सरकार जम्मू-कश्मीर के पत्थरबाजों के प्रति भले ही नरम रवैया रखे और उनके प्रति हमदर्दी दिखाए लेकिन वे सुरक्षाबलों को निशाना बनाने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देते।
हमले से बचने के लिए पुलिस की जीप वहां से लौट जाती है। ईद-उल-अजहा के पावन मौके पर पत्थरबाजों ने घाटी के माहौल को एक बार फिर बिगाड़ने की कोशिश की है।
पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार ने पत्थरबाजों के प्रति दरियादिली दिखाते हुए फरवरी 2018 में करीब 10 हजार पत्थरबाजों को रिहाई का आदेश दिया। इनमें से अधिकांश युवा ऐसे थे जो पत्थरबाजी की घटना में पहली बार शामिल हुए थे। सरकार ने उम्मीद जताई कि ये युवा अपनी रिहाई के बाद शांति के रास्ते पर चलेंगे लेकिन इन घटनाओं से यही जाहिर होता है कि सुरक्षाबलों के प्रति उनके नजरिए में कोई सुधार नहीं हुआ है।
पत्थरबाज हाथ में ISIS के झंडे लिए हैं और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं. पत्थरबाजों का जवाब देने के लिए पुलिस, सीआरपीएफ और सुरक्षा बल के जवानों ने आंसू गैस के गोले छोड़े. जानकारी के मुताबिक, ईद की नमाज के बाद ये हंगामा शुरू हुआ.
#JammuAndKashmir: Clashes break out between security forces and protesters in Srinagar.
ये पहली बार नहीं है जब इस तरह से पुलिस और पत्थरबाजों के बीच ये झड़प हुई है. अनंतनाग में आए दिन इस तरह की खबरें आती रही हैं. इससे पहले भी अनंतनाग में स्पोर्टस फेस्टिवल के दौरान युवाओं ने पत्थर फेंके. इस दौरान कई छात्र घायल हुए थे, जिसके कारण फेस्टिवल को रद्द कराना पड़ा.
जुलाई 2016 में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में तेजी आ गई। इस दौरान सुरक्षाबलों के साथ झड़प में कई युवाओं की जान भी गई।
पत्थरबाजों से केस हटाने के लिए केंद्र सरकार पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का दबाव काम कर रहा था। कहा यह भी जाता है कि पत्थरबाजों एवं अलगाववादियों के प्रति महबूबा मुफ्ती नरम रुख रखती हैं। महबूबा की इन्ही तुष्टिकरण की नीतियों से परेशान होकर राज्य में भाजपा गठबंधन सरकार से अलग हो गई।
अप्रैल 2017 में मेजर गोगोई ने पत्थरबाजों से बचने के लिए अपनी जीप के बोनट पर एक पत्थरबाज को बांध दिया था। मेजर ने एक शील्ड के रूप में पत्थरबाज का इस्तेमाल किया। इस घटना को लेकर मेजर गोगोई की काफी आलोचना हुई। जबिक मेजर गोगोई ने अपने बचाव में कहा कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो कई लोगों की जान जा सकती थी। मेजर गोगोई एक उपुचनाव के दौरान मतदान केंद्र पर फंसे मतदानकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाले जा रहे थे तभी उनके दल पर पत्थरबाजों ने हमला कर दिया।
अब मानवाधिकार, #not in my name, #mob lynching gang, #intolerence in india, आदि आदि चिल्लाने वाले पता नहीं किस बिल में छुपकर बैठे हैं, किसी की आवाज़ नहीं आ रही। जब सुरक्षाकर्मी पत्थर का जवाब गोली से देंगे, ये जितने भी गैंग हैं, एक साथ बाहर आकर चिल्लायेंगे कि "देखो कश्मीरी नौजवानों पर सरकार कितना जुल्म कर रही है।"
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