नाम बड़े और दर्शन छोटे। दिल्ली एनसीआर के बड़े नामी अस्पतालों का भी यही हाल है। दिल्ली एनसीआर के ये बड़े अस्पताल अपनी चौंका देने वाली लापरवाहियों के लिए कुख्यात हैं। ऐसा ही एक मामला नोएडा के थाना सेक्टर-58 अंतर्गत स्थित नामी अस्पताल फोर्टिस का सामने आया है।
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में शनिवार को दादरी की रहने वाली 54 वर्षीय एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। महिला को किड़नी और लीवर की समस्या थी। इसी के इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरतते हुए महिला की जगह पुरुष का शव उसके घर भेज दिया।
उधर महिला की मौत के बाद उसके घर पर मातम फैल गया था। आसपास के लोग और रिश्तेदार घर पर जुट गए थे। घर पर लोग इंतजार कर रहे थे कि महिला का शव घर पहुंचे तो अंतिम संस्कार शुरू किया जाए। परिजन और रिश्तेदार अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे थे। इसी दौरान अस्पताल से एंबुलेंस जब शव लेकर उनके घर पहुंची तो सभी लोग हैरान रह गए। कुछ देर के लिए घर में मातम मना रहे लोग भी शांत हो गए।
लोगों को जब पता चला कि अस्पताल ने एंबुलेंस में महिला की जगह पुरुष का शव भेज दिया है तो वह भड़क गए। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन को फोन कर भड़ास निकाली। जिस एम्बुलेंस से शव आया था, उसी से परिजन ने शव वापस कर दिया। इसके बाद परिजन खुद अस्पताल में शव लेने पहुंच गए। अस्पताल में पहुंचकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन ने काफी समझा-बुझाकर और माफी मांग कर गुस्साए लोगों को शांत कराया।
परिजन ने नहीं की शिकायत
परिजन के अनुसार उस वक्त वह लोग दुख में थे। इसलिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से शिकायत करनेकी जगह पहले शव का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। इसलिए मामले में उस वक्त कोई शिकायत नहीं की गई थी। उनके अस्पताल पहुंचने पर अस्पताल प्रबंधन के लोगों ने भी उनसे माफी मांगी थी।
अस्पताल ने परिजन पर ही फोड़ा लापरवाही का ठीकरा
महिला की जगह पुरुष का शव भेजने के मामले में फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि 18 अगस्त को लगभग 15 मिनट के अंतराल में अस्पताल में दो मौते हुईं थीं। एक पुरुष था और दूसरा ये महिला थी। शवों को सौंपते वक्त हमारी मोर्चरी के अधिकारियों ने नियमानुसार दोनों परिवारों से शवों की पहचान करने को कहा था। इस दौरान एक परिवार ने शव की पहचान करने में गड़बड़ी कर दी। इस वजह से पीड़ित परिवार खुद पुरुष का शव ले गया था। हालांकि जल्द ही गलती पहचान ली गई और तुरंत उसे सुधार लिया गया। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रबंधन आवश्यक कदम उठाएगा।
पहले भी इस अस्पताल पर लगे हैं लापरवाही के आरोप
नोएडा के जिस नामी अस्पताल में महिला का शव बदलने की घटना हुई है। उसी अस्पताल में इससे पहले भी लापरवाही के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इसी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान एक मरीज के पेट में तौलिया छोड़ दिया गया था। इसके अलावा अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही से मौत के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
अस्पताल में एक बार गलत ऑपरेशन करने का भी मामला सामने आ चुका है। हाल में ये अस्पताल अपने महंगे इलाज की वजह से सुर्खियों में रहा था, जिसके बाद जांच के आदेश भी दिए गए थे। कई बार अस्पताल के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज कराई गई और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की तरफ से जांच भी कराई गई। बावजूद न तो कभी अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्यवाही हुई और न ही अस्पताल प्रबंधन के रवैये में कोई सुधार आया।
