यह उस वक़्त हाल है, जब कहीं भी बैठे आप इंटरनेट के माध्यम से किसी भी गाड़ी के समय-सारिणी के विषय में जानकारी ले सकते हैं। लेकिन रेलवे अधिकारी किसी पैसेंजर तो क्या किसी सुपर फ़ास्ट ट्रेन को निर्धारित समय पर चलाने में पूर्णरूप से सक्षम नहीं। केन्द्र सरकार जनता को बुलेट ट्रेन की लॉलीपॉप दे रही है। सरकार रेलवे से पहले गाड़ियों को समय से चलाने को कहे, फिर जनता को बुलेट ट्रेन के सपने दिखाए।
अवलोकन करें:--·
उत्तर रेलवे में मात्र 56 फीसदी गाड़ियां ही समय पर
बैठक में पांच जोनों में रेलगाड़ियों के समय पर चलने की स्थिति की समीक्षा के दौरान ये तथ्य सामने आए कि उत्तर रेलवे मात्र 56 फीसदी रेलगाड़ियों को ही समय पर चला सका। आंकड़ों के अनुसार 122 में से 48 रेलगाड़ियां विभिन्न कारणों के देरी से चल रहीं थीं। वहीं आंकड़ों की समीक्षा से ये तथ्य सामने आए कि गाड़ियों को समय से चलाने की स्थिति दिन प्रति खराब होती जा रही है। उत्तर रेल अधिकारियों की मानें तो उत्तर रेलवे में औसतन मात्र 60 फीसदी गाड़ियां समय पर चल पा रही हैं।
गाड़ियों को समय पर चलाने के लिए जारी किए गए आदेश
उत्तर रेलवे में रेलगाड़ियों को समय पर चलाए जाने के लिए रेलवे बोर्ड की ओर से कई निर्णय लिए गए हैं।इसके तहत किसी भी गाड़ी के चलने के समय में तब तक परिवर्तन नहीं किया जाएगा जब तक बेहद जरूरी न हो। गाड़ियों को समय से चलाने के लिए उत्तर रेलवे से लगने वाले जोन व मंडलों से बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। किसी एक मंडल से दूसरे मंडल में कितनी देर में गाड़ी पहुंचेगी इसकी भी सूचना पहले से दी जाएगी। गाड़ियों के मेंटिनेंस के लिए वॉशिंग लाइन स्लॉट और अन्य संसाधनों की बेहतर प्लानिंग होगी।
रेलवे के सदस्य यातायात खुद रखेंगे नजर
एक तरफ जहां रेलवे के सभी मंडलों को गाड़ी को समय पर चलाने के निर्देश दिए गए हैं वहीं लगभग 36 ट्रेनों के समय से चलने की स्थिति पर रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात खुद नजर रखेंगे। इन ट्रेनों में लगभग सभी मेल एक्सप्रेस ट्रेनें हैं. इनमें प्रमुख रूप से अमृतसर हावड़ा एक्सप्रेस, अमृतसर मेल गोमती एक्सप्रेस जनसेवा एक्सप्रेस आदि गाड़ियां शामिल हैं।
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