कर्नाटक विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) को दिल्ली और पंजाब से बाहर पांव पसारने के प्रयासों को झटका लगा है और उसके सभी 29
प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है।
जहाँ तक आम आदमी पार्टी की बात है, शायद यही एक ऐसी इकलौती पार्टी है, जिसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत ही जब्त हो गयी। लेकिन रायता फ़ैलाने से पीछे नहीं हट रही। सिर्फ मोदी हाय हाय करना ही शायद आम आदमी पार्टी का उद्देश्य है। दिल्ली चुनावों में तत्कालीन मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोप लेकर जनता को पागल बनाते रहे, लेकिन इतने वर्षों से सत्ता में रहते कांग्रेस के किसी भी घोटाले पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, क्यों? विपरीत इसके इन्ही के विधायक आरोपों में घिरते रहे हैं। कोई राशन कार्ड बनवा रहा है। तो कोई किसी अन्य कारण से महिलाओं का शोषण कर रहा है।
अवलोकन करें:--
सरवगननगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज के जे जॉर्ज के खिलाफ मैदान में उतरे कर्नाटक में आप के संयोजक पृथ्वी रेड्डी को 1,861 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे।
स्वराज इंडिया भी कुछ ऐसा ही रहा हाल
29 सीटों में से पार्टी ने बेंगलूरू में 18 सीटों पर और राज्य के अन्य हिस्सों में 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। योगेन्द्र यादव की अगुवाई वाली स्वराज इंडिया भी राज्य में 11 सीटों पर मैदान में थी। इसके प्रत्याशी दर्शन पुत्तन्नैयाह को मेलुकोटे सीट पर 73,779 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।
श्री रंगापटना से वेंकटेश सी एस को 1942, सी वी रमण नगर से पार्टी के उम्मीदवार मोहन दसारी को 1926 और सरवांग नगर से पृथ्वी रेड्डी 1755 पार्टी के एक हजार से अधिक वोट हासिल करने वालों में शामिल थे। धारवाड़ से एस एफ पाटिल (153), दावणगोरे साऊथ से राघवेंद्र के एल (157), बेलगाम दक्षिण से सदानंद आर मैत्री (180) और गुलबगार उत्तर से संजीव कुमार करीकल (198) तो 200 वोट हासिल करने में भी विफल रहे।
कांग्रेस को हुआ नुकसान
बात अगर कर्नाटक के पूरे चुनावी समीकरण की करें तो 38 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस 78 सीटें जीतने में कामयाब हुई है, हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 36.6 फीसदी वोटों के साथ उसने 122 सीटें अपने खाते में करने में कामयाब हुई थी। वहीं, बीजेपी 36.2 फीसदी वोटों के साथ 104 सीटें हासिल करने में कामयाब हुई है। जबकि जेडीएस के मतदान प्रतिशत में ज्यादा असर नहीं पड़ा है. इस बार जेडीएस को 18.5 फीसदी वोटों के साथ 37 सीटें मिली हैं, जबकि यह आंकड़ा 2013 में 20 फीसदी के साथ 40 सीटों का था।
प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है।
जहाँ तक आम आदमी पार्टी की बात है, शायद यही एक ऐसी इकलौती पार्टी है, जिसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत ही जब्त हो गयी। लेकिन रायता फ़ैलाने से पीछे नहीं हट रही। सिर्फ मोदी हाय हाय करना ही शायद आम आदमी पार्टी का उद्देश्य है। दिल्ली चुनावों में तत्कालीन मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोप लेकर जनता को पागल बनाते रहे, लेकिन इतने वर्षों से सत्ता में रहते कांग्रेस के किसी भी घोटाले पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, क्यों? विपरीत इसके इन्ही के विधायक आरोपों में घिरते रहे हैं। कोई राशन कार्ड बनवा रहा है। तो कोई किसी अन्य कारण से महिलाओं का शोषण कर रहा है।
अवलोकन करें:--
केजरीवाल के नाम पर मांगे गए वोट