अब प्रश्न यह होता है कि उपभोक्ता और स्वास्थ्य मंत्रालय ऐसे नामचीन हस्पतालों की लापरवाहियों का संज्ञान लेने का प्रयास करेंगे या पूंजीपतियों के आगे नतमस्तक होकर मरीजों के परिजनों को लूटने-पिटने के लिए असहाय छोड़ देंगे। आखिर कब तक जनता इन नामचीन हस्पतालों की लापरवाही का शिकार होती रहेगी? अनेकों बार यह भी समाचार आते रहे हैं कि मृतक मरीज को वेंटिलेटर पर रख जीवित बताकर उस मृतक के परिजनों से खर्चा जमा करवाने को कहा जाता है। परिजन अपने मरीज से मिलना चाहते हैं, लेकिन मिलने नहीं दिया जाता, अगर मिलने दें तो उनका भांडा फूट जाएगा। वातानुकूलित बनाए पूरे हस्पताल का खर्चा आखिर इस तरह लूटपाट से ही तो आएगा।
अभी दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में स्थित चानन देवी हॉस्पिटल के निकट ऐसे ही हस्पताल में जाने का अवसर मिला। लेबर रूम के बाहर प्रतीक्षालय में एयर कंडीशन है, लेकिन बंद है, केवल एक दीवार का पंखा चल रहा है।शौचालय में पानी की टूटियां ख़राब, फ्लश ख़राब, जबकि इंटरनेट पर सुसज्जित दर्शाया हुआ है। प्रसूति के लिए किसी भी नामचीन में जाइए, तिथि दी जाएगी नॉर्मल डिलीवरी की, लेकिन डिलीवरी होगी ऑपरेशन से। क्योंकि इन नामचीन हॉस्पिटलों की कमाई ऑपरेशन से होती है, नार्मल से नहीं।
यदि गम्भीरता से जाँच की जाए तो सरकारी हस्पतालों से अधिक लापरवाही इन बड़े हस्पतालों में हैं, जहाँ बिना धन जमा किए बगैर मरीज का इलाज नहीं किया जाता। इन नामचीन हस्पतालों की लूटपाट नीति को सरकार चाहे तो सुविधाओं सहित बड़े सरकारी हस्पताल खोलकर समाप्त कर सकती हैं। समस्या यह है कि सरकार कोई भी हो इन पूँजीपतियों द्वारा निर्मित हस्पतालों के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने में संकोच करती है।
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में शनिवार को दादरी की रहने वाली 54 वर्षीय एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। महिला को किड़नी और लीवर की समस्या थी। इसी के इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरतते हुए महिला की जगह पुरुष का शव उसके घर भेज दिया।
उधर महिला की मौत के बाद उसके घर पर मातम फैल गया था। आसपास के लोग और रिश्तेदार घर पर जुट गए थे। घर पर लोग इंतजार कर रहे थे कि महिला का शव घर पहुंचे तो अंतिम संस्कार शुरू किया जाए। परिजन और रिश्तेदार अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे थे। इसी दौरान अस्पताल से एंबुलेंस जब शव लेकर उनके घर पहुंची तो सभी लोग हैरान रह गए। कुछ देर के लिए घर में मातम मना रहे लोग भी शांत हो गए।
लोगों को जब पता चला कि अस्पताल ने एंबुलेंस में महिला की जगह पुरुष का शव भेज दिया है तो वह भड़क गए। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन को फोन कर भड़ास निकाली। जिस एम्बुलेंस से शव आया था, उसी से परिजन ने शव वापस कर दिया। इसके बाद परिजन खुद अस्पताल में शव लेने पहुंच गए। अस्पताल में पहुंचकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन ने काफी समझा-बुझाकर और माफी मांग कर गुस्साए लोगों को शांत कराया।
परिजन ने नहीं की शिकायत
परिजन के अनुसार उस वक्त वह लोग दुख में थे। इसलिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से शिकायत करनेकी जगह पहले शव का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। इसलिए मामले में उस वक्त कोई शिकायत नहीं की गई थी। उनके अस्पताल पहुंचने पर अस्पताल प्रबंधन के लोगों ने भी उनसे माफी मांगी थी।
