सच ये किस्सा आंध्रप्रदेश का है । कांग्रेस के मुख्यमंत्री हुआ करते थे विजय भास्कर रेड्डी। इंदिरा गांधी से मिलने गए दिल्ली। 3 दिन वहां आंध्र भवन में पड़े रहे पर इंदिरा ने मिलने का समय न दिया सो बिना मिले बैरंग हैदराबाद लौट आये। उधर आंध्र में सुविख्यात फ़िल्म अभिनेता एन,टी.रामाराव एक राजनेता के रूप में बड़ी तेजी से उभर रहे थे। उन्होंने इस घटना को तेलुगु गौरव, तेलुगु आत्मसम्मान का मुद्दा बना दिया । पूरे प्रदेश में रथ यात्रा निकाली और कहते फिरे की विजय भास्कर रेड्डी करोड़ो तेलुगु लोगों के प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली गए थे। उनको मिलने का समय न दे के इंदिरा ने तेलुगु गौरव का अपमान किया। नारा चला -- तेलुगु बिड्डा ( गौरव ) ।
1983 में आंध्र में चुनाव हुए और एनटीआर की पार्टी तेलुगूदेशम ने 196 सीट जीत ली। एनटीआर मुख्यमंत्री बने।
पर इंदिरा गांधी इतनी तानाशाही प्रवृत्ति की महिला थी कि उसने एनटीआर को हटाने का मन बना लिया। वयोवृद्ध एनटीआर अपनी Byepass सर्जरी कराने अमरीका गए। पीछे से कांग्रेस के राज्यपाल रामलाल ने एनटीआर को बर्खास्त कर तेलुगू देशम के ही एक बागी नेता को शपथ दिला दी। एनटीआर के पास पूर्ण बहुमत था। 156 विधायक अब भी उनके साथ थे । बीमार एनटीआर बिस्तर से उठ खड़े हुए और अपने 156 विधायकों के साथ हैदराबाद से दिल्ली के लिए AP Express में सवार हो निकल पड़े। उन दिनों AP एक VVIP ट्रैन होती थी, उसे बीच मे ही रोक दिया गया, जो ट्रेन कभी एक मिनट लेट नही हुई वो पूरे 36 घंटे देरी से दिल्ली पहुंची। एनटीआर अपने 156 विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे। दुनिया जहान का मीडिया वहां उपस्थित था । पर कोई सुनवाई न हुई । उधर रामलाल ने नए मुख्यमंत्री राजेश्वर राव को बहुमत सिद्ध करने के लिए 30 दिन का समय दिया। इधर आंध्र लौट के एनटीआर ने चैतन्य रथम नामक रथयात्रा निकाल दी। वो जहां जाते लाखों लोगों का हुजूम उनके स्वागत को टूट पड़ता । उन्होंने एक बार फिर तेलुगु गौरव -- सम्मान को ही मुद्दा बनाया। उनके साथ देश का पूरा विपक्ष जुट गया, ये बात है Aug--Sept 1984 की। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में Op Bluestar की आग बुझी नही थी। पंजाब जल रहा था, तभी आंध्र में ये तमाशा शुरू हो गया। समूचा विपक्ष और मीडिया एनटीआर के साथ खड़ा था। प्रचंड बहुमत से जीत के आयी उनकी सरकार को इंदिरा गांधी ने बर्खास्त किया था। अंततः1 महीने बाद इंदिरा को झुकना पड़ा। रामलाल को हटा के शंकर दयाल शर्मा को गवर्नर बनाया गया और उन्होंने 16 Sept 1984 को एनटीआर को पुनः शपथ दिलाई।
सिर्फ 2 महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 में इंदिरा की हत्या हो गयी और उससे उपजी सहानुभूति लहर में अपनी माँ की लाश पे चढ़ के राजीव गांधी 410 सीट जीत के प्रधानमंत्री बना । कांग्रेस को इतना प्रचंड बहुमत मिला कि चौधरी चरण सिंह को छोड़ सारा विपक्ष हार गया । भाजप की सिर्फ 2 सीट आयी। पर आंध्र के लोग इंदिरा से इतने नाराज थे कि उस प्रचंड सहानुभूति लहर में भी तेलुगुदेशम 30 सीट जीत गयी आन्ध्रप्रदेश में और TDP 5 साल मुख्य विपक्षी दल बन के रही।
