12 अगस्त को आज अमिताभ बच्चन की मां और सोशल एक्टिविस्ट तेजी बच्चन जिंदा होती तो अपना 104वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही होतीं। उनका जन्म 1914 को ल्यालपुर (पंजाब) में हुआ था। तेजी शुरुआती दौर में इलाहबाद यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी की टीचर थीं यहीं हरिवंश राय इंग्लिश लिटरेचर पढ़ाते थे। कम ही लोग जानते हैं दोनों यश चोपड़ा की फिल्म 'कभी-कभी'(1976) में कैमियो कर चुके हैं। बता दें, दोनों के दो बेटे अमिताभ(बड़े) और अजिताभ(छोटे) हैं। जहां बिगबी ने बॉलीवुड में करियर बनाया तो वहीं उनके भाई अजिताभ बच्चन बिजनेसमैन हैं।
19 साल की उम्र में 14 साल की श्यामा से हरिवंश राय ने की थी पहली शादी
मई 1926 में जब हरिवंश राय बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ रहे थे, तभी उनकी शादी इलाहाबाद की रहने वाली श्यामा देवी से कर दी गई थी। उस वक्त हरिवंश राय बच्चन की उम्र 19 और श्यामा देवी की उम्र 14 साल थी।'
शादी के 3 साल बाद 1929 में हरिवंश राय और श्यामा देवी का गौना हुआ। जब श्यामा देवी ससुराल आई तो वो बीमार थीं, बुखार से पीड़ित थीं।
इलाज के दौरान ही पता चला कि उनको टीबी है। ये जानकर हरिवंश राय को गहरा धक्का लगा था। बावजूद इसके वो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करते थे और हमेशा उन्हीं के साथ उनकी देखभाल में लगे रहते थे।
घरवालों और डॉक्टर को डर था कि कहीं दोनों के बीच सेक्शुअल रिलेशन ना बने, इससे आगे चलकर उन्हें भी टीबी हो जाए। लेकिन पति-पत्नी की ट्यूनिंग के आगे घरवाले निरुत्तर थे। करीब 10 साल तक वैवाहिक जीवन बिताने के बाद 1936 में श्यामा की मौत हो गई, पत्नी की मौत से डॉक्टर बच्चन टूट चुके थे।
श्यामा की मौत के 5 साल बाद हुई थी तेजी सूरी से मुलाकात
श्यामा की मौत के पांच साल बाद 1941 में उनकी मुलाकात तेजी बच्चन से हुई। ये मुलाकात बरेली में उनके दोस्त प्रकाश के घर पर हुई थी। नए साल का जश्न मनाने की तैयारी थी, 31 दिसंबर की रात थी।
डॉ. बच्चन से सबने अपनी काव्य रचना सुनाने का आग्रह किया। इस पर डॉ. बच्चन ने ऑटो बायोग्राफी में लिखा है- "मैंने गीत सुनाना शुरू किया, मैं एक पलंग पर मैं बैठा था, मेरे सामने प्रकाश बैठे थे और मिस तेजी सूरी उनके पीछे खड़ी थीं। गीत सुनाते-सुनाते मेरा गला भर आया। कविता सुनकर मिस सूरी की आंखें नम हो गईं और उनके आंसू टप-टप प्रकाश के कंधे पर गिर रहे थे। ये देख मेरा गला भी भर आया।''
यहीं से दोनों की प्रेम कहानी शुरू हुई और कुछ दिन बाद दोनों ने शादी कर ली। हालांकि इस शादी में भी अड़चन थी, क्योंकि तेजी सूरी पंजाबी थीं, जो उनके परिवार को मंजूर नहीं था। लेकिन इस बार हरिवंश राय ने परिवार से अलग जाकर अपनी शादी की। यही वजह थी कि तेजी बच्चन कभी अपने ससुराल नहीं गईं।
क्रिश्चियन महिला से भी हुआ अफेयर, लेकिन नहीं हो पाई शादी
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में डॉ हरिवंश राय बच्चन अस्थार्इ अध्यापक के तौर पर पढ़ाने का मौका मिला। वो विश्वविद्याल के पास किराए के मकान में ही रहने लगे थे। इसी साल सुमित्रानंदन पंत से भी उनकी दोस्ती हो गई। इसी बीच आइरिस नाम की र्इसार्इ महिला से उनकी मुलाकात हुर्इ।
