राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव को हजारीबाग चाईबासा कोषागार मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद सजा का एलान कर दिया है जिसके बाद राजद समर्थकों में मायूसी छा गई है. लालू प्रसाद यादव को पांच साल की सजा सुनाई गई है. साथ ही पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र को भी पांच साल की सजा सुनाई गई है.
लालू प्रसाद यादव को पांच साल की सजा के अलावे 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है.
इसे पहले देवघर सरकारी खजाने से 90 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद सभी 16 दोषियों पर सजा का ऐलान किया गया था. सीबीआई की विशेष जज शिवपाल सिंह अब शाम 4 बजे उनकी सजा का ऐलान करने के लिए सभी को बुलाया था लालू यादव समेत सभी 16 पर सजा का ऐलान किया था.. लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा हुई थी जबकि पांच लाख का जुर्माना भी लगाया गया था. जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा मिलेगी.
सीबीआई कोर्ट में हुआ निर्णय
रांची के सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस एस प्रसाद की अदालत में यह फैसला हुआ है. लालू प्रसाद को चाईबासा कोषागार से जुड़े इस फैसले से करारा झटका लगा है. पहले भी लालू प्रसाद यादव दो मामलों में सजायाफ्ता हो चुके हैं. 33 करोड़ से अधिक की निकासी चाईबासा कोषागार से 33 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी हुई थी. सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किया था. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि महज सात लाख के आवंटन के बावजूद 33 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी कर ली गई थी.
76 लोग हुए थे नामजद
सीबीआई ने इस मामले में 2001 में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी. सीबीआई द्वारा दाखिल किए गए आरोप पत्र में 76 लोगों को आरोपी बनाया गया था. कुल 76 आरोपियों में 14 आरोपियों की मौत हो गई थी जबकि तीन आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे. घोटाले का किंगपिन के तौर पर चर्चित दीपेश चांडक के अलावा आर के दास और शैलेश प्रसाद सिंह सरकारी गवाह बन गए थे. दो अन्य आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था.
भड़के तेजस्वी यादव
अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा है कि लालू यादव को फंसाया गया है. बिहार का जनता लालू के निर्दोष मानती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार में कई दागी बैठे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा है कि लालू यादव को फंसाया गया है. बिहार का जनता लालू के निर्दोष मानती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार में कई दागी बैठे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
लालू पहले से ही बंद हैं जेल में
इस मामले से पूर्व देवघर कोषागार मामले में लालू यादव साढ़े तीन साल की कैद की सजा काट रहे हैं. वे इस समय रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं. बीती 6 जनवरी को रांची की सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाला से जुड़े एक मामले (देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री पर इस मामले में पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना अदा ना करने की सूरत में लालू प्रसाद को और छह माह की सजा भुगतनी होगी. अदालत ने 23 दिसंबर, 2017 को इस घोटाले के संबंध में लालू प्रसाद और 15 अन्य को दोषी करार दिया था.
इस मामले से पूर्व देवघर कोषागार मामले में लालू यादव साढ़े तीन साल की कैद की सजा काट रहे हैं. वे इस समय रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं. बीती 6 जनवरी को रांची की सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाला से जुड़े एक मामले (देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री पर इस मामले में पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना अदा ना करने की सूरत में लालू प्रसाद को और छह माह की सजा भुगतनी होगी. अदालत ने 23 दिसंबर, 2017 को इस घोटाले के संबंध में लालू प्रसाद और 15 अन्य को दोषी करार दिया था.
चारा घोटाले के देवघर कोषागार से जुड़े एक मामले में साढ़े तीन साल की सजा पाने के बाद रांची के बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं. सुनवाई में दौरान अन्य आरोपी जगन्नाथ मिश्रा अपनी पत्नी के देहांत के कारण नहीं आ पाए. सुबह 11 बजे लालू यादव के वकील कोर्ट में पहुंचे, जिसके बाद जज ने कहा कि जल्द ही लालू प्रसाद यादव को कोर्ट में पेश होने के लिए कहिए. लालू को दोषी करार दिए जाने के बाद राजद नेता रघुवंश प्रसाद ने कहा कि हम इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे.
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने लालू को दोषी ठहराने के बाद कहा कि जब वह राज्य को लूट रहे थे ये उसी की सजा है. अभी तो सिर्फ तीन ही मामले में सजा मिली है, दो मामले अभी भी बाकी हैं. ये पहली बार नहीं है कि वह दोषी करार दिए गए हैं. राजद द्वारा बीजेपी पर आरोप लगाने पर उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के नेता ऐसा कह रहे हैं तो वह कोर्ट का अपमान कर रहे हैं. सुशील मोदी ने कहा कि लालू यादव किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.
देवघर कोषागार मामला
वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा संख्या आरसी 64 /1996 दर्ज किया था और लगभग 21 वर्षों बाद इस मामले में 23 दिसंबर को फैसला आया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर 2017 को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आइएएस के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, मोबाइल पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य एवं आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था.
देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये के फर्जीवाड़े के मामले से जुड़े इसी मुकदमे में 23 दिसंबर को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र एवं साधना सिंह को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था.
