सुनेत्रा के मुताबिक, राजा के खिलाफ सबूत कमज़ोर है, इसलिए उनका अंदाजा है कि राजा रिहा होंगे। सुनेत्रा ने तिहाड़ जेल में बंद राजा से मुलाकात की, उनकी विशिष्ट दिनचर्चा को अपनी किताब में लिखा और पूरी कहानी बयां कीं। कैसे उन्हें सर्वसुविधा युक्त बैरक मिला था, कैसे तिहाड़ के अफसरों ने उनकी 13 साल की बेटी को छूट थी कि वे राजा से किसी भी दिन किसी भी समय मिल सकती थी। राजा ने सुनेत्रा को वो किस्सा भी बताया कि कैसे एक बार आम व्यक्ति ने उन्हें कहा था- ‘चिंता मत कीजिए आप बरी हो जाएंगे।’
सुनेत्रा ने राजा और देश के कई खास नामों की तिहाड़ यात्रा पर Behind Bars- Prison Tales of india’s Most Famous लिखी, जिसका हिंदी अनुवाद ‘सलाखों के पीछे’ हाल ही में मंजुल पब्लिकेशन ने जारी किया। इनमें अंका वर्मा, पीटर मुखर्जी, अमर सिंह, पप्पू यादव, कोबाड गांधी शामिल हैं। उसी के अंश पढ़िए और जानिए तिहाड़ में ए. राजा के दिन कितने ठाट से गुज़रे और उन्हें क्या-क्या सहूलियतें मिलीं-
अफसर फाइलें छानते और मैं बिरयानी खाता
‘मैं वहां सुबह के वक्त जाता। तब उनके पास कुल मिलाकर एक या दो फाइलें थीं। वे उनको पलटते रहते और किसी की समझ में नहीं आता कि 2जी घोटाला या दूरसंचार नीति क्या चीज़ थी। हम लोग (राजा व 2जी के अन्य आरोपी) कुल मिलाकर बिरयानी खाते रहते और चाय-कॉफी पीते रहते। फिर दोपहर का भोजन आ जाता। उसको खाते रहते और बाहर बैठा मीडिया यह मानकर चल रहा होता कि अंदर हमसे तगड़ी पूछताछ चल रही होगी। खाने के बाद हम अधिकारी के कक्ष में झपकी ले रहे होते।’
तिहाड़ का जेल नंबर 1 का वो बैरक नंबर 9
राजा को तिहाड़ के जेल नंबर 1 में रखा गया था। वे बताते हैं, ‘ वह उच्च सुरक्षा से संपन्न वार्ड था और हमारे अलावा उसमें आईपीएस आरके शर्मा भी थे। मैं अकेला व्यक्ति था जिसको स्वतंत्र कोठरी मिली हुई थी, जिसमें पंखा और वेस्टर्न टॉयलेट था। वह बहुत आरामदायक था।’
राजा के उस वार्ड में 5 प्रकोष्ठ (बैरक) थे और उनके लिए एक रसोईघर भी था। प्रत्येक बैरक में दो-दो कमरे थे, एक बैठक कक्ष और एक सोने का कमरा। सोने के कमरे से बाथरूम अटैच्ड था। इस ठाठदार इंतज़ाम में रहने वाले दूसरे लोगों में सुब्रत रॉय सहारा और हरियाणा के एक भूतपूर्व मंत्री गोपाल कांडा शामिल थे।
रोज़ सुबह संतरी पूछता थाः सर, आज आप क्या लेंगे?
सुनेत्रा लिखती हैं, राजा को जो कमरा दिया गया था उसमें सिर्फ एयरकंडीशन की कमी थी। लेकिन क्योंकि राजा उच्च सुरक्षा वाले कैदी थे, इसलिए दिन का वक्त वे जेल अधीक्षक के दफ्तर में गुज़ार सकते थे, जो एसी था। तब भी उनके बैरक में कूलर था। रोज़ सुबह बाकी कैदियों को 5 बजे जगा दिया जाता और उन्हें 6.30 बजे नाश्ता दिया जाता था। जबकि राजा से एक संतरी रोज़ सुबह पूछता था-सर आज आप क्या लेंगे? राजा बताते हैं, ‘सिर्फ नॉनवेज की मनाही थी लेकिन खाना बहुत स्वादिष्ट था। हमे मीठा और नारियल पानी भी मिल जाता था।’
जब मनु शर्मा ने पूछा था-सर 1.76 लाख करोड़ रखते कैसे हैं?