एक समय बाद ये दोस्ती प्रेम में बदल गर्इ, लेकिन इन दोनों के बीच धर्म आड़े आ गया। उनके माता-पिता को किसी दूसरे धर्म की लड़की से से हरिवंश की शादी करना मंजूर नहीं था।
उस वक्त उनके पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव बीमार चल रहे थे, इसलिए हरिवंश राय दबाव भी नहीं बना पाए। ये प्रेम कहानी भी अधूरी रह गई थी।
19 साल की उम्र में 14 साल की श्यामा से हरिवंश राय ने की थी पहली शादी
मई 1926 में जब हरिवंश राय बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ रहे थे, तभी उनकी शादी इलाहाबाद की रहने वाली श्यामा देवी से कर दी गई थी। उस वक्त हरिवंश राय बच्चन की उम्र 19 और श्यामा देवी की उम्र 14 साल थी।'
शादी के 3 साल बाद 1929 में हरिवंश राय और श्यामा देवी का गौना हुआ। जब श्यामा देवी ससुराल आई तो वो बीमार थीं, बुखार से पीड़ित थीं।
इलाज के दौरान ही पता चला कि उनको टीबी है। ये जानकर हरिवंश राय को गहरा धक्का लगा था। बावजूद इसके वो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करते थे और हमेशा उन्हीं के साथ उनकी देखभाल में लगे रहते थे।
घरवालों और डॉक्टर को डर था कि कहीं दोनों के बीच सेक्शुअल रिलेशन ना बने, इससे आगे चलकर उन्हें भी टीबी हो जाए। लेकिन पति-पत्नी की ट्यूनिंग के आगे घरवाले निरुत्तर थे। करीब 10 साल तक वैवाहिक जीवन बिताने के बाद 1936 में श्यामा की मौत हो गई, पत्नी की मौत से डॉक्टर बच्चन टूट चुके थे।
श्यामा की मौत के 5 साल बाद हुई थी तेजी सूरी से मुलाकात
श्यामा की मौत के पांच साल बाद 1941 में उनकी मुलाकात तेजी बच्चन से हुई। ये मुलाकात बरेली में उनके दोस्त प्रकाश के घर पर हुई थी। नए साल का जश्न मनाने की तैयारी थी, 31 दिसंबर की रात थी।
डॉ. बच्चन से सबने अपनी काव्य रचना सुनाने का आग्रह किया। इस पर डॉ. बच्चन ने ऑटो बायोग्राफी में लिखा है- "मैंने गीत सुनाना शुरू किया, मैं एक पलंग पर मैं बैठा था, मेरे सामने प्रकाश बैठे थे और मिस तेजी सूरी उनके पीछे खड़ी थीं। गीत सुनाते-सुनाते मेरा गला भर आया। कविता सुनकर मिस सूरी की आंखें नम हो गईं और उनके आंसू टप-टप प्रकाश के कंधे पर गिर रहे थे। ये देख मेरा गला भी भर आया।''
यहीं से दोनों की प्रेम कहानी शुरू हुई और कुछ दिन बाद दोनों ने शादी कर ली। हालांकि इस शादी में भी अड़चन थी, क्योंकि तेजी सूरी पंजाबी थीं, जो उनके परिवार को मंजूर नहीं था। लेकिन इस बार हरिवंश राय ने परिवार से अलग जाकर अपनी शादी की। यही वजह थी कि तेजी बच्चन कभी अपने ससुराल नहीं गईं।
क्रिश्चियन महिला से भी हुआ अफेयर, लेकिन नहीं हो पाई शादी
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में डॉ हरिवंश राय बच्चन अस्थार्इ अध्यापक के तौर पर पढ़ाने का मौका मिला। वो विश्वविद्याल के पास किराए के मकान में ही रहने लगे थे। इसी साल सुमित्रानंदन पंत से भी उनकी दोस्ती हो गई। इसी बीच आइरिस नाम की र्इसार्इ महिला से उनकी मुलाकात हुर्इ।
एक समय बाद ये दोस्ती प्रेम में बदल गर्इ, लेकिन इन दोनों के बीच धर्म आड़े आ गया। उनके माता-पिता को किसी दूसरे धर्म की लड़की से से हरिवंश की शादी करना मंजूर नहीं था।
उस वक्त उनके पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव बीमार चल रहे थे, इसलिए हरिवंश राय दबाव भी नहीं बना पाए। ये प्रेम कहानी भी अधूरी रह गई थी।
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