Skip to main content

अपर्णा सेन की फिल्म 'दी रेपिस्ट', जिसमें रेप करने वाला विलन नहीं शोध का विषय है

 

दिग्गज एक्ट्रेस और फिल्ममेकर अपर्णा सेन ने अपने करियर की तीसरी हिंदी फिल्म बनाई है. इस फिल्म का नाम है The Rapist. इस फिल्म की चर्चा अभी इसलिए हो रही है क्योंकि इसे दुनिया के प्रतिष्ठित बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया है. साथ ही इसे किम जी-सिओक अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट भी किया गया है. BIFF ने प्रीमियर से पहले ‘दी रेपिस्ट’ का ऑफिशियल ट्रेलर रिलीज़ किया है, जिसे आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं-

# ‘दी रेपिस्ट’ की कहानी दो महिलाओं के बारे में है, जो ठंड की एक रात में अपने घर से बाहर किसी जगह पर हैं. वहां उन्हें दो मनचले बाइक सवार लड़के छेड़ने की कोशिश करते हैं. वो महिलाएं इन लड़कों को बच्चा समझकर डपट देती हैं. मगर अगले दिन सुबह पुलिस को एक सुनसान इलाके में दो बेहोश महिलाएं मिलती हैं. उन महिलाओं के आसपास उनकी कुछ निजी चीज़ें और अंगवस्त्र भी पाए जाते हैं. छानबीन के बाद पुलिस को ये समझने में देर नहीं लगती है कि ये रेप का मामला है. उन महिलाओं के साथ इस तरह की हरकत करने वाला एक लड़का पकड़ा जाता है. पुलिस न सिर्फ उसे मिसट्रीट करती है, बल्कि उसका मज़ाक भी बनाती है. दूसरी तरफ इस भयावह अनुभव से गुज़री एक महिला क्रिमिनल साइकोलॉजी की प्रोफेसर है. उस महिला की ज़िंदगी तो हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाती है. मगर वो ये समझना चाहती है कि वो क्या चीज़ें हैं, जिसने एक नॉर्मल लड़के को रेपिस्ट में तब्दील कर दिया. उसकी ये पड़ताल, उसे कहां लेकर जाती है, ये हमें फिल्म में देखने को मिलेगा.

# ‘दी रेपिस्ट’ का ट्रेलर बिल्कुल कोल्ड है. आपको इसे देखने के बाद ज़्यादा कुछ महसूस ज़्यादा नहीं होगा. मगर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे. फिल्म का करीने से कटा ये क्लिप आपके दिमाग में वही सवाल बो जाता है, जो रेप पीड़ित महिला सोच रही है. ये ट्रेलर बिल्कुल धप्पा बोल देने वाला फील देता है. आप समझ नहीं पाते कि इसे देखकर कैसे रिएक्ट करें. क्योंकि ये ऐसा कुछ नहीं है, जो आपने पहले देखा है. या सिनेमा समझकर देख लेंगे. ये फिल्म सिर्फ सेक्शुअल असॉल्ट का शिकार हुईं महिलाओं के बारे में नहीं है. उन लोगों के बारे में है, जो इस तरह की हरकतों को अंजाम देते हैं. ये फिल्म उन्हें विलन बनाने की बजाय उनके इस कृत्य के पीछे की सोच और साइकॉलोजी को समझने की कोशिश करती है.

फिल्म के एक सीन में रेपिस्ट का रोल करने वाले तन्मय धनानिया और उसका मज़ाक उड़ाते पुलिसवाले.

‘दी रेपिस्ट’ ट्रेलर में एक और चीज़ ध्यान आकर्षित करती है. वो है डेथ पेनल्टी यानी सज़ा-ए-मौत वाली डिबेट. दुनिया के कई हिस्सों में डेथ पेनल्टी को खत्म कर दिया गया है. इंडिया में भी इस चीज़ को लेकर लंबी-चौड़ी बहस देखने को मिलती है. ये फिल्म उस डिबेट को टच करती है. अब देखना है कि फिल्म में इस मसले पर कितनी गंभीरता से बात होती है.