राजा के मुताबिक, 1.76 लाख करोड़ का आंकड़ा उनके साथ जुड़ा एक नारा बन चुका था। जेसिका लाल हत्याकांड के हत्यारे मनु शर्मा ने एक बार उनसे पूछ लिया थाः ‘सर, आप ये 1.76 लाख करोड़ रखते कैसे हैं?’ राजा के शब्दों में, जब कभी वे दूसरे कैदियों के साथ बैडमिंटन खेलते थे, उनकी आंखों में यही सवाल होता था।
राजा के खिलाफ सबूत कमज़ोर है, बरी होगा बशर्ते कोर्ट प्रेशर में न आएःसुनेत्रा
2जी केस और राजा को आपको नज़दीक से जाना है, क्या लगता है 21 को क्या फैसला आ सकता है?
सुनेत्राःअगर सबूतों पर जाएं, तो वो बरी होगा क्योंकि ‘सिर्फ एक चेक है, जिससे 200 करोड़ की रिश्वत दी गई, ऐसा सीबीआई का कहना है’ के आधार पर राजा की घोटाले में सहभागिता साबित नहीं होती। आप सोच कर देखिए कि किसी ने किसी को चेक से रिश्वत दी, व्हाइट मनी में। सीबीआई का कहना है कि लोन पर जो इंट्रेस्ट है, वो रिश्वत है। ये कैसे हो सकता है। लेकिन कई बार कोर्ट पॉपुलर परसेप्शन को भी ध्यान में रखकर फैसला सुनाता है कि जनता क्या सोचती है इसके बारे में। बहुत प्रेशर होता है जज पर। अगर ये हुआ तो बात अलग है, मैं नहीं कह सकती। सीधे शब्दों में कहूं तो राजा के खिलाफ केस कमज़ोर है। मैंने उसके चैप्टर में लिखा भी है कि किस तरह कई दिनों तक सीबीआई फाइलों में उलझी रहती थी और राजा सामने बैठकर बिरयानी और जूस ऑर्डर करता था।
आपने अपनी बुक से सज़ा और बंदी बनाए जाने के मूलभूत उद्देश्य पर सवाल उठाया है। मकसद क्या है आपका, ऐसी ‘सज़ा’ को असल ‘सज़ा’ में तब्दील कराना या व्यवस्था परिवर्तन?
सुनेत्राःबतौर पत्रकार मैं जानती हूं असलियत क्या है। मैंने ये सोचकर नहीं लिखा कि एकदम से सब बदल जाए, मैं सिर्फ इतना चाहती थी कि जो मुझे पता चला, वो सबको जानना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इन VVVIP’S और जेल की सलाखों के पीछे की सच्चाई पहुंचे, मैं सिर्फ इतना चाहती थी। बाय-चांस अंका वर्मा की स्टोरी मुझे मिली थी, उसके बाद जब रिसर्च शुरू करती गई तो ऐसी कई स्टोरीज मिलती गईं, तब लगा कि मैं इन्हें बिना लिखे नहीं रह पाऊंगी। ये पूरी अलग दुनिया है जिसके बारे में लोग जानते नहीं है कि क्या चल रहा है। मेरी बुक तो इसका सिर्फ छोटा सा हिस्सा है।
तिहाड़ से निकले एक ऐसे ही VIP ने आपकी बुक का 45 पेज का रिव्यू किया है, वो किस्सा क्या है?
सुनेत्राःमैं उनका नाम नहीं लूंगी लेकिन हां, उन्होंने मेरी इस 240 पेज की किताब का 45 पेज में रिव्यू किया है। वे हाल ही में बाहर आए हैं। उन्होंने बताया कि मेरी बुक (इंग्लिश) उन्होंने जेल के अंदर ही पढ़ी थी और वे भी अपनी ओर से मेरी लिखी बातों की पुष्टि करते हैं। उन्होंने कहा कि आपने जो लिखा है, वो बिल्कुल सच है, लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ है। उनके कमेंट और रिव्यू से मैं खुश हूं कि मैं सलाखों के पीछे की कहानियां मैंने उजागर करने की कोशिश की है।
...तो क्या मानें सलाखों के पीछे पार्ट-2 आएगी?
