चारा घोटाले के चौथे मामले में रांची की एक विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार (24 मार्च) को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को 7 साल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही 30 लाख का जुर्माना भरने को भी कहा गया है, जुर्माना नहीं भरने की सूरत में सजा की अवधि एक साल और बढ़ जाएगी. लालू यादव की सजा पर बहस 21, 22 और 23 मार्च को हुई थी. चारा घोटाले के चौथे मामले में यहां की एक विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार (19 मार्च) को लालू प्रसाद को दोषी करार दिया था.
इसी मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया था. न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 तक दुमका कोषागार से फर्जी तरीके से 3.13 करोड़ रुपये निकालने के मामले में यह फैसला सुनाया. यह फैसला पहले 15 मार्च को सुनाया जाना था, जिसे चार बार पहले भी आगे बढ़ा दिया गया था. न्यायाधीश ने अपना फैसला वर्णानुक्रम के अनुसार सुनाया, लेकिन लालू यादव फैसला सुनाने के बाद अदालत पहुंचे. मिश्रा हालांकि सजा सुनाने के वक्त अदालत में मौजूद थे.
लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया है कि लालू यादव को दुमका कोषागार केस में आईपीसी और पीसी की धाराओं के तहत सात-सात साल की सजा सुनाई गई है. जिसमें आपराधिक साजिश जैसी धाराएं भी शामिल हैं. वहीं, 30-30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
वकील विष्णु कुमार शर्मा ने दावा किया कि इस केस में दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी. उनके मुताबकि, लालू यादव को दो केस में अलग-अलग सजा सुनाई गई है. यानी एक केस की सजा खत्म होने के बाद दूसरे केस की सजा चलेगी. जिसके तहत लालू यादव को इस केस के लिए 14 साल जेल में गुजारने पड़ेंगे और 60 लाख का जुर्माना भरना पड़ेगा. उन्होंने यह भी बताया कि अगर लालू जुर्माने की रकम अदा नहीं करते हैं तो उन्हें एक साल अतिरिक्त जेल में रहना पड़ सकता है.इन धाराओं में मिली सजा
लालू यादव के खिलाफ IPC की धारा 120 बी, 467, 420, 409, 468, 471, 477ए और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC Act) की धारा 13(2) रेड विथ 13(1)(सी)(डी) के तहत सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने दोनो में 7-7 साल सजा और 30-30 लाख का जुर्माना लगाया है.
चारा घोटाले के दुमका कोषागार से तीन करोड़, तेरह लाख रुपए के गबन के मामले में 31 लोगों के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला सोमवार (19 मार्च) को दोपहर बाद आया था, जिसमें सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने जहां लालू समेत 19 को दोषी करार दिया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व विधायक ध्रुव भगत, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पूर्व विधायक आर के राणा समेत 12 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया.
24 जनवरी को चाईबासा कोषागार मामले में सुनाई गई सजा
इससे पहले इसी वर्ष 24 जनवरी को लालू प्रसाद एवं जगन्नाथ मिश्र को सीबीआई की विशेष अदालत ने चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपए का गबन करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास एवं क्रमशः दस लाख एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के चाईबासा मामले में कुल 50 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी थी.
6 जनवरी को देवघर कोषागार मामले में सुनाई गई सजा
रांची की एक विशेष सीबीआई अदालत ने नौ सौ पचास करोड़ रुपये के चारा घोटाला में देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख जुर्माने की शनिवार (6 जनवरी) को सजा सुनाई थी. अदालत ने लालू के दो पूर्व सहयोगियों लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा को सात वर्ष की कैद एवं बीस लाख रुपये के जुर्माने एवं बिहार के पूर्व मंत्री आर के राणा को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख जुर्माने की सजा सुनायी.
इन्हें मिलनी है सजा
लालू प्रसाद, अजीत कुमार वर्मा, अरुण कुमार सिंह, डॉ विमल कांत दास, गोपीनाथ दास, डॉ कृष्ण कुमार प्रसाद, डॉ. मनोरंजन प्रसाद, डॉ. नंदकिशोर प्रसाद, मोहिंदर सिंह बेदी, नरेश प्रसाद, ओपी दिवाकर, पंकज मोहन भुई, डॉ. पीतांबर झा, राधा मोहन मंडल, राजकुमार शर्मा, डॉ. रघुनंदन प्रसाद, राजेंद्र कुमार बगेड़िया, शरदेंदु कुमार दास और फूलचंद सिंह।
रिम्स में हैं एडमिट
लालू प्रसाद इन दिनों बीमार हैं और राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में इलाज करा रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें एम्स में इलाज की सलाह दी है। इसकी जानकारी जेल अधीक्षक को दी गई थी।
लालू को 6 में से इन 4 केस में सजा
1) चाईबासा ट्रेजरी का पहला केस:30 सितंबर 2013 को लालू यादव को दोषी माना। उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई गई।
2) देवघर ट्रेजरी केस: 6 जनवरी 2017 को लालू समेत 16 आरोपियों को साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई गई। लालू पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।
3) चाईबासा ट्रेजरी का दूसरा केस:24 जनवरी 2018 को लालू को पांच साल की सजा सुनाई गई।
4) दुमका ट्रेजरी केस:लालू दोषी करार, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र बरी। लालू को सात कैद की कैद।
इन 2 केस में चल रही सुनवाई
5) डोरंडा ट्रेजरी केस: सुनवाई चल रही है।
6) भागलपुर ट्रेजरी केस: इसकी सुनवाई पटना की सीबीआई कोर्ट में चल रही है।
क्या है दुमका ट्रेजरी मामला?
दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई।
1997 में पहली बार जेल गए थे लालू
1997 में लालू को पहली बार ज्यूडिशियल कस्टडी में लिया गया था। वे 137 दिन जेल में रहे थे और राबड़ी देवी बिहार की सीएम बनी थीं। 12 दिसंबर 1997 को लालू रिहा हुए थे।
अवलोकन करें:--
दूसरी बार लालू 28 अक्टूबर 1998 को पटना के बेऊर जेल गए। बाद में उन्हें जमानत मिली। इसी मामले में लालू को 28 नवंबर 2000 में एक दिन के लिए जेल जाना पड़ा था।
चारा के नाम पर चाईबासा ट्रेजरी से 37 करोड़ रुपए के गबन का दोषी पाए जाने के बाद लालू को 2013 में भी जेल जाना पड़ा था। तब वे दो महीने रांची जेल में रहे थे। 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा था। उसी साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।
1996 में दर्ज हुआ था पहला मामला
चारा घोटाला में पहली बार 1996 में मामला दर्ज किया गया था. उस समय मामले में 49 आरोपी थे. मुकदमे के दौरान 14 की मौत हो गई. अदालत ने सोमवार को 31 आरोपियों में से 19 को दोषी करार दिया और 12 को बरी कर दिया. लालू प्रसाद को वर्ष 2013 में चारा घोटाले के पहले मामले में पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी. उन्हें 23 दिसंबर 2017 को इसके दूसरे मामले में दोषी ठहराया गया था और साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी. वहीं चारा घोटाले के तीसरे मामले में उन्हें 24 जनवरी को पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी. वर्ष 2000 में बिहार से झारखंड के अलग हो जाने के बाद चारा घोटाले से जुड़े सारे मामलों को रांची स्थानांतरित कर दिया गया था.
इसी मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया था. न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 तक दुमका कोषागार से फर्जी तरीके से 3.13 करोड़ रुपये निकालने के मामले में यह फैसला सुनाया. यह फैसला पहले 15 मार्च को सुनाया जाना था, जिसे चार बार पहले भी आगे बढ़ा दिया गया था. न्यायाधीश ने अपना फैसला वर्णानुक्रम के अनुसार सुनाया, लेकिन लालू यादव फैसला सुनाने के बाद अदालत पहुंचे. मिश्रा हालांकि सजा सुनाने के वक्त अदालत में मौजूद थे.
लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया है कि लालू यादव को दुमका कोषागार केस में आईपीसी और पीसी की धाराओं के तहत सात-सात साल की सजा सुनाई गई है. जिसमें आपराधिक साजिश जैसी धाराएं भी शामिल हैं. वहीं, 30-30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
वकील विष्णु कुमार शर्मा ने दावा किया कि इस केस में दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी. उनके मुताबकि, लालू यादव को दो केस में अलग-अलग सजा सुनाई गई है. यानी एक केस की सजा खत्म होने के बाद दूसरे केस की सजा चलेगी. जिसके तहत लालू यादव को इस केस के लिए 14 साल जेल में गुजारने पड़ेंगे और 60 लाख का जुर्माना भरना पड़ेगा. उन्होंने यह भी बताया कि अगर लालू जुर्माने की रकम अदा नहीं करते हैं तो उन्हें एक साल अतिरिक्त जेल में रहना पड़ सकता है.इन धाराओं में मिली सजा
लालू यादव के खिलाफ IPC की धारा 120 बी, 467, 420, 409, 468, 471, 477ए और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC Act) की धारा 13(2) रेड विथ 13(1)(सी)(डी) के तहत सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने दोनो में 7-7 साल सजा और 30-30 लाख का जुर्माना लगाया है.
नहीं मिली है आदेश की कॉपी
हालांकि, लालू यादव के वकील ने बताया कि उन्होंने अब तक कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है. ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि क्या ये सजा अलग-अलग चलेंगी या फिर एक साथ.
बता दें कि अगर सजा एक साथ चली तो लालू यादव को 7 साल ही जेल में रहना पड़ेगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें 14 साल की सजा काटनी पड़ेगी. हालांकि, ऐसे केस में आमतौर पर सजा एक साथ ही चलती हैं. लालू यादव के खिलाफ अब तक तीन केस में जो सजा सुनाई गई है, वो भी एक साथ ही चल रही हैं.
