आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
देश के सबसे बड़े 2जी घोटाले में दिसम्बर 21 को अहम फैसला सुनाया गया. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और प्रमुख करूणानिधि की बेटी एवं राज्यसभा सांसद कनिमोझी सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई पर्याप्त सबूत नहीं जुटा पाई. इसलिए इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों को बरी किया जाता है.’ ये घोटाला 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में अनियमितता का था. जज ओ पी सैनी ने यह फैसला सुनाया।
देश के सबसे बड़े 2जी घोटाले में दिसम्बर 21 को अहम फैसला सुनाया गया. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और प्रमुख करूणानिधि की बेटी एवं राज्यसभा सांसद कनिमोझी सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई पर्याप्त सबूत नहीं जुटा पाई. इसलिए इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों को बरी किया जाता है.’ ये घोटाला 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में अनियमितता का था. जज ओ पी सैनी ने यह फैसला सुनाया।
देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़े सभी मामले से जुड़े सभी नेता, व्यापारियों और अधिकारियों को अब बरी कर दिया गया है. लगभग सात साल तक चले इस मामले में सुनवाई करने के बाद अब पटियाला हाऊस कोर्ट स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में ओपी सैनी ने सभी तीनों मामलों में ए राजा, कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. अदालत ने कहा है कि अभियोजन पक्ष पुख्ता साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा. इस कारण सभी आरोपियों को बरी किया जा रहा है. मालूम हो कि 2010 में भारत के महालेखा नियंत्रक एवं परीक्षक यानि कैग ने स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में धांधली की बात कही थी. इसके साथ अपनी रिपोर्ट में कैग ने सरकारी खजाने को एक लाख 76 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया था.
जानें अदालत ने क्या कहा है अपने फैसले में
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ सीबीआइ पुख्ता सबूत नहीं पेश कर सका. मामले के न्यायधीश जस्टीस ओपी सैनी ने कहा कहा है कि पैसों का लेनदेन साबित नहीं हो सका है. इसलिये मैं सभी आरोपियों को बरी कर रहा हूं. गौरतलब है कि कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि घोटाला नहीं हुआ है. कोर्ट ने कहा कि आरोपों के हिसाब से एजेंसियां सबूत पेश करने में नाकाम रहीं. कैग की रिपोर्ट में एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया था. जबकि सीबीआई की चार्जशीट में 30 हजार करोड़ के नुकसान की बात रखी गई थी. सीबीआई ने कहा है कि वो फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती देंगे. मालूम हो कि इससे पहले सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने पूर्व टेलीकॉम मंत्री और मुख्य आरोपी ए राजा को बड़ा झूठा बताया था. राजा ने सभी एजेंसियों को अंधे इंसान कहते हुये कहा था कि वे छूकर हाथी की व्याख्या कर रहे हैं.
ए राजा पर था 200 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप
दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि वो विशेष अदालत के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती देंगे. वहीं अदालत के फैसले पर कनिमोझी ने कहा कि मैं खुश हूं और सभी का धन्यवाद है. ए राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा कि इस तरह के मामलों में समय लग सकता है. लेकिन हकीकत सामने आ ही जाती है. ए राजा के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये, लेकिन सीबीआइ की तरफ से साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके. मालूम हो कि ए राजा और कनिमोझी पर 200 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप था.
जीरो लाॅस की बात हुई सच साबित
अदालत के फैसले पर पूर्व दूर संचार मंत्री मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि उनकी जीरो लॉस वाली बात सच साबित हुई. टेलीकॉम सेक्टर में जो कुछ नुकसान उठाना पड़ा उसके लिये वो लोग माफी मांगे जो उनकी बात का माखौल उठाते थे.
करूणानिधि की बेटी भी हुई बरी
टूजी जांच और अदालती कार्रवाई से जुड़े सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने जुटाये सबूतों पर भरोसा था कि इस मामले में आरोपियों को सजा जरूर मिलेगी. इस मामले पूर्व संचार मंत्री ए राजा, डीएमके के पूर्व सांसद व करुणानिधि की बेटी कनीमोझी, डीबी रियलिटी के शाहिद बलवा और यूनीटेक के संजय चंद्रा समेत कुल 17 आरोपी थे.
सीबीआई का दावा गलत तरीके से दिये गये लाइसेंस
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच पूरी करने के बाद सीबीआइ ने दो अप्रैल 2011 को इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी. इसके दो महीने बाद एक पूरक चार्जशीट दाखिल की गई. चार्जशीट में सीबीआइ ने यूनिटेक और डीबी रियलिटी के मालिकों के साथ ही राजा के तत्कालीन निजी सचिव आरके चंदौलिया और तत्कालीन दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा को आरोपी बनाया था. अदालत ने सीबीआइ की चार्जशीट पर सख्त रूख अपनाते हुये, सभी आरोपियों को जेल भेज दिया था. बाद में धीरे-धीरे जमानत पर रिहा हुये. सीबीआई का कहना था कि स्वान टेलीकाम और यूनिटेक वायरलेस टूजी स्पेक्ट्रम हासिल करने की अर्हता नहीं रखते थे. इसके बावजूद इन्हें लाइसेंस दे दिया गया था. स्वान पूरी तरह से एडीएजी की फ्रंट कंपनी थी और इसमें सीधे रिलायंस टेलीकाम की 10 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी के साथ ही लगभग 89 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी टाइगर ट्रेडर्स में एडीए ग्रुप का ही पैसा लगा था.