सिर्फ 2 महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 में इंदिरा की हत्या हो गयी और उससे उपजी सहानुभूति लहर में अपनी माँ की लाश पे चढ़ के राजीव गांधी 410 सीट जीत के प्रधानमंत्री बना । कांग्रेस को इतना प्रचंड बहुमत मिला कि चौधरी चरण सिंह को छोड़ सारा विपक्ष हार गया । भाजप की सिर्फ 2 सीट आयी। पर आंध्र के लोग इंदिरा से इतने नाराज थे कि उस प्रचंड सहानुभूति लहर में भी तेलुगुदेशम 30 सीट जीत गयी आन्ध्रप्रदेश में और TDP 5 साल मुख्य विपक्षी दल बन के रही।
आज के नौजवानों को राहुल गाँधी की दादी का ये इतिहास पता होना चाहिए ।
आपको पता होना चाहिए कि इस देश मे राष्ट्रपति और राज्यपाल को रबर स्टैम्प किसने बनाया ?
कौन था जो लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा के चुनी हुई सरकारों को इस तरह बर्खास्त कर देता था।
और किसने डाली ये परंपरा, बहुमत सिद्ध करने के लिए 30 दिन देने की ।
आपको पता होना चाहिए कि इस देश मे राष्ट्रपति और राज्यपाल को रबर स्टैम्प किसने बनाया ?
कौन था जो लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा के चुनी हुई सरकारों को इस तरह बर्खास्त कर देता था।
और किसने डाली ये परंपरा, बहुमत सिद्ध करने के लिए 30 दिन देने की ।
भाजपा के विरुद्ध आया ऑडियो टेप
लेकिन कर्नाटक के सियासी घमासान के बीच एक के बाद एक ऑडियो टेप सामने आए। येदुरप्पा और उनके बेटे के ऑडियो टेप के बाद अन्य दो बीजेपी नेताओं के कांग्रेस विधायकों को लालच देकर खरीदने के ऑडियो टेप शनिवार को सामने आए। कांग्रेस ने बीजेपी नेता श्रीरामालू और मुरलीधर राव द्वारा कांग्रेस एमएलए बीसी पाटिल को घूस देने वाला ऑडियो जारी किया।
इस ऑडियो में बीजेपी नेताओं के कांग्रेस विधायक से कहते सुना जा सकता है कि, हम आपसे वादा करते हैं कि स्पीकर आपको अयोग्य करार नहीं देगें, वह हमारा पक्ष लेंगे। इससे पहले कथित तौर पर सीएम येदुरप्पा ने कांग्रेस विधायक बीसी पाटिल को पद और अन्य लालच देकर अपने पक्ष में वोट करने को कहा था। कांग्रेस विधायक पाटिल ने इस पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया और सदन में बहुमत साबित होने से पहले इसे रिलीज कर दिया। इससे पहले येदुरप्पा के बेटे बी वाय विजेंद्र का एक कथित टैप रिलीज हुआ जिसमें आरोप है कि उन्होंने कांग्रेस विधायक की पत्नी से येदुरप्पा के पक्ष में वोट करने को कहा। बदले में पद और पैसे का लालच दिया गया।
सबसे पहला कथित टैप बीजेपी समर्थक जनार्दन रेड्डी का आया था जिसमें वो एक कांग्रेस विधायक को येदुरप्पा के पक्ष में वोट देने के लिए ललचा रहे हैं। इस कथित टैप में आरोप है कि जनार्दन रेड्डी कांग्रेस विधायक को करोडों रुपए और वोट के बदले मंत्री पद देने का लालच दे रहे है।

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