कर्नाटक चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 222 सीटों में से 28 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस चुनाव में दिल्ली के विकास मॉडल का सपना वहां की जनता को दिखाया गया था। पार्टी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम पर वोट मांगे थे।
टूट नहीं रहा ‘आप’ की हार का सिलसिला
पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केजरीवाल के नाम का खूब इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार हमारा मुख्य मुद्दा है। मगर जनता ने आम आदमी पार्टी को सिरे से नकार दिया है। इस चुनाव में सभी 28 प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 21 हजार वोट मिले हैं। वैसे केजरीवाल की लगातार हार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वोत्तर के राज्यों में भी पार्टी की लुटिया डूबी है।
केजरीवाल की पार्टी को नकार दिया
नगालैंड और मेघालय में भी जनता ने केजरीवाल की पार्टी को नकार दिया था। इन राज्यों में इस दल को बहुत कम वोट मिले थे। पूर्व मंत्री व ‘आप’ के नाराज विधायक कपिल मिश्रा की मानें तो ‘आप’ मेघालय में केवल छह सीटों पर ही प्रत्याशी उतार सकी थी। ‘आप’ को सभी छह सीटों को मिलाकर केवल 1140 वोट मिले। इससे अधिक नोटा पर वोट पड़ गए। वहीं नगालैंड में भी ‘आप’ को कुल मिलाकर 7355 वोट मिले।
यूपी में हारे
इतना ही नहीं इससे पहले 27 फरवरी को पंजाब के लुधियाना में नगर निगम के 95 वार्ड के हुए चुनाव में भी ‘आप’ बुरी तरह औंधे मुंह गिरी थी। केवल एक सीट पर ही जीत हासिल हो सकी थी। नवंबर 2017 में हुए उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव के समय भी ‘आप’ हार गई।
गुजरात में मिली हार
गुजरात में ‘आप’ को एक भी सीट नहीं मिली। इससे पहले ‘आप’ पंजाब विधानसभा चुना हार चुकी है। गोवा विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर जमानत ही जब्त हो गई थी। कपिल मिश्रा ने फिर कहा कि जब तक केजरीवाल अपनी गलतियों में सुधार नहीं करेंगे, आम आदमी पार्टी का बेड़ा गर्क होता रहेगा। केजरीवाल में सुधार होना संभव नहीं है और पार्टी का उठना भी असंभव है।
29 सीटों में से पार्टी ने बेंगलूरू में 18 सीटों पर और राज्य के अन्य हिस्सों में 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। योगेन्द्र यादव की अगुवाई वाली स्वराज इंडिया भी राज्य में 11 सीटों पर मैदान में थी। इसके प्रत्याशी दर्शन पुत्तन्नैयाह को मेलुकोटे सीट पर 73,779 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।
श्री रंगापटना से वेंकटेश सी एस को 1942, सी वी रमण नगर से पार्टी के उम्मीदवार मोहन दसारी को 1926 और सरवांग नगर से पृथ्वी रेड्डी 1755 पार्टी के एक हजार से अधिक वोट हासिल करने वालों में शामिल थे। धारवाड़ से एस एफ पाटिल (153), दावणगोरे साऊथ से राघवेंद्र के एल (157), बेलगाम दक्षिण से सदानंद आर मैत्री (180) और गुलबगार उत्तर से संजीव कुमार करीकल (198) तो 200 वोट हासिल करने में भी विफल रहे।
कांग्रेस को हुआ नुकसान
बात अगर कर्नाटक के पूरे चुनावी समीकरण की करें तो 38 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस 78 सीटें जीतने में कामयाब हुई है, हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 36.6 फीसदी वोटों के साथ उसने 122 सीटें अपने खाते में करने में कामयाब हुई थी। वहीं, बीजेपी 36.2 फीसदी वोटों के साथ 104 सीटें हासिल करने में कामयाब हुई है। जबकि जेडीएस के मतदान प्रतिशत में ज्यादा असर नहीं पड़ा है. इस बार जेडीएस को 18.5 फीसदी वोटों के साथ 37 सीटें मिली हैं, जबकि यह आंकड़ा 2013 में 20 फीसदी के साथ 40 सीटों का था।




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