# इस फिल्म को डायरेक्ट किया है अपर्णा सेन ने. अपर्णा ने बांग्ला भाषा की फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत बतौर एक्ट्रेस की थी. उन्होंने अपने करियर में सत्यजीत रे से लेकर मृणाल सेन और तपन सिन्हा समेत तमाम क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्ममेकर्स के साथ काम किया. 1981 में उन्होंने ’36 चौरंगी लेन’ से अपने डायरेक्शन करियर की शुरुआत की. उनकी इस फिल्म को शशि कपूर ने प्रोड्यूस किया था. अपर्णा ने अपने करियर में 15 फिल्में बना चुकी हैं. अपनी इन फिल्मों के लिए वोअलग-अलग कैटेगरीज़ में 9 नेशनल अवॉर्ड्स जीत चुकी हैं. कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 1987 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

# ‘दी रेपिस्ट’ अपर्णा सेन के करियर की तीसरी हिंदी फिल्म है. इससे पहले वो ‘सारी रात’ और ‘सोनाटा’ जैसी फिल्में बना चुकी हैं. ‘दी रेपिस्ट’ बनाने के आइडिया के बारे में अपर्णा ने मशहूर सिनेमा पोर्टल वेराइटी से बात की. उन्होंने अपनी बातचीत में बताया कि उन्हें ये फिल्म बनाने का आइडिया तकरीबन 15 साल पहले आया था. मगर पिछले दिनों में देश में रेप की बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र उन्होंने इस टॉपिक पर वापस काम शुरू किया. बेसिकली अपर्णा ये समझना चाहती थीं कि कोई इंसान रेप जैसी घिनौनी हरकत कैसे करता है? कोई भी पैदाइशी रेपिस्ट तो होता नहीं है. इसमें वो सोसाइटी कितनी बड़ी भूमिका निभाती है, जहां वो इंसान पैदा हुआ? समाज में उसके साथ हुए भेदभाव का उस पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है?

अपर्णा बताती हैं कि इस फिल्म के माध्यम से वो इन सवालों के जवाब ढूंढना चाहती थीं. हालांकि फिल्म बनाने के बाद भी उनके पास इन सवालों का कोई पुख्ता जवाब नहीं है. मगर उन्हें ‘दी रेपिस्ट’ की मदद से इस आइडिया को एक्सप्लोर करने का मौका मिला.

दिग्गज फिल्म एक्ट्रेस और डायरेक्टर अपर्णा सेन.

# ‘दी रेपिस्ट’ में अपर्णा सेन की बिटिया कोंकणा सेन शर्मा ने रेप सर्वाइवर और क्रिमिनल साइकोलॉजी प्रोफेसर का रोल किया है. अपर्णा बताती हैं कि उन्होंने कोंकणा को इस फिल्म में सिर्फ इसलिए कास्ट नहीं किया क्योंकि वो उनकी बेटी हैं. बल्कि एक एक्टर के तौर पर उनकी समझ और किसी भी चीज़ को ओवर दी टॉप न ले जाने की आदत ने उन्हें इस फिल्म में काम दिलाया. कोंकणा के किरदार के पति आफताब मलिक के रोल में हैं अर्जुन रामपाल. अर्जुन का किरदार फिल्म के लिए इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वो ये दिखाने की कोशिश करता है कि रेप दो लोगों के आपसी रिश्ते को किस हद तक प्रभावित करता है. फिल्म में रेपिस्ट का टाइटल कैरेक्टर प्ले किया है तन्मय धनानिया ने. तन्मय को अपर्णा ने रॉनी सेन डायरेक्टेड फिल्म ‘कैट स्टिक्स’ में देखा था. इस फिल्म में तन्मय ने ड्रग एडिक्ट का रोल किया था, जिससे अपर्णा काफी इंप्रेस्ड हुईं.

# ‘दी रेपिस्ट’ को बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी BIFF में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया है. ये फिल्म वहां 7 अक्टूबर को प्रदर्शित की जानी है. जहां तक किम जी-सिओक अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने का सवाल है, तो इसके पीछे एक बड़ी दिलचस्प बात है. अपर्णा सेन खुद कई दफे BIFF की ज्यूरी का हिस्सा रही हैं. वो किम जी-सिओक को निजी तौर पर जानती थीं. ऐसे में उनके नाम पर रखे गए अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने को वो बड़ी उपलब्धि मानती हैं.

# इस फिल्म को एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट ने क्वेस्ट फिल्म्स के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है. एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट अब तक वेब की दुनिया में काम कर रहा था. इस प्रोडक्शन कंपनी ने अब तक ‘माइंड दी मल्होत्राज़’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’ और ‘स्कैम 1992’ जैसे हिट वेब शोज़ प्रोड्यूस किए हैं. ‘दी रेपिस्ट’ उनके प्रोडक्शन हाउस से निकलने वाली पहली है. ये फिल्म इंडिया में कब रिलीज़ होगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. मगर मेकर्स के मुताबिक ये जब भी रिलीज़ होगी, इसे ओटीटी प्लैटफॉर्म्स पर ही रिलीज़ किया जाएगा. ताकि ये कॉन्टेंट ज़्यादा से लोगों तक पहुंच सके.

