आर.बी.एल. निगम, फिल्म समीक्षक
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत रिलीज से पहले ही करणी सेना के निशाने पर हैं. 25 जनवरी को रिलीज होने वाली फिल्म पद्मावत के विषय पर पूरे देश में विराध जारी है. हाल ही में इस फिल्म को लेकर सीनियर एक्टर नाना पाटेकर से बातचीत की हुई. नानापाटेकर की फिल्म पर राय का वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर वायरल हो गया है. उनसे पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर हरी झंडी दे दी है लेकिन जिस तरह का विरोध हो रहा है. ऐसे में क्या किसी ऐतिहासिक फिल्म को आज के समय में बनाना मुश्किल है?
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत रिलीज से पहले ही करणी सेना के निशाने पर हैं. 25 जनवरी को रिलीज होने वाली फिल्म पद्मावत के विषय पर पूरे देश में विराध जारी है. हाल ही में इस फिल्म को लेकर सीनियर एक्टर नाना पाटेकर से बातचीत की हुई. नानापाटेकर की फिल्म पर राय का वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर वायरल हो गया है. उनसे पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर हरी झंडी दे दी है लेकिन जिस तरह का विरोध हो रहा है. ऐसे में क्या किसी ऐतिहासिक फिल्म को आज के समय में बनाना मुश्किल है?
गलत फिल्म पर रिएक्ट जरूर होगा
इस सवाल के जवाब में नाना पाटेकर ने कहा कि कोई भी चीज मुश्किल नहीं है. फिल्मों पर बवाल होना आम बात है. जब मूवी को सेंसर से ग्रीन सिग्नल मिल गया तो वो रिलीज होगी. हालांकि सही विषय पर फिल्म बनाएं. आप सही फिल्म बनाएंगे तो लोग रिएक्ट नहीं करेंगे. आप गलत फिल्म बनाएंगे तो लोग रिएक्ट जरूर करेंगे.
फिल्म के विषय पर रखें ध्यान
मेरी फिल्म में कभी कोई कांट्रोवर्सी नहीं हुई, मैंने क्रांतिवीर जैसी फिल्में बनाई, बोल्ड स्टेटमेंट होने के बावजूद उन पर कभी कोई बवाल नहीं हुआ. जरूरी है इस बात को याद रखना कि आप फिल्म क्या सोचकर बना रहे हैं. आप सब्जेक्ट को कैश कराना चाहते हैं या फिर आप सच में कोई कड़ा संदेश समाज को देना चाहते हैं. तुम्हारे अंदर कितनी सच्चाई है वो आंखों में दिखाई दे जाती है.
अवलोकन करें:--
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उन्होंने पद्मावती के विरोध पर बोला कि प्रसून जोशी कहते हैं बिना सीबीएफसी सर्टिफिकेट भंसाली ने स्क्रीनिंग कर दी. वहीं भंसाली दूसरा वर्जन दे रहे हैं. एक बात तय है कि फिल्म का रिलीज होना जरूरी है.
इतिहास से छेड़खानी करना गलत
मीडिया ने सवाल किया कि सिनेमा कोई टेक्सट बुक नहीं है जिस पर आप रोक लगाए. इस नाना पाटेकर ने साफ कह दिया कि विरोध गलत है, लेकिन इतिहास से छेड़खानी करेंगे तो उससे जुड़े लोगों को बुरा लगना स्वाभाविक है. फिल्म बनाते वक्त मेकर्स की जिम्मेदारी होती है कि किसी को ठेस नहीं पहुंचे. मराठी फिल्म अपाल मानुष की स्क्रीनिंग पर पहुंचे नाना पाटेकर ने कहा कि फिल्म रिलीज होने दो आपको पता चल जाएगा कि वो अच्छी है या बकवास है. कानून से बड़ा कोई नहीं, आज भी कानून है, कल भी कानून ही सबसे बड़ा रहेगा.
इतिहास की बात बोलकर, पाटेकर ने एक नए अध्याय को जन्म दे दिया है। हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान की बात करने वाले इतिहासकार किस कोने में जाकर बैठ गए हैं? केवल करणी सेना क्यों सड़क पर विरोध करने को मजबूर हैं? क्यों नहीं करणी सेना के समर्थन में बोलते? पद्मावती का नाम बदल कर पद्मावत करने से सन्देह होता है कि जरूर दाल में कुछ काला है। अगर इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी है, फिर फिल्म का नाम क्यों बदला गया? जहाँ तक इतिहास की जानकारी है, पद्मावती ने किसी खिलजी को अपने शरीर को छुना दूर, अपने पास तक नहीं आने दिया और फिल्म में वह खिलजी के दरबार या खिलजी पद्मावती के दरबार में दिखाया जा रहा है।
इतिहास की बात बोलकर, पाटेकर ने एक नए अध्याय को जन्म दे दिया है। हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान की बात करने वाले इतिहासकार किस कोने में जाकर बैठ गए हैं? केवल करणी सेना क्यों सड़क पर विरोध करने को मजबूर हैं? क्यों नहीं करणी सेना के समर्थन में बोलते? पद्मावती का नाम बदल कर पद्मावत करने से सन्देह होता है कि जरूर दाल में कुछ काला है। अगर इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी है, फिर फिल्म का नाम क्यों बदला गया? जहाँ तक इतिहास की जानकारी है, पद्मावती ने किसी खिलजी को अपने शरीर को छुना दूर, अपने पास तक नहीं आने दिया और फिल्म में वह खिलजी के दरबार या खिलजी पद्मावती के दरबार में दिखाया जा रहा है।
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