राजनीति के एक युग अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार(अगस्त 16) शाम 5.05 बजे निधन होने के बाद शुक्रवार शाम 5 बजे उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। गुरुवार को हुए निधन के बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई और स्मृति वन में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अस्थियां हरिद्वार में प्रवाहित की जाएंगी।
अटल जी की अंतिम यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। वो भाजपा कार्यालय से स्मृति स्थल तक पैदल ही अटल जी के अंतिम सफर में चले। उनके पंचतत्व में विलीन होने के बाद एक बार फिर पीएम मोदी भावुक हो गए। उन्होंने ट्वीट किया, "अटल जी आप हर भारतीय के दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस देश के निर्माण के लिए जो काम आपने किया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।"
अपने जीवन में कई नेताओं की शव यात्राएँ देखी, लेकिन किसी प्रधानमन्त्री को पहली बार अटलजी की शव यात्रा में पैदल चलते पहली बार देख, ऐसा आभास होता है "क्या अटल और मोदी इतिहास रचने के लिए राजनीति में आये हैं?" अंतिम यात्रा भाजपा मुख्यालय से आईटीओ, दिल्ली गेट, नेताजी सुभाष मार्ग होते हुए राष्ट्रीय स्मृति वन पहुँचा। प्रधानमन्त्री मोदी उन स्थितियों में जनसैलाब के बीच इन सडकों पर पैदल चले, जबकि आतंकवाद की काली छाया चारों ओर फैली हुई हैं।
भारतीय जनसंघ अध्यक्ष दीन दयाल जी की शव यात्रा भी चावड़ी बाजार जैसे क्षेत्र से निकली थी, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों के अतिरिक्त जितने भी पदाधिकारी थे, सब किसी न किसी वाहन पर सवार थे।
दीन दयालजी के अतिरिक्त लाल बहादुर शास्त्री, संजय, इन्दिरा गाँधी और राजीव गाँधी आदि की शव यात्राएँ देखी, लेकिन इन सभी यात्राओं में सभी मंत्रीगण अपनी-अपनी गाड़ियों में रहे।
#Delhi: The mortal remains of former PM #AtalBihariVajpayee being taken to Smriti Sthal for the funeral. PM Modi, Amit Shah and other BJP leaders also take part in the procession.
अपने जीवन में कई नेताओं की शव यात्राएँ देखी, लेकिन किसी प्रधानमन्त्री को पहली बार अटलजी की शव यात्रा में पैदल चलते पहली बार देख, ऐसा आभास होता है "क्या अटल और मोदी इतिहास रचने के लिए राजनीति में आये हैं?" अंतिम यात्रा भाजपा मुख्यालय से आईटीओ, दिल्ली गेट, नेताजी सुभाष मार्ग होते हुए राष्ट्रीय स्मृति वन पहुँचा। प्रधानमन्त्री मोदी उन स्थितियों में जनसैलाब के बीच इन सडकों पर पैदल चले, जबकि आतंकवाद की काली छाया चारों ओर फैली हुई हैं।
भारतीय जनसंघ अध्यक्ष दीन दयाल जी की शव यात्रा भी चावड़ी बाजार जैसे क्षेत्र से निकली थी, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों के अतिरिक्त जितने भी पदाधिकारी थे, सब किसी न किसी वाहन पर सवार थे।
दीन दयालजी के अतिरिक्त लाल बहादुर शास्त्री, संजय, इन्दिरा गाँधी और राजीव गाँधी आदि की शव यात्राएँ देखी, लेकिन इन सभी यात्राओं में सभी मंत्रीगण अपनी-अपनी गाड़ियों में रहे।
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