देवघर कोषागार मामला
वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा संख्या आरसी 64 /1996 दर्ज किया था और लगभग 21 वर्षों बाद इस मामले में 23 दिसंबर को फैसला आया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर 2017 को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आइएएस के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, मोबाइल पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य एवं आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था.
देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये के फर्जीवाड़े के मामले से जुड़े इसी मुकदमे में 23 दिसंबर को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र एवं साधना सिंह को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था.
चाईबासा के अन्य मामले में पहले भी हो चुकी है सजा
चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये की अवैध ढंग से निकासी मामले में लालू यादव को दोषी पाया गया था. इस मामले में उन्हें 5 साल की सजा सुनाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली हुई है. इसके बाद 6 जनवरी को देवघर कोषागार से जुड़े 89.37 के गबन मामले में लालू को साढ़े तीन साल कैद और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इस मामले में वे रांची की बिरसा मुंडा जेल में कैद हैं. अब यह चाईबासा कोषागार का तीसरा मामला है. इसमें 33.67 करोड़ रुपये का गबन हुआ था. इस मामले में 2001 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी. इस मामले में लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र, 3 रिटायर्ड आईएएस, पशुपालन विभाग के छह अधिकारी, तत्कालीन कोषागार अधिकारी और 40 सप्लायर शामिल आरोपी थे.
चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये की अवैध ढंग से निकासी मामले में लालू यादव को दोषी पाया गया था. इस मामले में उन्हें 5 साल की सजा सुनाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली हुई है. इसके बाद 6 जनवरी को देवघर कोषागार से जुड़े 89.37 के गबन मामले में लालू को साढ़े तीन साल कैद और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इस मामले में वे रांची की बिरसा मुंडा जेल में कैद हैं. अब यह चाईबासा कोषागार का तीसरा मामला है. इसमें 33.67 करोड़ रुपये का गबन हुआ था. इस मामले में 2001 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी. इस मामले में लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र, 3 रिटायर्ड आईएएस, पशुपालन विभाग के छह अधिकारी, तत्कालीन कोषागार अधिकारी और 40 सप्लायर शामिल आरोपी थे.
दुमका कोषागार मामला भी फाइनल में
चारा घोटाले से जुड़ा एक अन्य मामला दुमका कोषागार घोटाला की सुनवाई भी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. यह मामला अवैध रूप से 3.31 करोड़ रुपये निकाले से जुड़ा है. इस मामले की सुनवाई भी सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ही कर रहे हैं. 12 जनवरी को इस मामले में लालू यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे.
चारा घोटाले से जुड़ा एक अन्य मामला दुमका कोषागार घोटाला की सुनवाई भी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. यह मामला अवैध रूप से 3.31 करोड़ रुपये निकाले से जुड़ा है. इस मामले की सुनवाई भी सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ही कर रहे हैं. 12 जनवरी को इस मामले में लालू यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे.
क्या है चारा घोटाला
चारा घोटाला बिहार का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाले गए थे. सरकारी खजाने की इस चोरी में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव व पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र पर भी आरोप लगा. इस घोटाले के कारण लालू यादव को अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ा, लेकिन कुर्सी उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सौंपी दी थी. यह घोटाला 1996 में हुआ था लेकिन जैसे-जैसे जांच हुई इसकी पर्तें खुलती गईं और लालू यादव व जगन्नाथ मिश्र जैसे कई सफेदपोश नेता इसमें शामिल नजर आए. मामला लगभग दो दशक तक चला.
चारा घोटाला बिहार का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाले गए थे. सरकारी खजाने की इस चोरी में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव व पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र पर भी आरोप लगा. इस घोटाले के कारण लालू यादव को अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ा, लेकिन कुर्सी उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सौंपी दी थी. यह घोटाला 1996 में हुआ था लेकिन जैसे-जैसे जांच हुई इसकी पर्तें खुलती गईं और लालू यादव व जगन्नाथ मिश्र जैसे कई सफेदपोश नेता इसमें शामिल नजर आए. मामला लगभग दो दशक तक चला.
बिहार पुलिस ने 1994 में राज्य के गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिये करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किए. रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिए गए, कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और पूरे राज्य में दर्जन भर आपराधिक मुक़दमे दर्ज किए.
साल 2013 में इस मामले से जुड़े 53 में से 44 मामलों में सुनवाई पूरी हुई. 500 से ज्यादा लोगों को दोषी पाया गया और विभिन्न अदालतों ने उन्हें सजा सुनाई. इसी साल अक्टूबर में चारा घोटाले से ही जुड़े एक मामले में 37 करोड़ रुपये के गबन को लेकर लालू यादव को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई. बाद में दिसंबर में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. 10 मई, 1997 को सीबीआई ने बिहार के राज्यपाल से लालू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही जून, 1997 को सीबीआई ने बिहार सरकार के पांच बड़े अधिकारियों महेश प्रसाद, के. अरुमुगम, बेक जुलियस, फूलचंद सिंह और रामराज राम को गिरफ्तार किया था.
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