कांग्रेस के लोगों को मिल गया सम्मान पत्र
अदालत के फैसले के बाद सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुये वित्त मंत्री ने कहा है कि फैसला आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व एेसी बयानबाजी कर रहा है, जैसा कि उन्हें कोई सम्मान पत्र मिल गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि टूजी मामले में निलामी के द्वारा लाइसेंस नहीं दिये गये थे. टूजी आनंटन में अनियमितता बरती गयी थी. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पूरी प्रक्रिया को गलत माना था और लाइसेंस को रद्द कर दिया था. हमने जब निलामी की तो ज्यादा पैसे मिले. गलत तरीके से आवंटन से नुकसान हुआ है.
स्वान टेलिकॉम प्रमोटर्स शाहिद उस्मान बलवा के वकील विनोद गोयनका ने इस फैसले पर ख़ुशी जताई. उन्होंने कहा कि आरोप साबित नहीं किये जा सके हैं. इसलिए आरोपियों को बरी किया जा रहा है.
सीनियर डीएमके नेता दुरई मुरुगन ने कहा, यह जीत की शुरुआत है. ये केस राजनीति से प्रेरित था. हमारे खिलाफ साजिश रची गई, जो नाकाम रही है.’
इस मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि इस मामले में सरकार पर लगे आरोप साबित नहीं हुए हैं. सच सामने आ गया है. उधर यह फैसला आते ही कोर्ट के बाहर जमे डीएमके के समर्थकों ने ख़ुशी मनाई और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई.
2जी घोटाले पर सीबीआई का रुख
हालाँकि इस मामले मुंह की खाने वाली सीबीआई ने अभी हार नहीं मानी है. एजेंसी सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी.
1.76 लाख करोड़ रुपये के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के छह साल बाद सीबीआई की विशेष कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील आरोप साबित करने में आरोप रहे. कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही. इस मामले में डीएमके नेता ए राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत 17 आरोपी रहे. कोर्ट के फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील हरिहरन ने कहा कि सारा मामला धारणा पर आधारित था.
जिस बात की आशंका थी, सही सिद्ध हो गयी, क्योकि पिछली सरकार के चलते और सरकार में बदलाव आता देख भ्रष्टाचार के समस्त सबूत नेस्ताबूत कर दिए गए थे। जो निम्न लेख से सिद्ध होता है। वैसे भी किसी भी नेता पर भ्रष्टाचार सिद्ध करना बहुत कठिन होता है। इसी तरह चारा घोटाले में लालू भी साफ बरी होंगे।
अब प्रश्न यह भी होना चाहिए कि "क्या केवल धारणा पर केस दर्ज़ कर सीबीआई और कोर्ट का बहुमूल्य समय एवं धन खर्च हुआ, उसकी भरपाई कौन करेगा?" दूसरे यह कि जब ये लोग निर्दोष थे,फिर किस आधार पर इन्हे सलाखों के पीछे रखा गया था?
कोर्ट ने पाया कि इस संबंध में कोई भी सबूत पेश नहीं किया जा सका. लिहाजा सभी आरोपियों को बरी किया जाता है. फैसला आने के बाद कोर्ट के बाहर ए राजा और कनिमोझी के समर्थकों में जश्न का माहौल देखा गया. कनिमोझी के घर के बाहर भी समर्थकों को जश्न मनाते देखा गया. कोर्ट में इस फैसले से पहले लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी.
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने पूर्व मंत्री ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। दो मामले सीबीआई के थे तो एक मामला एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) का था। एक लाख 76 हजार करोड़ के इस घोटाले में यूपीए सरकार में टेलीकॉम मिनिस्टर रहे ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी समेत कई आरोपी बनाए गए थे। 2010 में कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) रहे विनोद राय की रिपोर्ट में घोटाले का खुलासा हुआ था।
सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया
- स्वान टेलीकॉम के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन आरोप साबित करने में नाकाम रहा। सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। लॉस दिखाया गया था लेकिन असल में कोई नुकसान हुआ ही नहीं। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
- राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा, "किसी भी बड़े मुकदमे में वक्त लगता है लेकिन सच्चाई सामने आ गई।''
- "मुकदमा चला तो कोई एविडेंस नहीं दिया गया। क्रिमिनल कोर्ट की अप्रोच के हिसाब से ये मुकदमा नहीं बनता।''
- "मुकदमा चला तो कोई एविडेंस नहीं दिया गया। क्रिमिनल कोर्ट की अप्रोच के हिसाब से ये मुकदमा नहीं बनता।''
देश से माफी मांगें
- कपिल सिब्बल ने कहा, "मेरी जीरो लॉस वाली बात सही साबित हुई। मैं कभी अपने बयान से नहीं पलटता। हम बेबुनियाद बातें नहीं करते। ये सब बीजेपी करती है। तब विपक्ष ने देश को गलत जानकारी दी। काफी हंगामा किया। आरोप लगाने वालों (विनोद राय) को देश से माफी मांगनी चाहिए।''
- चिदंबरम ने कहा, "कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि हमारी सरकार पर जो आरोप लगाए गए थे वो झूठे साबित हुए।''
- चिदंबरम ने कहा, "कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि हमारी सरकार पर जो आरोप लगाए गए थे वो झूठे साबित हुए।''
एेसे समझें मामला
कब सामने आया था मामला?
