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'आदिपुरुष' की राह पर अक्षय कुमार की ‘OMG2’ : सनातन का मजाक बनाना बॉलीवुड का धंधा

                                                                                              साभार: ट्विटर @MovieReviewsBlg
अक्षय कुमार की फिल्म ‘OMG2’ सेंसर बोर्ड में अटक गई है। फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया है। कुछ दृश्यों और डायलॉग पर आपत्ति जताई गई है। अब रिव्यू कमेटी का सिग्नल मिलने के बाद ही फिल्म रिलीज हो सकेगी। पहले यह फिल्म 11 अगस्त 2023 को रिलीज होनी तय थी। लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि फिल्म तय तारीख पर रिलीज हो पाएगी भी या नहीं।

‘OMG 2’ का टीजर पिछले दिनों ही रिलीज किया गया था। यह फिल्म 2012 में आई ‘OMG – Oh My God!’ का सीक्वल है। टीजर में अक्षय कुमार भगवान शिव के वेश में नजर आ रहे हैं। रेलवे के पानी से महादेव का अभिषेक करने जैसे कई दृश्य फिल्म के विवादित बताए जा रहे हैं। ऐसे में आदिपुरुष विवाद में हुई फजीहत के बाद सेंसर बोर्ड ने फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेज दिया है। आदिपुरुष पर बोर्ड को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक यह सार्वजानिक नहीं हुआ है कि ‘OMG2’ के किन डायलॉग और दृश्यों पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई है। टीजर के एक दृश्य में भगवान श‍िव बने अक्षय कुमार रेलवे ट्रैक पर बैठे हैं और उनके ऊपर यार्ड की पाइपलाइन से पानी की बौछार हो रही है। कई लोगों का मानना है कि इसी दृश्य के कारण फिल्म सेंसर बोर्ड में अटकी है।

‘OMG2’ में अरुण गोविल ने राम का किरदार निभाया है। अन्य कलाकारों में पंकज त्रिपाठी और यामी गौतम प्रमुख हैं। साल 2012 में रिलीज हुई OMG में अक्षय कुमार भगवान कृष्ण के रोल में थे। तब परेश रावल ने नास्तिक व्यक्ति कांजीलाल मेहता का किरदार निभाया था। इस बार फिल्म में वे नहीं हैं। इसी तरह OMG का उमेश शुक्ला ने किया था, लेकिन इसके सीक्वल के डायरेक्शन की बागडोर अमित राय के हाथों में है

‘OMG 2’ के टीजर में शुरुआत में आवाज गूँजती है – “ईश्वर है या नहीं, इसका प्रमाण इंसान आस्तिक या नास्तिक होकर दे सकता है, पर भगवान अपने बनाए हुए बन्दों में कभी भेद नहीं करता – फिर चाहे वो नास्तिक कांजीलाल मेहता हो या आस्तिक कांतिशरण मुद्गल।” साथ ही बैकग्राउंड में भगवान शिव के स्तोत्र की पंक्तियाँ ‘ॐ अथात्मानं शिवात्मानं श्री रुद्ररुपं ध्यायेत्’ बजती हुई सुनाई देती है। इसमें अक्षय कुमार की एंट्री गंगा नदी में स्नान करते हुए होती है।

इसमें अक्षय कुमार भगवान शिव के किरदार में दिखेंगे, जैसे फिल्म के पहले हिस्से में उन्होंने श्रीकृष्ण का रोल निभाया था। टीजर में आगे कहा जाता है, “…और तकलीफ में लगाई हुई पुकार उसे हमेशा अपने बन्दों तक खींच ही लाती है।” पंकज त्रिपाठी इसमें पूजा-पाठ करने वाले और ईश्वर में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाई देते हैं, जिनके परिवार पर कोई विपत्ति आ जाती है। फिल्म में यामी गौतम एक वकील की भूमिका में हैं।

धार्मिक यात्रा में शराब, गंगाजल और उपवास का अपमान

भारत में गंगाजल का अपना एक महत्व है, गंगा को सबसे पवित्र नदी का दर्जा दिया गया है। ऐसे में फिल्म की शुरुआत में ही एक दृश्य में दिखाया गया है कि कैसे ‘कांजीभाई’ (परेश रावल) एक महिला की मृत्यु के बाद हो रही एक धार्मिक यात्रा में सभी को शराब पिला देते हैं, सारे लोग शराब पी लेते हैं धोखे से। क्या यहाँ गंगाजल से शराब की तुलना उचित थी? इस तरह की तुलना जमजम के पानी को लेकर कभी की जा सकती है? हिन्दू धर्म में इस तरह की अपमानजनक चीजों को इतना हल्का-फुल्का बना दिया गया है कि हम इस पर हँसते हैं।
जिस तरह से हमें अपने ही ऊपर अत्याचार करने वाले आक्रांताओं का अपमान करना सिलसिलेवार तरीके से सिखाया गया, कुछ इसी तरह से हमारे भीतर ये भी व्यवस्थागत रूप से बिठा दिया गया कि अपने ही धर्म के अपमान पर हम हँसें, आपत्ति जताना तो दूर की बात है। इसी के बाद वाले दृश्य में उपवास का मजाक भी बनाया गया है। उपवास के पीछे का वैज्ञानिक महत्व आयुर्वेद में वर्णित है और मेडिकल विज्ञान भी इसे मानता है। शराब पिला कर किसी मुस्लिम का रोजा तुड़वाने वाला दृश्य बॉलीवुड कभी दिखा सकता है?

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