अस्पताल ने परिजन पर ही फोड़ा लापरवाही का ठीकरा
महिला की जगह पुरुष का शव भेजने के मामले में फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि 18 अगस्त को लगभग 15 मिनट के अंतराल में अस्पताल में दो मौते हुईं थीं। एक पुरुष था और दूसरा ये महिला थी। शवों को सौंपते वक्त हमारी मोर्चरी के अधिकारियों ने नियमानुसार दोनों परिवारों से शवों की पहचान करने को कहा था। इस दौरान एक परिवार ने शव की पहचान करने में गड़बड़ी कर दी। इस वजह से पीड़ित परिवार खुद पुरुष का शव ले गया था। हालांकि जल्द ही गलती पहचान ली गई और तुरंत उसे सुधार लिया गया। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रबंधन आवश्यक कदम उठाएगा।
पहले भी इस अस्पताल पर लगे हैं लापरवाही के आरोप
नोएडा के जिस नामी अस्पताल में महिला का शव बदलने की घटना हुई है। उसी अस्पताल में इससे पहले भी लापरवाही के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इसी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान एक मरीज के पेट में तौलिया छोड़ दिया गया था। इसके अलावा अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही से मौत के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
अस्पताल में एक बार गलत ऑपरेशन करने का भी मामला सामने आ चुका है। हाल में ये अस्पताल अपने महंगे इलाज की वजह से सुर्खियों में रहा था, जिसके बाद जांच के आदेश भी दिए गए थे। कई बार अस्पताल के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज कराई गई और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की तरफ से जांच भी कराई गई। बावजूद न तो कभी अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्यवाही हुई और न ही अस्पताल प्रबंधन के रवैये में कोई सुधार आया।
अब प्रश्न यह होता है कि उपभोक्ता और स्वास्थ्य मंत्रालय ऐसे नामचीन हस्पतालों की लापरवाहियों का संज्ञान लेने का प्रयास करेंगे या पूंजीपतियों के आगे नतमस्तक होकर मरीजों के परिजनों को लूटने-पिटने के लिए असहाय छोड़ देंगे। आखिर कब तक जनता इन नामचीन हस्पतालों की लापरवाही का शिकार होती रहेगी? अनेकों बार यह भी समाचार आते रहे हैं कि मृतक मरीज को वेंटिलेटर पर रख जीवित बताकर उस मृतक के परिजनों से खर्चा जमा करवाने को कहा जाता है। परिजन अपने मरीज से मिलना चाहते हैं, लेकिन मिलने नहीं दिया जाता, अगर मिलने दें तो उनका भांडा फूट जाएगा। वातानुकूलित बनाए पूरे हस्पताल का खर्चा आखिर इस तरह लूटपाट से ही तो आएगा।
अभी दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में स्थित चानन देवी हॉस्पिटल के निकट ऐसे ही हस्पताल में जाने का अवसर मिला। लेबर रूम के बाहर प्रतीक्षालय में एयर कंडीशन है, लेकिन बंद है, केवल एक दीवार का पंखा चल रहा है।शौचालय में पानी की टूटियां ख़राब, फ्लश ख़राब, जबकि इंटरनेट पर सुसज्जित दर्शाया हुआ है। प्रसूति के लिए किसी भी नामचीन में जाइए, तिथि दी जाएगी नॉर्मल डिलीवरी की, लेकिन डिलीवरी होगी ऑपरेशन से। क्योंकि इन नामचीन हॉस्पिटलों की कमाई ऑपरेशन से होती है, नार्मल से नहीं।
यदि गम्भीरता से जाँच की जाए तो सरकारी हस्पतालों से अधिक लापरवाही इन बड़े हस्पतालों में हैं, जहाँ बिना धन जमा किए बगैर मरीज का इलाज नहीं किया जाता। इन नामचीन हस्पतालों की लूटपाट नीति को सरकार चाहे तो सुविधाओं सहित बड़े सरकारी हस्पताल खोलकर समाप्त कर सकती हैं। समस्या यह है कि सरकार कोई भी हो इन पूँजीपतियों द्वारा निर्मित हस्पतालों के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने में संकोच करती है।
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