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मुस्लिम आतंकियों ने किया विमान आईसी814 अगवा, देश 174 लोगों के लिए कर रहा था प्रार्थना, लेकिन नसीरुद्दीन शाह को थी केवल ‘इस्लाम’ की चिंता; सबसे पहला विमान अगवा तत्कालीन जनता पार्टी द्वारा इंदिरा गाँधी को गिरफ्तार करने पर कांग्रेस समर्थकों ने किया था।

                                                          आईसी814 पर नसीरुद्दीन शाह
हाल में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘आईसी-814- द कंधार हाईजैक’ फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच सीरिज के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तमाम सवालों पर बात की। इस दौरान नसीरुद्दीन शाह भी मंच पर मौजूद थे। उनसे जब 1999 की घटना पर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि उन पर हाईजैक की खबर सुनने के बाद असर क्या हुआ था।
दूसरे, आतंकवादियों को छोड़ने को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की असफलता बताने वाले देश को गुमराह कर रहे हैं, वाजपेयी ने यह निर्णय सर्वपार्टी मीटिंग में लिया था, अकेले ने नहीं। इस कटु सच्चाई को सामने लाने की बीजेपी की है। इतना ही नहीं, सबसे पहला विमान अगवा तत्कालीन जनता पार्टी द्वारा इंदिरा गाँधी को गिरफ्तार करने पर कांग्रेस समर्थकों ने किया था। इतना ही नहीं सबसे पहले आतंकवादियों को छोड़ने का सिलसिला तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह के केंद्रीय गृह मंत्री सईद मुफ़्ती की बेटी डॉ रुबिया(महबूबा मुफ़्ती की बहन) के तथाकथित अगवा किये जाने के ड्रामे में आतंकवादियों को रिहा किया गया था। 

पत्रकारों से बातचीत के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “मैं उस वक्त 50 साल का था। मैं बहुत परेशान हो गया था, क्योंकि मुझे डर था इससे इस्लामोफोबिया की लहर उठ सकती थी। खुशकिस्मती रही कि तब ऐसा नहीं हुआ, लेकिन मुझे याद है कि मैं स्थिति को लेकर बहुत चिंतित था और सोच रहा था कि यह किस ओर ले जाएगा।”

नसीरुद्दीन शाह ने आगे कहा, “जब पूरी विपदा से निपट लिया गया, तब आखिर में मेरे मन में द्वंद्व चल रहा था। जब डील पूरी हुई, तो मैं असहज था। मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों लगा, लेकिन महसूस किया कि पैसेंजर और पायलेट मुश्किल दौर से गुजरे थे।”

नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद अब एक बार फिर ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या कहीं यही असली वजह तो नहीं है कि जो सीरीज में जानबूझकर आतंकियों के असली नाम बताने की जगह उनके कोडवर्ड को ज्यादा बताया गया और ये दिखाया गया कि वो लोग कितने ज्यादा अच्छे इंसान थे।

लोगों का कहना है कि अगर कोई अपराध किसी मजहब से जुड़े आतंकियों ने किया है तो फिर उसकी जानकारी देने से इस्लामोफोबिया कैसे फैल जाएगा। इसके अलावा ये भी कहना है कि जिस समय पूरी दुनिया उन यात्रियों की सलामती की दुआ कर रहा था, उस समय में भी ये व्यक्ति सिर्फ इस्लाम के बारे में ही सोच रहा था।    

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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