सुनेत्राः मैं पत्रकार हूं, मेरे पास ऐसे किस्से आते रहे, मिलते रहे तो हां जरूर पार्ट-2 आएगा। लेकिन इसके बिना मैं बचना भी चाहूंगी क्योंकि इस तरह किसी की जिंदगी में झांकना और उसे उजागर करना बड़ा ही पेनफुल होता है, इसके साइकलॉजिकल इफेक्ट भी होते हैं।
जेल में रहने के दौरान राजा परेशान दिखे? कुछ ऐसा जो लिखना छूट गया हो?
हां, राजा को 2जी केस में गिरफ्तारी के बाद अपनी 13 साल की बेटी मयूरी पर पड़े असर से बहुत परेशान थे। वह बताते थे किस तरह उनकी छोटी सी बच्ची को, जो नई दिल्ली के मातेर देई कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती थी, क्लास में और बाकी जगहों पर टोका जाता था, उससे दुर्व्यवहार किया जाता था, इससे वो ट्रामा में थी। उसका (मयूरी) परफॉर्मेंस बुरी तरह प्रभावित हुआ था और जहां उसको 85 प्रतिशत से ऊपर अंक मिलते थे, वे बहुत कम हो गए थे। राजा को इस बात का बेहद अफसोस था।
हां, राजा को 2जी केस में गिरफ्तारी के बाद अपनी 13 साल की बेटी मयूरी पर पड़े असर से बहुत परेशान थे। वह बताते थे किस तरह उनकी छोटी सी बच्ची को, जो नई दिल्ली के मातेर देई कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती थी, क्लास में और बाकी जगहों पर टोका जाता था, उससे दुर्व्यवहार किया जाता था, इससे वो ट्रामा में थी। उसका (मयूरी) परफॉर्मेंस बुरी तरह प्रभावित हुआ था और जहां उसको 85 प्रतिशत से ऊपर अंक मिलते थे, वे बहुत कम हो गए थे। राजा को इस बात का बेहद अफसोस था।
बाद में राजा और उनकी बेटी की मुलाकात के लिए तिहाड़ के अफसरों ने सभी नियम शिथिल कर दिए थे। उन्होंने मयूरी को छूट दे रखी थी कि वह स्कूल के बाद किसी भी दिन, जब भी चाहे आकर अपने पिता से मिल सकती थी। राजा इसके लिए तिहाड़ के अफसरों के शुक्रगुज़ार हैं।
----------------------------
सुनेत्रा के बारे में
सुनेत्रा के बारे में
सुनेत्रा चौधरी एक अवार्ड विनर जर्नलिस्ट हैं। वे एक अंग्रेजी चैनल में एंकर भी हैं। सुनेत्रा 24 साल की उम्र में ही एक अंग्रेजी अखबार की उप-प्रमुख रिपोर्टर बन गई थीं।
‘सलाखों के पीछे’
सुनेत्रा की बुक ‘सलाखों के पीछे’ Behind Bars- Prison Tales op india’s Most famous का हिंदी अनुवाद है, जो मंजुल पब्लिकेशन हाउस ने पब्लिश की है। ए.राजा के अलावा इसमें अंका वर्मा, पीटर मुखर्जी, अमर सिंह, पप्पू यादव, कोबाड गांधी जैसे वीवीआईपी कैदियों के जेल के अंदर के किस्से हैं। हिंदुस्तान के कुछ बेहद जाने-माने कैदियों के विस्तृत प्रत्यक्ष साक्षात्कारों पर आधारित यह किताब में सुनेत्रा जेल के वीआईपी जीवन में झांकने का एक मौका देती है। इस किताब में ब्लेडबाज़ों से लेकर यातना कक्षों तक, एयर कंडिशनरों से युक्त जेल की कोठरियों से लेकर 5 स्टार होटलों से आने वाले भोजन तक, गुदगुदे बिस्तरों से लेकर प्राइवेट पार्टियों तक के किस्से हैं।
अनुवादमदन सोनी ने किया है। कीमत है295 रुपए।(साभार)
Comments