Comments

AUTHOR

My photo
shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

Popular posts from this blog

बिस्तर पर इंदिरा किसी मर्द से कम न थी:--M.O MATHAI

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जब हम पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बात करते हैं, तो कई कांग्रेसी कहते हैं कि वह भारत की आयरन लेडी हैं; उसने पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित किया और कई और अधिक लेकिन क्या वे उनके अंधेरे रहस्यों के बारे में बात करेंगे? देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन से जुड़े कुछ रहस्‍यों का खुलासा एक नई किताब में किया गया है। वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार सागरिका घोष की लिखी किताब Indira: India’s Most Powerful Prime Minister में इंदिरा और फीरोज गांधी के रिश्‍तों पर नई रोशनी डाली गई है। किताब के अनुसार, ‘फीरोज ने 1955 में जब जीवन बीमा का राष्‍ट्रीयकरण किया, प्रेस का संसदीय कार्यवाही की रिपोर्ट‍िंग की आजादी दिलाई, हालांकि बाद में इस कानून को इंदिरा ने ही इमरजेंसी के दौरान कुचल दिया। सागरिका की किताब के अनुसार, दिल्‍ली में फीरोज को नेहरू की मौजूदगी से घुटन होती थी और तीन मूर्ति भवन में रहना उनके लिए असहनीय हो गया था। फीरोज की आशिक-मिजाजी के किस्‍से दिल्‍ली के गलियारों में सुनाई देने लगे थे। वह अक्‍सर तारकेश्‍वरी सिन्‍हा, महमूना सुल्‍तान और सुभद...

कायस्थ कौन हैं ?

सर्वप्रथम तो ये जान लें आप सब कि ना तो मै जातिवादी हुँ और ना ही मुझे जातिवादी बनने का शौक है और ना ही कायस्थ समाज को जागृत करने मे मेरा कोई स्वार्थ छिपा है। मै कल भी एक कट्टर सनातनी था आज भी एक कट्टर सनातनी हुँ और विश्वास दिलाता हुँ सनातन धर्म के प्रति मेरी ये कट्टरता भविष्य मे भी बनी रहेगी। इन शब्दों के बावजूद भी हमे कोई जातिवादी कहे तो मै बस इतना ही कहुँगा कि कुत्तो के भौकने से हाथी रास्ता नही बदला करते। मै ‘कायस्थ समाज’ से संबंध रखता हूँ । जो मेरे मित्र इस से सर्वथा अपरिचित हैं, उनकी जानकारी के लिए बता दुँ कि उत्तर भारत के बहुलांश क्षेत्रों मे कायस्थों की जबर उपस्थिति मौजूद है, हालांकि यह समाज देश के अन्य हिस्सों मे भी विद्यमान है । इनकी जनसंख्या काफी सीमित है परंतु इस वर्ग से संबन्धित सम्मानित महापुरुषों , विद्वानो, राजनेताओ , समाज सेवियों की एक लंबी फेहरिस्त मिलेगी जिन्होंने अपनी विद्वता, कर्मठता और प्रतिभा का लोहा पूरे विश्व मे मनवाया है । सम्राट अकबर के नवरत्न बीरबल से लेकर आधुनिक समय मे स्वामी विवेकानंद , राजा राम मोहन रॉय , महर्षि अरविंद ,श्रीमंत शंकर देव ,महर्षि महेश...

नेहरु थे भारत में पहली बूथ केप्चरिंग का मास्टर माइंड

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जवाहर लाल नेहरू देश में हुए प्रथम आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से पराजित घोषित हो चुके कांग्रेसी प्रत्याशी मौलाना अबुल कलाम आजाद को किसी भी कीमत पर जबरजस्ती जिताने के आदेश दिये थे | उनके आदेश पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं गोविन्द वल्लभ पन्त ने रामपुर के जिलाधिकारी पर घोषित हो चुके परिणाम बदलने का दबाव डाला और इस दबाव के कारण प्रशासन ने जीते हुए हिन्दू महासभा के प्रत्याशी विशन चन्द्र सेठ की मतपेटी के वोट मौलाना अबुल के पेटी के डलवाकर दुबारा मतगणना करवाकर मौलाना अबुल को जीता दिया।  ये रहस्योदघाटन उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सुचना निदेशक शम्भुनाथ टंडन ने अपने एक लेख मे किया है।  उन्होंने अपने लेख "जब विशन सेठ ने मौलाना आजाद को धुल चटाई थी भारतीय इतिहास की एक अनजान घटना " में लिखा है की भारत मे नेहरु ही बूथ कैप्चरिंग के पहले मास्टर माइंड थे। उस ज़माने में भी बूथ पर कब्जा करके परिणाम बदल दिये जाते थे और देश के प्रथम आम चुनाव मे सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस के 12 हारे हुए प्रत्याशियों को जिताया गया। ...