2010 में कैग रहे विनोद राय की रिपोर्ट से घोटाला सामने आया था।
ट्रायल कब शुरू हुआ?
2जी मामले में ट्रायल 6 साल पहले 2011 में शुरू हुआ था। कोर्ट ने 17 आरोपियों के चार्ज तय किए थे।
इन तीन मामलों पर हुई सुनवाई
# सीबीआई ने पहला केस राजा, कनिमोझी, पूर्व टेलीकॉम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के प्राइवेट सेक्रेटरी आरके चंदोलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर्स शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के गौतम दोषी, सुरेंद्र पीपरा और हरि नायर पर दायर किया था।
- सीबीआई ने कूसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रा. लि. के डायरेक्टर्स आसिफ बलवा-राजी अग्रवाल, कलाइगनार टीवी के डायरेक्टर शरद कुमार और बॉलीवुड प्रोड्यूसर करीम मोरानी को भी आरोपी बनाया था। इसमें सीबीआई ने 3 फर्म्स स्वान टेलीकॉम प्रा. लि., रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिकॉम वायरलेस (तमिलनाडु) लि. को भी केस में आरोपी बनाया।
- सीबीआई ने कूसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रा. लि. के डायरेक्टर्स आसिफ बलवा-राजी अग्रवाल, कलाइगनार टीवी के डायरेक्टर शरद कुमार और बॉलीवुड प्रोड्यूसर करीम मोरानी को भी आरोपी बनाया था। इसमें सीबीआई ने 3 फर्म्स स्वान टेलीकॉम प्रा. लि., रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिकॉम वायरलेस (तमिलनाडु) लि. को भी केस में आरोपी बनाया।
# सीबीआई के दूसरे मामले में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि-अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर विकास श्राफ शामिल हैं। चार्जशीट में लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप इंडिया मोबाइल लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग लिमिटेड कंपनियां भी आरोपी थीं।
# तीसरे मामले में ईडी ने अप्रैल 2014 में ए राजा, कनिमोझी, शाहिद बलवा, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, विनोद गोयनका, करीम मोरानी और शरद कुमार समेत 19 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
- ईडी ने डीएमके प्रमुख करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल को भी शामिल किया था। आरोप था कि स्वान टेलीकॉम से 200 करोड़ डीएमक के कलाइगनार टीवी को दिए गए। ईडी ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।
- ईडी ने डीएमके प्रमुख करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल को भी शामिल किया था। आरोप था कि स्वान टेलीकॉम से 200 करोड़ डीएमक के कलाइगनार टीवी को दिए गए। ईडी ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।
अक्टूबर 2011 में तय किए गए चार्ज
- 30 अप्रैल 2011 को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में राजा और अन्य पर 30 हजार 984 करोड़ के नुकसान का आरोप लगाया था।
- इसमें 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया।
- कोर्ट ने अक्टूबर 2011 में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत फेक फर्जी डॉक्युमेंट्स से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, अपने पद का दुरुपयोग करने और रिश्वत लेने का चार्ज लगाया।
- इसमें 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया।
- कोर्ट ने अक्टूबर 2011 में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत फेक फर्जी डॉक्युमेंट्स से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, अपने पद का दुरुपयोग करने और रिश्वत लेने का चार्ज लगाया।
क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला?
- 2010 में आई कैग की रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर इसे बांटा गया था। इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।
- ये भी बताया गया था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती।
- दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था।
- 2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी।
- ये भी बताया गया था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती।
- दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था।
- 2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी।
इस मामले में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जी न्यूज से बातचीत करते हुए कहा कि मेरी जीरो लॉस थ्योरी सही साबित हुई. इस तरह का कोई घोटाला हुआ ही नहीं है. उन्होंने कहा कि घोटाले को लेकर शक का माहौल पैदा किया गया. डीएमके नेता और राज्यसभा सांसद कनिमोझी ने फैसले के बाद कहा कि मैं उन सभी लोगों का आभार प्रकट करना चाहती हूं जो इस दौरान मेरे साथ खड़े रहे. 2G केस में फैसला आने के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में हंगामा भी हुआ. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया.
ये घोटाला यूपीए सरकार के दौरान हुआ था. सीबीआई के विशेष जज ओपी सैनी द्वारा 2जी घोटाले में सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाएंगे. 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई छह साल पहले 2011 में शुरू हुई थी जब अदालत ने 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. जिन आरोपों में आरोप तय किए गए हैं उनमें छह महीने से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है.


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