आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत काफी विवादों के बाद आज 25 जनवरी को रिलीज हो गयी है। फिल्म को लेकर देश में अभी भी विरोध प्रदर्शन जारी है। पहले पद्मावती के नाम से रिलीज होने जा रही इस फिल्म का नाम अब पद्मावत कर दिया गया है। इसके पीछे देश में चल रहा विरोध प्रदर्शन है या फिर वजह कुछ और ही है। बता दें कि भंसाली पहली रानी पद्मावती के ऊपर फिल्म नहीं बना रहे बल्कि संजय लीला भंसाली पहले भी 1980 के दशक में इस कहानी पर काम कर चुके है।
इस एपिसोड को श्याम बेनेगल ने निर्देशित किया था और संजय लीला भंसाली इस टीवी सीरीज के असिस्टेंट एडिटर हुआ करते थे। उस संजय लीला भंसाली अपने नाम के साथ ‘लीला’ नहीं लगाते थे।
भारत एक खोज के इस एपिसोड में अलाउद्दीन खिलजी को आइने के जरिये रानी पद्मावती को देखते हुए दिखाया गया था। इस एपिसोड में ‘घूमर’ भी दिखाया गया था। एपिसोड में पद्मावती के जौहर को नहीं दिखाया गया था। इस एपिसोड के अंत में ‘संजय भंसाली’ नाम को असिस्टेंट एडिटर्स की लिस्ट में सबसे ऊपर देखा जा सकता है।
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इस सीरीज में ओम पुरी ने खिलजी का रोल किया था तो वहीं राजा रतन सिंह के किरदार में राजेंद्र गुप्ता नजर आए थे। एक्ट्रेस सीमा केलकर ने रानी पद्मावती का रोल प्ले किया था।
विरोध भाजपा शासित प्रदेशों में ही क्यों?
एक प्रश्न जो करणी सेना से जवाब माँग रहा है कि क्या भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित में रहने वाले राजस्थानी और करणी सेना की मानसिकता, इतिहास और संस्कृति में अन्तर क्यों? जो हंगामा भाजपा शासित प्रदेशों में हुआ एवं इन पंक्तियों के लिखते समय तक हो रहा है, गैर-भाजपा शासित प्रदेशों में क्यों नहीं? क्या यह हंगामा किसी षड्यंत्र के तहत किया गया है? क्या यह उपद्रव राज्य की भाजपा सरकारों को बदनाम करने के लिए किसी के इशारे पर किया गया है? आखिर कौन है ये षड्यंत्रकारी? क्या था अथवा है इस षड्यंत्रकारियों का उद्देश्य? इसका जवाब करणी सेना को ही देना है। जबकि पंजाब की करणी सेना का कहना है कि फिल्म में राजपूतानी शान को आहत नहीं किया गया है। दिल्ली में भी कोई उपद्रव नहीं, सफलतापूर्वक प्रदर्शन चल रहा है।
जिन भाजपा शासित राज्यों में उपद्रव मचा है, क्या वहाँ की सरकारें वोट राजनीति को त्याग उपद्रव कर रही करणी सेना के साथ सख्ती से पेश आकर षड्यंत्रकारियों का पर्दाफाश करेंगी? इसमें दो राय नहीं कि राजस्थान में विधान सभा चुनाव कुछ ही कदम दूर है। लेकिन इस कदम से सरकार की साख और मजबूत होगी और षड्यंत्रकारी के बेनकाब होने से भविष्य में इनके स्वर मुखर नहीं हो पाएंगे। कोई षड्यंत्रकारी देश में अशान्ति फ़ैलाने का साहस भी नहीं कर पाएगा।
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