19 दोषी करार और 12 बरीचारा घोटाले के दुमका कोषागार से तीन करोड़, तेरह लाख रुपए के गबन के मामले में 31 लोगों के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला सोमवार (19 मार्च) को दोपहर बाद आया था, जिसमें सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने जहां लालू समेत 19 को दोषी करार दिया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व विधायक ध्रुव भगत, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पूर्व विधायक आर के राणा समेत 12 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया.
24 जनवरी को चाईबासा कोषागार मामले में सुनाई गई सजा
इससे पहले इसी वर्ष 24 जनवरी को लालू प्रसाद एवं जगन्नाथ मिश्र को सीबीआई की विशेष अदालत ने चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपए का गबन करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास एवं क्रमशः दस लाख एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के चाईबासा मामले में कुल 50 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी थी.
6 जनवरी को देवघर कोषागार मामले में सुनाई गई सजा
रांची की एक विशेष सीबीआई अदालत ने नौ सौ पचास करोड़ रुपये के चारा घोटाला में देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख जुर्माने की शनिवार (6 जनवरी) को सजा सुनाई थी. अदालत ने लालू के दो पूर्व सहयोगियों लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा को सात वर्ष की कैद एवं बीस लाख रुपये के जुर्माने एवं बिहार के पूर्व मंत्री आर के राणा को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख जुर्माने की सजा सुनायी.
इन्हें मिलनी है सजा
लालू प्रसाद, अजीत कुमार वर्मा, अरुण कुमार सिंह, डॉ विमल कांत दास, गोपीनाथ दास, डॉ कृष्ण कुमार प्रसाद, डॉ. मनोरंजन प्रसाद, डॉ. नंदकिशोर प्रसाद, मोहिंदर सिंह बेदी, नरेश प्रसाद, ओपी दिवाकर, पंकज मोहन भुई, डॉ. पीतांबर झा, राधा मोहन मंडल, राजकुमार शर्मा, डॉ. रघुनंदन प्रसाद, राजेंद्र कुमार बगेड़िया, शरदेंदु कुमार दास और फूलचंद सिंह।
रिम्स में हैं एडमिट
लालू प्रसाद इन दिनों बीमार हैं और राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में इलाज करा रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें एम्स में इलाज की सलाह दी है। इसकी जानकारी जेल अधीक्षक को दी गई थी।
लालू को 6 में से इन 4 केस में सजा
1) चाईबासा ट्रेजरी का पहला केस:30 सितंबर 2013 को लालू यादव को दोषी माना। उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई गई।
2) देवघर ट्रेजरी केस: 6 जनवरी 2017 को लालू समेत 16 आरोपियों को साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई गई। लालू पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।
3) चाईबासा ट्रेजरी का दूसरा केस:24 जनवरी 2018 को लालू को पांच साल की सजा सुनाई गई।
4) दुमका ट्रेजरी केस:लालू दोषी करार, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र बरी। लालू को सात कैद की कैद।
इन 2 केस में चल रही सुनवाई
5) डोरंडा ट्रेजरी केस: सुनवाई चल रही है।
6) भागलपुर ट्रेजरी केस: इसकी सुनवाई पटना की सीबीआई कोर्ट में चल रही है।
क्या है दुमका ट्रेजरी मामला?
दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई।
1997 में पहली बार जेल गए थे लालू
1997 में लालू को पहली बार ज्यूडिशियल कस्टडी में लिया गया था। वे 137 दिन जेल में रहे थे और राबड़ी देवी बिहार की सीएम बनी थीं। 12 दिसंबर 1997 को लालू रिहा हुए थे।
अवलोकन करें:--
दूसरी बार लालू 28 अक्टूबर 1998 को पटना के बेऊर जेल गए। बाद में उन्हें जमानत मिली। इसी मामले में लालू को 28 नवंबर 2000 में एक दिन के लिए जेल जाना पड़ा था।
चारा के नाम पर चाईबासा ट्रेजरी से 37 करोड़ रुपए के गबन का दोषी पाए जाने के बाद लालू को 2013 में भी जेल जाना पड़ा था। तब वे दो महीने रांची जेल में रहे थे। 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा था। उसी साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।
1996 में दर्ज हुआ था पहला मामला
चारा घोटाला में पहली बार 1996 में मामला दर्ज किया गया था. उस समय मामले में 49 आरोपी थे. मुकदमे के दौरान 14 की मौत हो गई. अदालत ने सोमवार को 31 आरोपियों में से 19 को दोषी करार दिया और 12 को बरी कर दिया. लालू प्रसाद को वर्ष 2013 में चारा घोटाले के पहले मामले में पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी. उन्हें 23 दिसंबर 2017 को इसके दूसरे मामले में दोषी ठहराया गया था और साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी. वहीं चारा घोटाले के तीसरे मामले में उन्हें 24 जनवरी को पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी. वर्ष 2000 में बिहार से झारखंड के अलग हो जाने के बाद चारा घोटाले से जुड़े सारे मामलों को रांची स्थानांतरित कर दिया गया था.
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